परिवारवाद के खिलाफ बीजेपी की मुहिम को मिल रही है नई धार, जानें अगले निशाने पर कौन

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सांकेतिक तस्वीर.फोटो: इंडिया टुडे

संघ से बीजेपी संगठन में आए मध्यप्रदेश के प्रभारी मुरलीधर राव शुक्रवार को लखनऊ पहुंचे. मुरलीधर राव ने बताया कि पीएम नरेंद्र मोदी की परिवारवाद के खिलाफ जेहाद का असल सियासी लक्ष्य कहां है. दरअसल, बीजेपी के लिए सियासी रणनीति तय करने वाले लोगों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी ने जो ये परिवारवाद के खिलाफ मुहिम छेड़ी है, इसका असर कुछ सालों में दक्षिण के राज्यों में दिखाई देने लगेगा.

लखनऊ पहुंचे मुरलीधर राव ने यूपी तक से बातचीत में बताया कि बीजेपी का जो 'प्लान परिवारवाद' है ये पार्टी को दक्षिण में सिर्फ पांव जमाने की नहीं बल्कि उत्तर भारत की तरह बड़ी पैठ बनाने में मदद करेगा. राव के अनुसार, बीजेपी को परिवारवाद के खिलाफ बनाए गए माहौल का फायदा दक्षिण के चार राज्यों तमिलनाडु, तेलंगाना आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में होगा. जहां आज भी सियासत में वंशवाद की राजनीति का बोलबाला है.

अगर आप सोच रहे हैं कि बीजेपी परिवारवाद का मुद्दा उठाकर कांग्रेस को या फिर गांधी परिवार को घेरे रखना चाहती है तो शायद आप बीजेपी के दूर के निशाने को नहीं देख पा रहे हैं. दरअसल कांग्रेस अब बीजेपी के परिवारवाद मुद्दे के राडार से बाहर हो रही है और दक्षिण भारत का तमिलनाडु, तेलंगाना आंध्र प्रदेश कर्नाटक और पूर्वी भारत का बंगाल अब बीजेपी के निशाने पर है.

बीजेपी का प्लान परिवारवाद ऐसा है जिसका असर पूरे देश में पड़ने वाला है. मुरलीधर राव मानते हैं कि परिवारवाद के खिलाफ बीजेपी की मुहिम से कांग्रेस और गांधी परिवार को बीजेपी कमजोर कर चुकी है, लेकिन बीजेपी दक्षिण भारत में सत्ता हासिल करने के लिए इस प्लान पर काम कर रही है.

बीजेपी का मानना है कि साल 2000 के बाद जन्मे मतदाता परिवारवाद से खुद को नहीं जोड़ पाते हैं या ऐसे सियासी परिवार जिनका रसूख काफी बड़ा था उनसे नई पीढ़ी नहीं जुड़ पाती और क्षेत्रीय दलों के परिवारवाद पर युवा सवाल उठाने लगे हैं. द्रमुक का परिवारवाद, जगन रेड्डी का परिवारवाद, एनटीआर का परिवार और देवगौड़ा का परिवार अब धीरे-धीरे अपनी चमक खोता जा रहा है. नए युवा वोटर अब सवाल पूछने लगे हैं. ये पार्टियां नए वोटरों के परिवारवाद पर उठाए जा रहे सवालों से असहज हो रही हैं और यही बीजेपी की रणनीति है.

बीजेपी के भीतर परिवारवाद पर मुरलीधर राव कहते हैं किसी बड़े नेता के बेटे का विधायक या संसद बन जाना परिवाद की श्रेणी में नहीं आता. मगर पीएम का परिवार ही पीएम और सीएम का बेटा ही सीएम बीजेपी में संभव नहीं है. अगर आप इन परिवारवादी पार्टियों में देखें, तो ऐसा ही हुआ है लेकिन ये बीजेपी में संभव नहीं है.

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