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फॉरेंसिक से अपराधियों पर शिकंजा, लखनऊ में AI सिटी और नोएडा में चिप फैक्ट्री की तैयारी... टेकसंगम-2026 में CM योगी ने खोला यूपी के टेक्नोलॉजी भविष्य का प्लान!

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि विज्ञान और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल मानव जीवन को बेहतर बनाने, न्याय व्यवस्था को मजबूत करने और समाज को सुरक्षित बनाने के लिए होना चाहिए.

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CM Yogi-TechSangam 2026
CM Yogi-TechSangam 2026 (Photo AI Generated)
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TechSangam 2026: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि विज्ञान और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल मानव जीवन को बेहतर बनाने, न्याय व्यवस्था को मजबूत करने और समाज को सुरक्षित बनाने के लिए होना चाहिए. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) शीघ्र निर्णय लेने और समस्याओं का समाधान खोजने में मददगार हो सकती है, लेकिन उसे मनुष्य का निर्णायक नहीं बनना चाहिए. AI का संचालन मानवीय विवेक के आधार पर होना चाहिए, न कि मनुष्य को उसके निर्णयों पर पूरी तरह निर्भर हो जाना चाहिए. मुख्यमंत्री ने यह बात लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस में आयोजित टेकसंगम-2026 अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कही. इस दौरान उन्होंने क्वांटम फॉरेंसिक और विधिक अनुपालन पर आधारित लेक्सक्यू सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तथा कन्सेंट मैनेजमेंट पोर्टल का शुभारंभ किया. उन्होंने ‘AI इन कंस्ट्रक्शन’ पुस्तक का विमोचन किया और ‘अभेद’ पहल की आधारशिला रखी. सम्मेलन में शिक्षा, टेक्नोलॉजी, फॉरेंसिक साइंस और कौशल विकास के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए संस्थान और 10 प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के बीच समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान भी किया गया.

टेकसंगम विज्ञान, टेक्नोलॉजी और भारतीय ज्ञान परंपरा के समन्वय का मंच

मुख्यमंत्री ने कहा कि टेकसंगम केवल तकनीकी विषयों पर चर्चा करने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह विज्ञान, टेक्नोलॉजी और भारतीय मनीषा के बीच समन्वय स्थापित करने की नई दृष्टि प्रस्तुत करता है. तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन AI, साइबर फॉरेंसिक्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी, डेटा संरक्षण और विधिक अनुपालन जैसे विषयों को एक साथ जोड़ने पर केंद्रित है. इसका उद्देश्य इन क्षेत्रों में विशेषज्ञों के बीच विचार-विमर्श को बढ़ावा देना और तकनीकी विकास को समाज की जरूरतों से जोड़ना है. मुख्यमंत्री ने प्रयागराज में साल 2025 में आयोजित महाकुंभ का उदाहरण देते हुए कहा कि संगम का संबंध उत्तर प्रदेश से बहुत पहले से रहा है. महाकुंभ के माध्यम से दुनिया ने प्रदेश की क्षमता, सांस्कृतिक चेतना और बड़े आयोजनों को सफलतापूर्वक संपन्न करने की योग्यता को देखा. प्रयागराज में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का संगम जिस तरह अलग-अलग धाराओं के मिलन का प्रतीक है, उसी तरह टेकसंगम विज्ञान, तकनीक और भारतीय ज्ञान परंपरा को जोड़ने की अवधारणा सामने रखता है.

तकनीक के साथ विवेक और लोककल्याण की भावना जरूरी

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यदि गंगा की तुलना विज्ञान और यमुना की तुलना टेक्नोलॉजी से की जाए, तो ये दोनों मानव कल्याण के लिए तभी उपयोगी होंगी, जब इनके साथ भारतीय ज्ञान परंपरा के विवेक और लोककल्याण की भावना का समन्वय हो. उन्होंने ‘विद्या ददाति विनयम्’ का उल्लेख करते हुए कहा कि विद्या का उद्देश्य विनय और विनय का उद्देश्य विवेक से पूर्ण होना है. उनके मुताबिक तकनीकी विकास को केवल नई क्षमताएं पैदा करने तक सीमित नहीं रखना चाहिए. इसका वास्तविक महत्व तभी है, जब उससे समाज की समस्याओं का समाधान हो, लोगों का जीवन आसान बने और व्यवस्था अधिक प्रभावी हो. मुख्यमंत्री ने कहा कि शक्ति व्यक्ति के कल्याण का माध्यम बननी चाहिए, न कि स्वयं उसके संकट का कारण. डिजिटल टेक्नोलॉजी ने कार्यक्षमता बढ़ाई है और AI ने समस्याओं को हल करने की नई संभावनाएं खोली हैं. क्वांटम कंप्यूटिंग भी भविष्य की महत्वपूर्ण तकनीक है, जो नए अवसर पैदा कर सकती है. हालांकि, इन तकनीकों के साथ डीपफेक, साइबर फ्रॉड, पहचान की चोरी और डिजिटल साक्ष्यों की विश्वसनीयता जैसी गंभीर चुनौतियां भी सामने आई हैं. इसलिए तकनीक का विकास करने के साथ उसे सुरक्षित, भरोसेमंद और जनहित में उपयोगी बनाना भी जरूरी है.

AI इंडिया मिशन और नेशनल क्वांटम मिशन का किया उल्लेख

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत सरकार AI और क्वांटम टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में मिशन मोड पर काम आगे बढ़ा रही है. AI इंडिया मिशन के माध्यम से स्वदेशी AI क्षमताओं का विकास, कंप्यूटिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर का विस्तार, नवाचार को प्रोत्साहन और सुरक्षित एवं जिम्मेदार AI इकोसिस्टम बनाने पर जोर दिया जा रहा है. इसी तरह नेशनल क्वांटम मिशन के तहत क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम कम्युनिकेशन, क्वांटम सेंसिंग और क्वांटम मैटेरियल्स के क्षेत्रों में शोध, औद्योगिक क्षमता और प्रशिक्षित मानव संसाधन विकसित करने की दिशा में काम हो रहा है. मुख्यमंत्री के अनुसार इन तकनीकों की मदद से शासन, अर्थव्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा और न्यायिक व्यवस्था को अधिक समन्वित तरीके से आगे बढ़ाया जा सकता है. टेकसंगम इसी जरूरत को ध्यान में रखकर विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को साझा चर्चा का अवसर प्रदान कर रहा है. उन्होंने कहा कि तकनीक के उपयोग से जुड़े निर्णयों में मानवीय विवेक, सुरक्षा और जिम्मेदारी को प्राथमिकता देना आवश्यक है, ताकि आधुनिक तकनीक का लाभ समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंच सके.

लेक्सक्यू सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और कन्सेंट मैनेजमेंट पोर्टल का शुभारंभ

टेकसंगम-2026 के दूसरे दिन मुख्यमंत्री ने क्वांटम फॉरेंसिक और विधिक अनुपालन पर आधारित लेक्सक्यू सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तथा कन्सेंट मैनेजमेंट पोर्टल का शुभारंभ किया. इसके साथ ही उन्होंने ‘AI इन कंस्ट्रक्शन’ पुस्तक का विमोचन किया और ‘अभेद’ पहल की आधारशिला रखी. कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस और 10 प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के बीच शिक्षा, टेक्नोलॉजी, फॉरेंसिक साइंस तथा कौशल विकास से संबंधित सहयोग बढ़ाने के लिए समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान किया गया. मुख्यमंत्री ने इन पहलों को भविष्य की शिक्षा, शोध और न्याय व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बताया. उनके अनुसार लेक्सक्यू लैब के माध्यम से कानून, क्वांटम टेक्नोलॉजी और फॉरेंसिक साइंस के बीच सहयोग को आगे बढ़ाया जा सकता है. वहीं, कन्सेंट मैनेजमेंट पोर्टल डिजिटल डेटा के संरक्षण और नागरिकों की सहमति से जुड़े पहलुओं को व्यवस्थित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस की परिकल्पना, प्रगति और संकल्प पर आधारित एक लघु फिल्म भी दिखाई गई.

भू-माफिया से वापस ली गई जमीन पर स्थापित हुआ फॉरेंसिक संस्थान

मुख्यमंत्री ने संस्थान की स्थापना से जुड़ी परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि लगभग एक दशक पहले लखनऊ में इस तरह के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की कल्पना करना भी कठिन था. उन्होंने बताया कि जिस जमीन पर आज उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस स्थापित है, उस पर पहले भू-माफिया ने कब्जा कर लिया था. पुलिस के पास जमीन से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध थे, लेकिन उस समय की अव्यवस्था के कारण भू-माफिया के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करना चुनौतीपूर्ण था. मुख्यमंत्री के अनुसार जमीन के मामले की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने संबंधित अधिकारियों से दस्तावेज मांगे. अभिलेखों की जांच कराई गई और संबंधित विभाग की गलती सामने आने पर FIR दर्ज कर कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाई गई. मामला उच्च न्यायालय तक पहुंचने के बाद भी कार्रवाई जारी रही. अंततः भू-माफिया को पीछे हटना पड़ा और जमीन वापस प्राप्त हुई. इसके बाद इस भूमि पर ऐसा संस्थान स्थापित करने का निर्णय लिया गया, जो उत्तर प्रदेश को नई पहचान दे और न्याय व्यवस्था को वैज्ञानिक साक्ष्य उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाए. मुख्यमंत्री ने कहा कि आज उसी भूमि पर देश और दुनिया के विशेषज्ञ AI, साइबर फॉरेंसिक्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी और डेटा सुरक्षा जैसे विषयों पर चर्चा कर रहे हैं.

वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर न्याय दिलाने में संस्थान की भूमिका

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस को विज्ञान और कानून के बीच मजबूत सेतु के रूप में विकसित किया जा रहा है. यहां पढ़ने वाले विद्यार्थी भविष्य में वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. मुख्यमंत्री ने फॉरेंसिक साइंस की उपयोगिता समझाते हुए कहा कि पहले टेलीविजन पर प्रसारित होने वाले CID जैसे धारावाहिकों में अपराध की जांच के दौरान बाल के एक टुकड़े या उंगलियों के निशान जैसे वैज्ञानिक साक्ष्यों से अपराधी की पहचान होते हुए दिखाई जाती थी. उस समय ऐसी प्रक्रियाएं आम लोगों को कल्पना जैसी लगती थीं, लेकिन आज फॉरेंसिक साइंस वास्तविक जीवन में अपराध की जांच और न्याय दिलाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है. उन्होंने कहा कि फॉरेंसिक साइंस जो कभी रील लाइफ में दिखाई देती थी, आज रियल लाइफ में सामने है. उनके अनुसार पहले विचार आता है, फिर सिद्धांत विकसित होता है और उसके बाद उसका व्यावहारिक स्वरूप सामने आता है. विज्ञान और टेक्नोलॉजी भी इसी प्रक्रिया के जरिए समाज की समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करती हैं.

पुराने मामलों में वैज्ञानिक साक्ष्य मिलने में होती थी देरी

मुख्यमंत्री ने साल 2017 में सत्ता की जिम्मेदारी संभालने के समय की परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय DNA जांच के लिए लिए गए कई नमूने लगभग 10 साल पुराने थे. वैज्ञानिक साक्ष्य समय पर उपलब्ध नहीं होने के कारण अपराधियों को बच निकलने का अवसर मिलता था और अदालतों में तारीख पर तारीख पड़ती रहती थी. एक ओर साक्ष्यों की कमी थी, वहीं दूसरी ओर वैज्ञानिक नमूनों को सुरक्षित रखने और समय पर उनकी जांच कराने की व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं थी. मुख्यमंत्री ने प्रदेश के एक माफिया का उदाहरण देते हुए बताया कि उसने साल 1980 में पहला अपराध किया था. साल 2017 में उसके खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई, लेकिन उसे दूसरे राज्य में स्थानांतरित कर दिए जाने के कारण वापस लाने और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाने में लगभग तीन साल लग गए. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी. मुख्यमंत्री के मुताबिक सभी साक्ष्य प्रस्तुत किए जाने के बाद उस व्यक्ति को 42 साल बाद सजा मिली. उन्होंने कहा कि यदि अपराध के समय ही वैज्ञानिक साक्ष्य सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से उपलब्ध हों, तो पीड़ितों को न्याय के लिए दशकों तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा और आम नागरिक का व्यवस्था पर विश्वास मजबूत होगा.

प्रदेश की 12 रेंज में फॉरेंसिक लैब तैयार, छह अन्य अंतिम चरण में

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में फॉरेंसिक साइंस की व्यवस्था मजबूत करने के लिए प्रत्येक रेंज में फॉरेंसिक लैब स्थापित करने का काम आगे बढ़ाया गया है. उत्तर प्रदेश की 12 रेंज में 12 फॉरेंसिक साइंस लैब तैयार हो चुकी हैं, जबकि छह अन्य लैब का काम अंतिम चरण में है. उन्होंने कहा कि नए आपराधिक कानूनों के तहत सात साल से अधिक सजा वाले अपराधों में फॉरेंसिक साक्ष्य की आवश्यकता को देखते हुए नमूने एकत्र करने और उनकी वैज्ञानिक जांच की क्षमता बढ़ाना जरूरी था. केंद्रीय गृह मंत्रालय और राज्य सरकार के प्रयासों से फॉरेंसिक वैन की व्यवस्था भी मजबूत की गई है. आज प्रदेश में 150 से अधिक फॉरेंसिक वैन उपलब्ध हैं. मुख्यमंत्री के अनुसार लैब और वैन की व्यवस्था सक्रिय होने से घटनास्थल से नमूने लेने, उन्हें संबंधित प्रयोगशाला तक पहुंचाने और अदालत में वैज्ञानिक साक्ष्य प्रस्तुत करने की प्रक्रिया को गति मिली है. इससे अपराधियों को समय पर सजा दिलाने में मदद मिल सकती है और पीड़ितों को न्याय के लिए लंबे समय तक इंतजार करने की स्थिति से राहत मिल सकती है.

फॉरेंसिक विशेषज्ञों की जरूरत पूरी करने के लिए प्रशिक्षण पर जोर

मुख्यमंत्री ने बताया कि जब फॉरेंसिक वैन की व्यवस्था शुरू हुई थी, तब अधिकारियों ने लगभग 700 फॉरेंसिक विशेषज्ञों की जरूरत बताई थी. उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों की नियुक्ति से पहले यह तय करना जरूरी है कि किस प्रकार के प्रशिक्षित लोगों की आवश्यकता है. इसमें डिग्रीधारी, डिप्लोमाधारी, सर्टिफिकेट प्राप्त प्रशिक्षित कर्मी, नमूने एकत्र करने वाले तकनीशियन और प्रयोगशाला में काम करने वाले विशेषज्ञ शामिल हो सकते हैं. इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस में प्रशिक्षण की व्यवस्था विकसित की गई. मुख्यमंत्री के मुताबिक अब तक संस्थान में लगभग 1,000 पुलिस अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है. यहां फॉरेंसिक साइंस में सर्टिफिकेट, डिप्लोमा और डिग्री पाठ्यक्रम भी संचालित किए जा रहे हैं, ताकि प्रदेश को प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध कराया जा सके. उन्होंने कहा कि संस्थान की प्रयोगशालाओं को विश्वस्तरीय बनाने का प्रयास किया गया है, जिससे उत्तर प्रदेश के थानों और न्यायालयों को वैज्ञानिक साक्ष्य उपलब्ध कराने में सहायता मिल सके.

‘लॉ विद लैब’ पहल से कानून और विज्ञान के बीच समन्वय

मुख्यमंत्री ने कहा कि संस्थान में प्रयोगशालाएं स्थापित करने का उद्देश्य केवल औपचारिकता पूरी करना नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक जांच के माध्यम से सत्य सामने लाना और न्याय व्यवस्था को मजबूत करना है. न्याय की विश्वसनीयता के लिए कानून को विज्ञान की समझ होनी चाहिए और विज्ञान को न्याय की कसौटी पर खरा उतरना चाहिए. दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं. उन्होंने उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस की ‘लॉ विद लैब’ पहल को कानून और विज्ञान के बीच समन्वय को संस्थागत स्वरूप देने का महत्वपूर्ण प्रयास बताया. इसी सोच के तहत लेक्सक्यू लैब की पहल की गई है, जो कानून और क्वांटम टेक्नोलॉजी को फॉरेंसिक साइंस तथा लोकहित से जोड़ने का प्रयास है. मुख्यमंत्री के अनुसार लेक्सक्यू के माध्यम से MTech का शॉर्ट-टर्म प्रोफेशनल कोर्स, संयुक्त शोध, उद्योग आधारित लैब, स्टार्टअप सहयोग और नीति संबंधी सलाह जैसी गतिविधियों को आगे बढ़ाने की संभावनाएं हैं. यह पहल राष्ट्रीय क्वांटम मिशन में उत्तर प्रदेश के योगदान को मजबूत कर सकती है.

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ बढ़ेगा सहयोग

टेकसंगम के दौरान हुए समझौता ज्ञापनों को मुख्यमंत्री ने उद्योग और अकादमिक संस्थानों के बीच साझेदारी का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया. उन्होंने कहा कि इनके माध्यम से यूनिवर्सिटी ऑफ इंडियानापोलिस, अमेरिका के फॉरेंसिक साइंस से जुड़े विशेषज्ञों तथा डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन, C-DAC, STPI, IIT और राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों सहित विभिन्न संस्थानों के साथ ज्ञान साझा करने और सहयोग के नए अवसर विकसित होंगे. इन समझौतों से विद्यार्थियों और फैकल्टी के आदान-प्रदान, संयुक्त सर्टिफिकेशन, शोध और वैश्विक स्तर पर अनुभव हासिल करने के नए रास्ते खुल सकते हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार शोध, नवाचार, उद्योगों के साथ सहयोग और विश्वस्तरीय शिक्षा के लिए जरूरी मदद उपलब्ध कराने को प्रतिबद्ध है. उनके अनुसार इस तरह के सहयोग से विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक जांच की नई विधियों को समझने का अवसर मिलेगा. इससे प्रदेश में तकनीकी क्षमता और प्रशिक्षित मानव संसाधन विकसित करने में मदद मिल सकती है. मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि सम्मेलन में होने वाला विचार-विमर्श विज्ञान, टेक्नोलॉजी और न्याय व्यवस्था के समन्वय को मजबूत करेगा.

डेटा सुरक्षा और नागरिकों की सहमति के लिए पोर्टल की पहल

मुख्यमंत्री ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके तहत कन्सेंट मैनेजमेंट सिस्टम लागू करने की दिशा में उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस ने महत्वपूर्ण पहल की है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डेटा को नया तेल बताया था. उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख AI और डेटा सेंटर हब के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है. डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ डेटा की सुरक्षा, नागरिकों की निजता और उनकी सहमति का महत्व भी बढ़ा है. कन्सेंट मैनेजमेंट पोर्टल का शुभारंभ डिजिटल संरक्षण और डेटा प्रोटेक्शन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. मुख्यमंत्री के अनुसार साइबर सुरक्षा, डिजिटल संरक्षण और उन्नत तकनीक के क्षेत्र में संस्थागत सहयोग से नई संभावनाएं खुलेंगी. लेक्सक्यू लैब, कन्सेंट मैनेजमेंट फ्रेमवर्क और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन भविष्य की शिक्षा तथा न्यायिक व्यवस्था को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. उन्होंने कहा कि तकनीक का उपयोग करते समय लोगों की निजता और उनके डेटा की सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए.

उत्तर प्रदेश में AI और डेटा सेंटर क्षमता बढ़ाने की तैयारी

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश को तकनीकी विकास और निवेश के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में आगे बढ़ाने के लिए कई स्तरों पर काम किया जा रहा है. उत्तर भारत की पहली चिप फैक्ट्री यानी विश्वस्तरीय सेमीकंडक्टर फैब यूनिट से संबंधित कार्य नोएडा में आगे बढ़ाया जा रहा है. इसके साथ ही डेटा सेंटर, AI और तकनीक से जुड़ी क्षमताओं के विकास पर जोर दिया जा रहा है. मुख्यमंत्री ने बताया कि देश की डेटा सेंटर क्षमता लगभग 1.6 गीगावॉट के स्तर पर है. उत्तर प्रदेश का लक्ष्य साल 2030 तक प्रदेश में पांच गीगावॉट डेटा सेंटर क्षमता विकसित करना है. इसके लिए पांच बड़े डेटा सेंटर क्लस्टर का मजबूत नेटवर्क तैयार करने की दिशा में काम हो रहा है. उन्होंने कहा कि इससे निवेश, नवाचार, उद्योग और रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं. प्रदेश में लखनऊ को AI सिटी के रूप में विकसित करने, STPI का विस्तार करने और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं. मुख्यमंत्री के मुताबिक तकनीकी क्षमता बढ़ने से युवाओं को प्रदेश के भीतर ही नए अवसर उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है.

निवेश और उद्योगों के विस्तार के लिए 36 सेक्टोरल पॉलिसी

मुख्यमंत्री ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था, उद्योग और निवेश के माहौल में आए बदलावों का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि साल 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में उद्योगों की संख्या लगभग 14,000 बताई जाती थी, जबकि अब यह संख्या लगभग 35,000 है. उनके अनुसार आज किसी उद्योग से गुंडा टैक्स वसूलने या अनावश्यक रूप से बिजली काटने जैसी स्थिति स्वीकार्य नहीं है. प्रदेश में अलग-अलग क्षेत्रों के लिए 36 सेक्टोरल पॉलिसी बनाई गई हैं और लगभग 75,000 एकड़ का लैंड बैंक उपलब्ध है. सिंगल विंडो क्लीयरेंस प्लेटफॉर्म के माध्यम से निवेश से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान बनाया गया है. मुख्यमंत्री ने बताया कि इन प्रयासों से प्रदेश को लगभग 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं. उनके मुताबिक पर्याप्त बिजली, बेहतर सुरक्षा व्यवस्था, मजबूत बुनियादी ढांचे और कुशल युवा मानव संसाधन के कारण उत्तर प्रदेश निवेश के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभरा है. उन्होंने कहा कि पहले निवेशक लखनऊ आने से भी हिचकते थे, जबकि अब देश और दुनिया के विशेषज्ञ तथा उद्योग जगत के प्रतिनिधि प्रदेश में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में भाग ले रहे हैं.

राजस्व, बजट और पूंजीगत खर्च में बढ़ोतरी का दावा

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश लगातार सात सालों से रेवेन्यू सरप्लस स्टेट के रूप में अपनी विकास यात्रा आगे बढ़ा रहा है. उन्होंने प्रदेश के स्टेट GDP, बजट और प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि का उल्लेख किया. मुख्यमंत्री के अनुसार पिछले साढ़े नौ सालों में प्रदेश के बजट और प्रति व्यक्ति आय को लगभग तीन गुना करने में सफलता मिली है. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश का बजट देश के राज्यों में सबसे बड़ा है और प्रदेश पूंजीगत खर्च के माध्यम से बुनियादी ढांचे तथा सर्कुलर इकोनॉमी को गति दे रहा है. मुख्यमंत्री के मुताबिक प्रदेश में लगभग दो लाख करोड़ रुपये पूंजीगत खर्च पर खर्च किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे, तकनीकी क्षमता और उद्योगों के विस्तार पर ध्यान देने से विकास की प्रक्रिया को मजबूती मिल सकती है. टेकसंगम जैसे आयोजन इसी व्यापक सोच का हिस्सा हैं, जिनके माध्यम से विज्ञान, तकनीक, उद्योग और शिक्षा के बीच सहयोग को बढ़ाया जा सकता है. मुख्यमंत्री ने प्रदेश की विकास यात्रा में शोध, नवाचार और तकनीकी शिक्षा की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया.

HCL सेंटर का उदाहरण देकर रोजगार के अवसरों का जिक्र

मुख्यमंत्री ने लखनऊ स्थित HCL सेंटर का उदाहरण देते हुए कहा कि साल 2017 में वहां लगभग 100 लोग काम कर रहे थे. हाल ही में जब वह सेंटर पहुंचे, तो वहां काम करने वालों की संख्या बढ़कर लगभग 12,600 हो चुकी थी. उन्होंने बताया कि एक ही परिसर में बड़ी संख्या में युवा काम कर रहे हैं और क्षमता के विस्तार के साथ नियुक्तियां भी जारी हैं. अब वहां तीन शिफ्टों में काम होता है और रात में भी कर्मचारी काम करते हैं. मुख्यमंत्री ने महिला कर्मचारियों के साथ हुई बातचीत का भी उल्लेख किया. उन्होंने बताया कि महिला कर्मचारियों से पूछा गया था कि क्या उन्हें नाइट शिफ्ट में काम करने में कोई परेशानी होती है. कर्मचारियों ने बताया कि रात 12 बजे शिफ्ट समाप्त होने के बाद भी वे लखनऊ, बाराबंकी और उन्नाव सहित अपने घरों तक सुरक्षित पहुंच जाती हैं. मुख्यमंत्री ने इसे प्रदेश में सुरक्षा के माहौल और रोजगार के अवसरों में आए बदलाव का उदाहरण बताया. उनके अनुसार पहले इस तरह की स्थिति की कल्पना करना कठिन था, जबकि अब बड़ी संख्या में युवा और महिलाएं विभिन्न शिफ्टों में काम कर रहे हैं.

अयोध्या के विकास और दीपोत्सव का किया उल्लेख

मुख्यमंत्री ने अयोध्या में हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि साल 2017 से पहले वहां बिजली की उपलब्धता सीमित थी और लगभग तीन घंटे बिजली मिलने की स्थिति थी. उन्होंने बताया कि साल 2017 में दीपोत्सव शुरू करने के समय कई लोगों ने आशंका जताई थी कि अयोध्या में इतना बड़ा आयोजन संभव नहीं होगा. इसके बावजूद सरकार ने दीपावली से जुड़े स्थान पर दीपोत्सव को भव्य रूप देने का निर्णय लिया. मुख्यमंत्री के अनुसार आज अयोध्या का दीपोत्सव बड़े आयोजन के रूप में स्थापित हो चुका है. इसमें लाखों लोग प्रत्यक्ष रूप से शामिल होते हैं और दुनिया भर के लोग इसे देखते हैं. उन्होंने कहा कि दीपोत्सव ने अयोध्या को नई पहचान दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और नेतृत्व में अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भगवान श्रीराम के मंदिर का निर्माण हुआ है. मुख्यमंत्री ने बताया कि अयोध्या में बुनियादी ढांचे का व्यापक विकास हुआ है. पहले जहां संकरी गलियां और सीमित सुविधाएं थीं, वहीं अब बेहतर सड़कें, चार और छह लेन की कनेक्टिविटी तथा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं.

अयोध्या में बिजली और सौर ऊर्जा से जुड़ी सुविधाओं पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या की कनेक्टिविटी में आए बदलाव से देश और दुनिया के लोगों के लिए वहां पहुंचना आसान हुआ है. उन्होंने पहले की सीमित बिजली और परिवहन सुविधाओं की तुलना में वर्तमान व्यवस्था का उल्लेख किया. उनके अनुसार अब 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराने की व्यवस्था के साथ अयोध्या को देश की पहली सोलर सिटी के रूप में विकसित करने की दिशा में भी काम हुआ है. वहां की स्ट्रीट लाइटों को सौर ऊर्जा से संचालित करने का प्रयास किया गया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह के विकास से अयोध्या की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को आधुनिक सुविधाओं के साथ जोड़ा जा रहा है. उन्होंने बेहतर सड़क, बिजली और परिवहन सुविधाओं को प्रदेश में हो रहे व्यापक बदलाव का हिस्सा बताया. मुख्यमंत्री के अनुसार धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों पर सुविधाओं का विकास लोगों की आवाजाही को आसान बनाने के साथ पर्यटन और स्थानीय गतिविधियों को भी बढ़ावा दे सकता है.

एक्सप्रेसवे और एयरपोर्ट नेटवर्क से बेहतर हुई कनेक्टिविटी

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे नेटवर्क और बेहतर सड़क कनेक्टिविटी ने आवागमन को सुगम बनाया है. उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि पहले गोरखपुर से लखनऊ आने में लगभग छह घंटे लगते थे, जबकि अब बेहतर सड़क कनेक्टिविटी के कारण यह दूरी लगभग तीन घंटे में तय की जा सकती है. मुख्यमंत्री ने कहा कि साल 2017 से पहले प्रदेश में केवल दो अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे थे, जबकि अब पांच अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों सहित कुल 17 एयरपोर्ट क्रियाशील हैं. उनके अनुसार देश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क में उत्तर प्रदेश की लगभग 60 प्रतिशत हिस्सेदारी है. इन सुविधाओं से निवेश, पर्यटन, उद्योग और रोजगार को गति मिली है. मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में विकसित हो रहा बुनियादी ढांचा औद्योगिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण है और इससे अलग-अलग क्षेत्रों के बीच संपर्क बेहतर हुआ है. उन्होंने टेकसंगम में शामिल विशेषज्ञों से कहा कि वे उत्तर प्रदेश में हुए बदलावों को स्वयं देख सकते हैं. उनके मुताबिक प्रदेश अब केवल अपनी आबादी के कारण नहीं, बल्कि बुनियादी ढांचे, कानून-व्यवस्था, उद्योग, निवेश, तकनीक और कुशल मानव संसाधन के आधार पर भी देश के विकास में भूमिका निभा रहा है.

पुलिस रिस्पॉन्स सिस्टम और ऑपरेशन त्रिनेत्र का उल्लेख

मुख्यमंत्री ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था और पुलिस व्यवस्था में किए गए बदलावों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि साल 2017 से पहले अपराध होने के बाद पीड़ितों को तत्काल सहायता मिलने में कई बार परेशानी होती थी. अब प्रदेश में रिस्पॉन्स सिस्टम को मजबूत किया गया है. कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और ऑपरेशन त्रिनेत्र के माध्यम से विभिन्न गतिविधियों की निगरानी की जा रही है. मुख्यमंत्री के अनुसार किसी घटना के बाद नागरिक द्वारा 112 पर कॉल किए जाने पर पुलिस की PRV को तत्काल घटनास्थल तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है. उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था आम नागरिक के मन में सुरक्षा और विश्वास का भाव मजबूत करती है. मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था को निवेश और औद्योगिक विकास से भी जोड़ा. उनके अनुसार सुरक्षित माहौल, बिजली की उपलब्धता, बेहतर कनेक्टिविटी और कुशल मानव संसाधन किसी भी प्रदेश में उद्योगों के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण हैं. टेकसंगम जैसे आयोजन के जरिए तकनीक के व्यावहारिक इस्तेमाल पर चर्चा से शासन और न्याय व्यवस्था को भी मजबूत करने की संभावनाएं बनती हैं.

विकसित भारत और विकसित उत्तर प्रदेश के लक्ष्य से जुड़ा टेकसंगम

मुख्यमंत्री ने कहा कि टेकसंगम में शामिल देश और दुनिया के विशेषज्ञ उत्तर प्रदेश में आए बदलावों को स्वयं देख सकते हैं. उन्होंने सम्मेलन के उद्देश्य को केवल तकनीकी चर्चा तक सीमित न रखते हुए इसके निष्कर्षों को समाज, शासन, अर्थव्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा और न्यायिक व्यवस्था में लागू करने की जरूरत पर जोर दिया. उनके मुताबिक AI, साइबर फॉरेंसिक्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी और डेटा प्रोटेक्शन के समन्वय से नई चुनौतियों का समाधान खोजा जा सकता है. उन्होंने विश्वास जताया कि सम्मेलन में हुए समझौते, लेक्सक्यू लैब, क्वांटम टेक्नोलॉजी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, कन्सेंट मैनेजमेंट फ्रेमवर्क और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की सहभागिता भविष्य की शिक्षा, शोध और न्याय व्यवस्था को नई दिशा देने में मदद करेगी. मुख्यमंत्री ने दोहराया कि तकनीक का इस्तेमाल मानव जीवन को बेहतर बनाने, न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ करने और समाज को सुरक्षित बनाने के लिए होना चाहिए. उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार शोध, नवाचार, उद्योगों के साथ सहयोग और विश्वस्तरीय शिक्षा के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है.

सम्मेलन में कई वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ रहे मौजूद

टेकसंगम-2026 के उद्घाटन सत्र को पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण, यूनिवर्सिटी ऑफ इंडियानापोलिस, अमेरिका की अध्यक्ष प्रोफेसर तनुजा सिंह और उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस के निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी ने भी संबोधित किया. कार्यक्रम में विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह, नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर अभय करंदीकर, डिफेंस साइबर एजेंसी के महानिदेशक रियर एडमिरल संजय सचदेवा और मुख्यमंत्री, गृह एवं सूचना विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे. तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में AI, साइबर फॉरेंसिक्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी, डेटा संरक्षण और विधिक अनुपालन के एकीकरण पर चर्चा की जा रही है. मुख्यमंत्री ने सम्मेलन के माध्यम से विज्ञान और तकनीक को भारतीय ज्ञान परंपरा, मानवीय विवेक तथा लोककल्याण से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया. कार्यक्रम में शुरू की गई पहल और संस्थागत सहयोग को प्रदेश में तकनीकी शिक्षा, वैज्ञानिक जांच तथा न्याय व्यवस्था की क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया गया.