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Opinion: यूपी में सपा की सियासी राह मुश्किल, पुरानी छवि और नए समीकरणों के बीच फंसी अखिलेश यादव की पार्टी!

भारतीय राजनीति में क्षेत्रीय दलों की भूमिका हमेशा से महत्वपूर्ण रही है और उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) इसका एक बड़ा उदाहरण है. ‘लोहियावाद’ और सामाजिक न्याय की पृष्ठभूमि से निकली इस पार्टी ने चार बार सूबे की सत्ता पर राज किया.

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Akhilesh Yadav
Akhilesh Yadav (Photo Enhanced by AI)
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Opinion: भारतीय राजनीति में क्षेत्रीय दलों की भूमिका हमेशा से महत्वपूर्ण रही है और उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) इसका एक बड़ा उदाहरण है. ‘लोहियावाद’ और सामाजिक न्याय की पृष्ठभूमि से निकली इस पार्टी ने चार बार सूबे की सत्ता पर राज किया. लेकिन, लगभग एक दशक में इस पार्टी के राजनीतिक ग्राफ में भारी गिरावट देखने को मिली है तो इसकी सबसे बड़ी वजह उसकी स्वार्थ व संकीर्णता से भरी विचारधारा के प्रति सनातन समाज की जागरूकता है. आज सपा उस दोराहे पर खड़ी है, जहां वह मुस्लिम तुष्टिकरण से किनारा किए बिना भाजपा के हार्डकोर मतदाताओं को अपने पाले में लाना चाहती है. लेकिन, स्पष्टता के इसी अभाव का नतीजा है कि उसके प्रति अविश्वास की खाई और गहरी होती दिखाई दे रही है.