अमिताभ ठाकुर की पत्नी के खिलाफ भी केस दर्ज, अखिलेश बोले- ”एक मूक क्रांति जन्म ले रही”

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उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी (एसपी) के अध्यक्ष अखिलेश यादव राज्य में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को लगातार निशाने पर ले रहे हैं.

अखिलेश ने 29 अगस्त को ट्वीट कर कहा है, ”पहले पुलिसवालों पर पुलिसवाले के खिलाफ ही अनुचित दबाव डालकर अवैधानिक गिरफ्तारी और फिर पुलिसवाले के परिवारवालों के खिलाफ FIR करवाना, बीजेपी की तुच्छ राजनीति का जीवंत उदाहरण है.”

इसके आगे अखिलेश ने कहा है, ”यूपी पुलिस के दुरुपयोग और उत्पीड़न से सिपाही से लेकर अधिकारियों तक एक ‘मूक क्रांति’ जन्म ले रही है.”

अखिलेश का यह ट्वीट ऐसे समय में आया है, जब 28 अगस्त को उत्तर प्रदेश कैडर के पूर्व भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी अमिताभ ठाकुर और उनकी पत्नी नूतन के खिलाफ सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में एक मामला दर्ज हुआ है.

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पुलिस का आरोप है कि शुक्रवार, 27 अगस्त को जब पुलिसकर्मी ठाकुर को गिरफ्तार करने गए थे तो उन्होंने और उनकी पत्नी ने पुलिस के काम में बाधा डाली थी और कथित तौर पर मारपीट की थी.

अमिताभ ठाकुर पहले से ही जेल में बंद हैं. अमिताभ को लखनऊ की हजरतगंज कोतवाली पुलिस ने एक महिला को खुदकुशी के लिए उकसाने समेत कई गंभीर आरोपों में गिरफ्तार कर जेल भेजा है.

गाजीपुर की रहने वाली इस महिला ने 2019 में अतुल राय पर रेप का आरोप लगाते हुए वाराणसी के लंका थाने में मुकदमा दर्ज कराया था. मौजूदा वक्त में घोसी सीट से सांसद अतुल राय भी जेल में हैं.

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आरोप लगाने वाली महिला और उसके साथी ने 16 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के सामने फेसबुक पर लाइव आने के बाद आत्मदाह करने की कोशिश की थी. घटना के बाद दोनों को इलाज के लिए राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले जाया गया था. हालांकि बाद में दोनों की मौत हो गई.

इस मामले में हुई ठाकुर की गिरफ्तारी का वीडियो शेयर करते हुए अखिलेश ने लिखा था, ”ऐसा व्यवहार अक्षम्य है”

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कौन हैं अमिताभ ठाकुर, हालिया वक्त में क्यों चर्चा में रहे हैं?

उत्तर प्रदेश काडर के पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने 27 अगस्त को कहा था कि वह जल्द ही एक नई राजनीतिक पार्टी बनाएंगे.

वह अगले साल होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ चुनाव लड़ने का ऐलान भी कर चुके हैं.

समाजवादी पार्टी के फाउंडर मुलायम सिंह पर धमकी देने का आरोप लगाने के कुछ दिनों बाद ठाकुर को 13 जुलाई 2015 को निलंबित कर दिया गया था. हालांकि, केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण ने अप्रैल 2016 में उनके निलंबन पर रोक लगा दी और 11 अक्टूबर 2015 से पूरे वेतन के साथ उनकी बहाली का आदेश दिया था.

केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से लिए गए एक फैसले के बाद ठाकुर को इसी साल 23 मार्च को ‘जनहित’ में समय से पहले ही अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गई थी. ठाकुर का कार्यकाल 2028 में पूरा होने वाला था.

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