UP चुनाव के लिए मिशन मोड में प्रियंका गांधी, जानें कैसे साध रहीं सूबे और संगठन की राजनीति

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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस की यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी खासी सक्रिय हैं. प्रियंका इस साल की शुरुआत से ही आगामी चुनाव के मद्देनजर पार्टी संगठन को मजबूत करने और लोगों तक पकड़ बनाने के लिए लगातार दौरे कर रही हैं. इस रिपोर्ट में विस्तार से पढ़िए कि प्रियंका गांधी ने इस साल कब और कहां अपना दौरा किया. साथ में ये भी जानिए कि इस दौरान प्रियंका ने किन-किन वोट बैंक पर निशाना साधने की कोशिश की.

  • गणतंत्र दिवस पर किसानों की ट्रैक्टर परेड के दौरान रामपुर के नवरीत सिंह की मौत हो गई थी. इसके बाद 4 फरवरी को प्रियंका गांधी ने रामपुर पहुंचकर नवरीत के परिजनों से मुलाकात की थी. आपको बता दें कि नवरीत सिंह का दो साल पहले ही विवाह हुआ था और उसकी पत्नी ऑस्ट्रेलिया में शिक्षा ग्रहण कर रही थी. भारत आने से पहले नवरीत अपनी पत्नी के साथ ऑस्ट्रेलिया में ही रह रहा था.

  • केंद्र सरकार की ओर से पारित किए गए तीनों कृषि कानून के विरोध में किसान लगातार आंदोलन कर रहे हैं. इसी को लेकर प्रियंका गांधी 10 फरवरी को सहारनपुर में आयोजित किसान पंचायत में शामिल होने पहुंची थीं. प्रियंका ने किसान पंचायत में शामिल होने से पहले शाकुंबरी देवी के दर्शन और सूफी-संतों के साथ मीटिंग की थी.

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    • 11 फरवरी को प्रियंका गांधी मौनी अमावस्या के दिन प्रयागराज पहुंची थीं. हिंदुत्व के मुद्दे को लेकर अक्सर बीजेपी, कांग्रेस को घेरती रहती है. लेकिन संगम में डुबकी लगाकर प्रियंका ने इस मुद्दे को लेकर एक बड़ा संदेश दिया था. इस दौरान प्रियंका प्रयागराज के माघ मेले में भी गईं थीं.

  • इसके अलावा, निषाद वोट पर निशाना साधने के लिए प्रियंका ने सुजीत निषाद नामक शख्स की नाव में बैठकर सवारी भी की थी. 21 फरवरी को प्रियंका ने प्रयागराज में मछुआरों के साथ 4 घंटे बिताए थे और इसके बाद वह वापस लौट गईं थीं.

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    कांग्रेस के प्रवक्ता विकास श्रीवास्तव के मुताबिक, संत रविदास जयंती के मौके पर 27 फरवरी को प्रियंका गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी पहुंची थीं. ऐसा कहा गया था कि प्रियंका ने इस दौरे पर दलित और सिख वोट बैंक को साधने की कोशिश की थी. इस दौरान उन्होंने संगत में बैठकर खाना भी खाया था.

    कोरोना की दूसरी लहर के दौरान यूपी नहीं आईं थीं प्रियंका

    कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के चलते प्रियंका ने अपना यूपी का दौरा स्थगित किया था. लेकिन इस दौरान प्रियंका ने कांग्रेस पार्टी की ओर से कई जगह हेल्प डेस्क की स्थापना करवाई थी और दवाइयों और चिकित्सा संसाधनों का वितरण भी करवाया था.

    स्थिति सामान्य होने पर प्रियंका ने फिर शुरू किया अपना यूपी दौरा

    यूपी में कोरोना की दूसरी लहर के बाद स्थिति सामान्य होने पर प्रियंका गांधी 16 जुलाई को तीन दिवसीय दौरे पर लखनऊ पहुंची थीं. इस दौरान उन्होंने किसानों और रेलवे स्टेशन पर सामान ढोने वाले कुलियों के एक दल के साथ मुलाकात की थी. इसके बाद 17 जुलाई को वह लखीमपुर दौरे पर चली गईं थीं. लखीमपुर में प्रियंका ने समाजवादी पार्टी की ऋतु सिंह से मुलाकात की थी.

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    आपको बता दें कि पंचायत चुनाव के दौरान ऋतु सिंह के साथ अभद्रता की खबर सामने आई थी. प्रियंका से मुलाकात के बाद ऋतु ने कांग्रेस जॉइन कर ली थी. इसके बाद 18 जुलाई को रायबरेली में कार्यकर्ताओं के साथ मीटिंग के बाद प्रियंका अमेठी पहुंची. अमेठी में प्रियंका उस घर में पहुंची जहां दीवार गिरने से कुछ लोगों की मौत हो गई थी.

    कांग्रेस के प्रवक्ता विकास श्रीवास्तव ने बताया कि आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी के मद्देनजर 10 सितंबर को प्रियंका गांधी लखनऊ पहुंची थीं. अपने तीन दिवसीय दौरे पर प्रियंका ने संगठन को मजबूत करने और टिकट की दावेदारी को लेकर पार्टी नेताओं के साथ मंथन किया था. हालांकि, इस दौरे पर मीडिया से बात किए बिना ही वह वापस दिल्ली लौट गईं थीं.

    27 सितंबर को प्रियंका फिर एक बार 5 दिवसीय दौरे पर लखनऊ पहुंची. खबर है कि प्रियंका का यह दौरा अचानक ही बना था. इस दौरान प्रियंका ने पार्टी नेताओं के साथ कुछ बैठकें भी कीं. लेकिन इस दौरान पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के इस्तीफे के बाद उन्होंने अपनी मीटिंग्स कैंसल कर दी थीं.

    ये सारे दौरे इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि प्रियंका गांधी इस साल की शुरुआत से ही चुनावी मोड में आ गईं थीं. हालांकि, अब प्रियंका प्रदेश में प्रतिज्ञा यात्रा शुरू करेंगी. आगामी चुनाव प्रियंका के लिए आसान नहीं होने वाले हैं. एक तरफ उनके सामने बीजेपी की योगी सरकार है तो दूसरी तरफ एसपी-बीएसपी. कांग्रेस ने चुनाव में अकेले लड़ने का ऐलान किया है. अब ये देखना अहम होगा कि तमाम चुनौतियों के साथ प्रियंका कैसे अपनी पार्टी की नइया पार लगाती हैं.

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