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UP Politics: 'चाचा' की जगह अखिलेश यादव बने लोहिया ट्रस्ट के अध्यक्ष, शिवपाल यादव ने दिया बड़ा बयान

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अखिलेश यादव ने शिवपाल यादव की जगह लोहिया ट्रस्ट के अध्यक्ष पद की कमान संभाल ली है. इस बदलाव पर शिवपाल यादव ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए अखिलेश के नेतृत्व की तारीफ की.

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उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में समाजवादी पार्टी (सपा) और यादव परिवार की गतिविधियां केंद्र बिंदु बनी हुई हैं. आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों में जुटे सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव संगठन को मजबूत करने में लगातार सक्रिय हैं. इसी कड़ी में पार्टी के रणनीतिक फैसलों, पीडीए (PDA) यात्रा और संस्थागत संगठनों के ढांचे में कई महत्वपूर्ण बदलाव देखे जा रहे हैं. सबसे बड़ा बदलाव लोहिया ट्रस्ट के नेतृत्व को लेकर सामने आया है, जिसकी कमान अब आधिकारिक तौर पर अखिलेश यादव ने संभाल ली है.

अब तक लोहिया ट्रस्ट की जिम्मेदारी पार्टी के वरिष्ठ नेता और अखिलेश के चाचा शिवपाल सिंह यादव के पास थी. हालांकि, हाल ही में हुए इस बदलाव के बाद ट्रस्ट की अध्यक्षता अखिलेश यादव को सौंपी गई है. पार्टी का कहना है कि इस फैसले का मुख्य उद्देश्य डॉ. राम मनोहर लोहिया की विचारधारा को और अधिक व्यापक व मजबूत बनाना है.

इस बदलाव को लेकर राजनीतिक विरोधियों और आलोचकों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए थे. हालांकि, तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए शिवपाल सिंह यादव ने खुद खुलकर मीडिया के सामने अपनी बात रखी. उन्होंने भतीजे अखिलेश यादव की नेतृत्व क्षमता और कार्यकुशलता की खुलकर सराहना की और स्पष्ट किया कि यह फैसला पार्टी तथा ट्रस्ट के बेहतर भविष्य व विकास को ध्यान में रखकर सर्वसम्मति से लिया गया है.

'2017 की दरार इतिहास, अब अखिलेश के विजन पर भरोसा'- शिवपाल

विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए शिवपाल यादव ने कहा कि उनके पारिवारिक रिश्ते पूरी तरह से सामान्य और मजबूत हैं. उन्होंने कहा कि वे अखिलेश यादव के राजनीतिक विजन पर पूरा भरोसा करते हैं. उल्लेखनीय है कि 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान परिवार और संगठन के भीतर आए मतभेदों के कारण पार्टी को विभाजन व चुनावी नुकसान का सामना करना पड़ा था.

लेकिन अब शिवपाल यादव की पार्टी (प्रसपा) का समाजवादी पार्टी में पूरी तरह विलय हो चुका है और दोनों नेता कंधे से कंधा मिलाकर संगठन को आगे बढ़ा रहे हैं. शिवपाल के अनुसार, अपनों के बीच के सभी पुराने मतभेद अब पूरी तरह खत्म हो चुके हैं.