पीलीभीत में वोटर लिस्ट की गड़बड़ी पर बड़ा एक्शन, दो SDM और एक कंप्यूटर ऑपरेटर पर FIR दर्ज
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Pilibhit Voter List Irregularities: उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में वोटर लिस्ट में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है. जांच में पता चला कि बिना फॉर्म-8 और जरूरी दस्तावेजों के 10 हजार से ज्यादा मतदाताओं के नाम और पिता के नाम बदल दिए गए. मामले में दो एसडीएम और एक कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है.
Pilibhit Voter List Irregularities: उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में वोटर लिस्ट में एक बहुत बड़ी और चौंकाने वाली गड़बड़ी सामने आई है. 10,000 से ज्यादा लोगों के वोटर आईडी में उनके नाम और पिता के नाम बिना किसी फॉर्म या आवेदन के बदल दिए गए हैं. यह मामला तब खुला जब 19 अक्टूबर को समाजवादी पार्टी ने एक शिकायत दर्ज कराई जिसमें एक वोटर का वोटर लिस्ट में उसके नाम के साथ पिता के नाम को गैरकानूनी तरीके से बदल दिया गया था. यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत पीलीभीत के जिलाधिकारी से जांच रिपोर्ट मांगी. जांच में शिकायत सही पाई गई. इसके बाद जब पूरे विधानसभा क्षेत्र की जांच हुई, तो पता चला कि 10 हजार से ज्यादा ऐसे बदलाव किए गए हैं, जिनके लिए जरूरी 'फॉर्म 8' कभी भरा ही नहीं गया था. इस मामले में बड़ा एक्शन लेते हुए दो एसडीएम और एक कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. साथ ही पूरे यूपी में ऐसी गड़बड़ियों की जांच के आदेश दे दिए गए हैं.
बिना फॉर्म भरे कर दिए बदलाव
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि वोटर लिस्ट में नाम या किसी भी तरह का करेक्शन करने के लिए 'फॉर्म 8' भरना जरूरी होता है. इसके साथ ही पहचान साबित करने के लिए सही डॉक्यूमेंट्स भी देने होते हैं. लेकिन पीलीभीत में 10 हजार से ज्यादा ऐसे मामले मिले, जिनमें वोटर ने कोई फॉर्म नहीं भरा, फिर भी ऑपरेटर ने ऑनलाइन जाकर उनके नाम और पिता के नाम बदल दिए. हद तो तब हो गई जब इन बदलावों के लिए कोई सही कागज भी नहीं लगाया गया.
अधिकारियों और ऑपरेटर पर बड़ा एक्शन
इस भारी लापरवाही और कानून के उल्लंघन पर चुनाव आयोग ने सख्त कार्रवाई की है. ये गलतियां 31 मई से 29 अगस्त के बीच हुईं. इस दौरान पीलीभीत में दो इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (एसडीएम स्तर के अधिकारी) तैनात थे. इन दोनों अधिकारियों और वीआरसी (वोटर रजिस्ट्रेशन सेंटर) के कंप्यूटर ऑपरेटर को दोषी माना गया है. इनके खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 32 और भारतीय न्याय संहिता के तहत एफआईआर दर्ज की गई है. ऑपरेटर को नौकरी से हटाने का प्रस्ताव भेजा गया है, जबकि दोनों एसडीएम के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है.
पूरे यूपी में होगी वोटर लिस्ट की जांच
चुनाव अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि चुनाव में हार-जीत से उन्हें कोई मतलब नहीं है, उनका काम यह देखना है कि नियमों का पालन हो रहा है या नहीं. इस बड़ी गड़बड़ी के बाद अब पीलीभीत जिले की सभी विधानसभाओं में फॉर्म 6 और 7 (नाम जोड़ने और हटाने) की भी बारीकी से जांच हो रही है. इतना ही नहीं, मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने पूरे उत्तर प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को आदेश दिया है कि वे अपने-अपने जिलों की हर विधानसभा में इस बात की जांच करें कि बिना फॉर्म भरे कहीं और तो नाम नहीं बदले गए हैं. चुनाव आयोग अब इस मामले में कोई ढील देने के मूड में नहीं है.
