क्या बीजेपी से अपना गढ़ छीन पाएगी बसपा ? सहारनपुर की रामपुर मनिहारण सीट का पूरा समीकरण समझिए
सहारनपुर की रामपुर मनिहारण विधानसभा सीट पर 2027 चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज है. बीजेपी विधायक देवेंद्र निम के सामने सपा-कांग्रेस गठबंधन की चुनौती होगी. जानिए सीट का राजनीतिक इतिहास, जातीय समीकरण और स्थानीय मुद्दे चुनावी मुकाबले को कैसे प्रभावित कर सकते हैं.
ADVERTISEMENT

उत्तर प्रदेश की सियासत में कुछ सीटें ऐसी होती हैं जिनका इतिहास राजनीतिक करवटों का गवाह रहा है. सहारनपुर जिले की एकमात्र अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित रामपुर मनिहारण विधानसभा सीट भी ऐसी ही है. कभी बहुजन समाज पार्टी (BSP) का गढ़ मानी जाने वाली इस सीट पर साल 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी के देवेंद्र निम ने लगातार दो बार जीत दर्ज कर चुनावी हवा का रुख बदल दिया था. अब आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है. जहां बीजेपी अपनी सत्ता और विकास कार्यों के दम पर विजय रथ को बरकरार रखने की जुगत में है. वहीं समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन इस सुरक्षित सीट पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंक रहा है.
सीट का राजनीतिक इतिहास और गठन
साल 2008 में परिसीमन के बाद यह सीट अस्तित्व में आई थी. इससे पहले इसका बड़ा हिस्सा नकुड़ विधानसभा के अंतर्गत आता था. साल 2012 के पहले विधानसभा चुनाव में बसपा के रविंद्र मुल्लू ने यहां जीत दर्ज की थी. हालांकि 2017 की मोदी-योगी लहर में यह सीट बीजेपी के पाले में चली गई और भाजपा प्रत्याशी देवेंद्र निम ने जीत हासिल की जिसे उन्होंने 2022 में भी दोहराया.
नेताओं के अपने-अपने दावे और मुद्दे
मौजूदा विधायक देवेंद्र निम का दावा है कि पिछले दो टर्म में उनकी सरकार ने कानून व्यवस्था, भयमुक्त माहौल, और सड़क-कनेक्टिविटी जैसे विकास कार्यों पर फोकस किया है. उन्होंने लगभग 22,500 से अधिक वोटों से अपनी दूसरी जीत हासिल की थी और जनता 'सुशासन' के नाम पर उन्हें फिर चुनेगी.
दूसरी ओर समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष का कहना है कि पिछले चुनाव में हार का अंतर बहुत ज्यादा नहीं था. पार्टी इस बार सुरक्षित सीटों पर विशेष फोकस कर रही है और घर-घर जाकर जनता को बीजेपी की नीतियों के खिलाफ जागरूक कर रही है.
जातीय समीकरण और मतदाताओं का गणित
स्थानीय अनुमानों के मुताबिक, इस विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम मतदाता और एससी (SC) मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं. इसके अलावा गुर्जर, कश्यप, जाट, राजपूत, त्यागी-ब्राह्मण और पाल समुदाय के मतदाता भी अच्छी खासी संख्या में हैं जो हार-जीत के समीकरण तय करते हैं.
स्थानीय पत्रकारों की राय
विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव में गठबंधन की अंतिम स्थिति, उम्मीदवारों का चयन, और दलित-मुस्लिम मतदाताओं का रुझान बहुत कुछ तय करेगात हालांकि स्थानीय स्तर पर बीजेपी संगठन की मजबूत पकड़ और मंत्री जसवंत सिंह सैनी जैसे दिग्गजों की मौजूदगी के कारण मुकाबला बेहद दिलचस्प होने की उम्मीद है.
