स्वामी प्रसाद मौर्य का ओपी राजभर पर तंज, बोले- 'बंदरों की तरह रोज उछल कूद कर रहे'

स्वामी प्रसाद मौर्य और ओम प्रकाश राजभर
स्वामी प्रसाद मौर्य और ओम प्रकाश राजभरफोटो कोलाज: यूपी तक

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य (Swami Prasad Maurya) ने यूपी तक से बातचीत में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर (Om Prakash Rajbhar) पर जमकर हमला बोला है.

उन्होंने सुभासपा चीफ को लेकर कहा, "जिस तरीके से आज बंदरों की तरह एक डाल से कूदकर दूसरी डाल पर आने और जाने का क्रम बना है, यह गलत है. राजभर की पार्टी को उतनी सीटें दी गई, जितनी मांगी थीं, बीजेपी गठबंधन में वह काम सीट जीते थे, सपा गठबंधन में ज्यादा जीते हैं. या तो राजभर अति महत्वाकांक्षी हैं या उनका उल्लू कहीं सीधा होता नजर आ रहा है."

उन्होंने आगे कहा, "रोज उछल कूद करने से अहमियत घटती है और पार्टियां भी उन्हें गंभीरता से लेना छोड़ देती हैं. जहां जाने की बात कर रहे थे वहां से पहले ही नो एंट्री का फरमान जारी कर दिया गया है."

स्वामी ने कहा, "बीएसपी चार बार सत्ता में रह चुकी है, पर जब पहले ही बीएसपी के दरवाजे राजभर के लिए बंद हो गए हैं, तो चीजे साफ हैं. राजभर बीजेपी और बीएसपी में जाना चाहते हैं, लेकिन उन्हें कोई लेना नही चाहता."

गौरतलब है कि राजभर द्वारा समाजवादी पार्टी (सपा) से नाता तोड़कर बसपा से संबंध बढ़ाने की कोशिशों के बीच बसपा के राष्ट्रीय संयोजक और पार्टी चीफ मायावती के भतीजे आकाश आनंद ने सोमवार को कहा था कि ऐसे 'स्वार्थी' लोगों से सावधान रहने की जरूरत है.

आनंद ने किए एक ट्वीट में किसी का नाम लिए बगैर कहा था, "बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती (Mayawati) के शासन, प्रशासन, अनुशासन की पूरी दुनिया तारीफ करती है. लेकिन कुछ अवसरवादी लोग भी बहन जी के नाम के सहारे अपनी राजनीतिक दुकान चलाने की कोशिश करते हैं. ऐसे स्वार्थी लोगों से सावधान रहने की जरूरत है."

बता दें कि राजभर ने रविवार को जौनपुर में संवाददाताओं से बातचीत में कहा था कि उनका व्यक्तिगत रुप से मानना है कि अब बसपा से हाथ मिलाया जाना चाहिए.

वहीं पूर्व मंत्री ने कहा, "अगर राजभर किसी को सलाह देना उचित चाहते हैं, तो यह तरीका ठीक नहीं है. सलाह के रूप में कुछ कहना चाहते हैं तो कहें, पर आपस में कोई बातचीत ही नहीं हुई और न्यूज चैनल में उनके बयान आ गए. यह सलाह नहीं, सुर्खियों में बनी रहने की ओछी राजनीति है. इस तरह की अंदरूनी बातों को मीडिया में कहना राजनीतिक कुशलता नहीं है."

ज्ञात हो कि पिछले दिनों राजभर ने सपा चीफ अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) को वातानुकूलित कमरे से बाहर निकलकर सड़क पर संघर्ष करने की सलाह दी थी. उन्होंने यह भी कहा था कि सपा और बसपा को वर्ष 2024 का लोकसभा चुनाव साथ मिलकर लड़ना चाहिये. उनकी दलील थी कि जब दोनों ही दल पिछड़ों और वंचितों की लड़ाई लड़ रहे हैं तो फिर चुनाव अलग-अलग क्यों लड़ते हैं.

राजभर की सलाह को खारिज करते सपा अध्यक्ष ने कहा था सपा को किसी की सलाह की जरूरत नहीं है.

राजभर और महान दल के अध्यक्ष केशव देव मौर्य ने विधानसभा चुनाव में सपा की हार का ठीकरा आप पर फोड़ दिया. इसपर स्वामी ने कहा, "खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे, जब दोनों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है, तब कहीं न कहीं अपनी खिसियाहट और झल्लाहट किसी पर तो फोड़ेंगे ही."

इसके अलावा यूपी एसटीएफ द्वारा हुई खुद की पूछताछ पर स्वामी ने कहा कि हमारे विभाग में 5 साल में कोई वैकेंसी ही नहीं निकली थी, यह मेरा नाम बदनाम करने की साजिश है.

सरकारी नौकरी के नाम पर धोखाधड़ी करने के मामले में यूपी एसटीएफ ने स्वामी प्रसाद मौर्य से मंगलवार को पूछताछ की थी. दरअसल, यूपी सरकार में श्रम मंत्री रहने के दौरान उनके निजी सचिव अरमान खान ने कुछ लोगों के साथ मिलकर श्रम विभाग में नौकरी लगवाने के नाम पर कथित तौर पर धोखाधड़ी की थी.

स्वामी प्रसाद मौर्य और ओम प्रकाश राजभर
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