Opinion: योगी आदित्यनाथ का 'कर्मयोग': अनुशासन और स्पष्ट विजन से यूपी बना सुशासन का नया मॉडल
Opinion: उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली, कर्मयोग की अवधारणा और शासन मॉडल पर आधारित यह लेख उनके अनुशासन, सेवा भाव, प्रशासनिक दृष्टिकोण, कानून-व्यवस्था, कोविड प्रबंधन और विकास कार्यों का विश्लेषण प्रस्तुत करता है.
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Opinion: भगवदगीता में कहा गया है- "कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन". वस्तुतः यह एक ऐसी जीवन-दृष्टि है जो सहस्राब्दियों से भारतीय चेतना को आलोकित करती आई है. इस दर्शन को जब कोई जननेता आत्मसात करता है तो उसका पूरा व्यक्तित्व कर्मयोगी के रूप में परिलक्षित होने लगता है जिसके लक्ष्य में लोक कल्याण के अलावा कुछ नहीं रहता. एक समय था जब उत्तर प्रदेश में सत्ता को अधिकार और भोग का साधन समझा जाता था. पिछले लगभग एक दशक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अविचल कर्तव्य पथ पर चलना इस बात का ज्वलंत प्रतीक है कि कर्मयोग केवल व्यक्तिगत साधना नहीं व्यवस्था सुधार का माध्यम भी है. योगी की जीवनशैली बताती है कि शासन उनके लिए आध्यात्मिक साधना का विस्तार है, जिसका प्रतिफल उत्तर प्रदेश की प्रगति के रूप में देखने को मिल रहा है. एक कर्मयोगी ही उत्तर प्रदेश जैसे विविधताओं से भरे और देश की सबसे बड़ी जनसंख्या वाले राज्य को बीमारू श्रेणी से निकालकर विकास के पथ पर ला सकता है.
