Opinion: राजनीतिक विरोध या नैतिक पतन की पराकाष्ठा? योगी आदित्यनाथ से जुड़ी जिस AI वीडियो को अखिलेश यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस चलाया गया, उससे मचा बवाल!
अखिलेश यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस में AI से बने वीडियो के इस्तेमाल को लेकर यूपी की सियासत गरमा गई है. वीडियो में योगी आदित्यनाथ को लेकर किए गए कथित चित्रण पर राजनीतिक मर्यादा, डीपफेक और AI के दुरुपयोग को लेकर सवाल उठ रहे हैं. लेखक ने इस लेख में बताया कि कैसे यह मामला सिर्फ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप नहीं है, बल्कि सार्वजनिक जीवन में शुचिता, धार्मिक आस्था और जिम्मेदार तकनीकी इस्तेमाल से जुड़े गंभीर सवालों को खड़ा करता है.
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Opinion: राजनीतिक बहसों में मतभेद और तीखे हमले भारतीय लोकतंत्र का हिस्सा रहे हैं, लेकिन जब विरोध का माध्यम व्यक्तिगत आक्षेप और किसी की गरिमा व धार्मिक आस्था को आहत करने वाले फर्जी आधुनिक साधनों तक पहुंच जाए, तो यह गंभीर चिंता का विषय बन जाता है. सोमवार को समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से निर्मित एक वीडियो प्रस्तुत करने का मामला इसी विषय को रेखांकित करता है. डीपफेक और एआई की मदद से किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति अथवा किसी धार्मिक पीठ के प्रमुख का विकृत रूप पेश करना केवल एक राजनीतिक विरोधी पर प्रहार भर नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक जीवन में शुचिता, सामान्य शिष्टाचार और नैतिक सीमाओं के पतन को भी दर्शाता है.

