Opinion: समरसता से सांस्कृतिक विरासत तक, संत रविदास की जन्मस्थली पर योगी सरकार का विशेष अभियान
Opinion: गुरु पूर्णिमा पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संत रविदास की जन्मस्थली सीर गोवर्धनपुर पहुंचेंगे. इस अवसर पर 650वें जयंती वर्ष का शुभारंभ, समरसता संकल्प सभा और कई विशेष कार्यक्रम आयोजित होंगे.
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भारतीय समाज की आत्मा में भक्ति और समता का प्रवाह हमेशा से बहता रहा है तो इसके पीछे हमारे मनीषियों और संतों का वह मार्गदर्शन है, जिन्होंने हमेशा हम सबके जीवन को सही दिशा देने का कार्य किया. संत शिरोमणि गुरु रविदास भी ऐसे ही संत थे जिन्होंने ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ कहकर बाह्य आडंबरों का विरोध किया और भीतरी शुद्धता को धर्म का सार बताया. उन्होंने ऐसे राज्य की कल्पना की थी, जहां न कोई दुख हो, न भेदभाव, न ऊंच-नीच का बंधन. उनकी यह कल्पना सामाजिक क्रांति का ऐसा बीज थी, जिसने सदियों तक हाशिये पर रहे समाज को गरिमा और आत्मसम्मान का मार्ग दिखाया. गुरु पूर्णिमा के अवसर पर 29 जुलाई को जब उत्तर प्रदेश की योगी सरकार संत रविदास की जन्मस्थली पर पहुंचकर उनके प्रति कृतज्ञता ज्ञापित कर रही है, तो इसे समरसता की परंपरा को आगे बढ़ाने के बड़े संकल्प के रूप में देखा जाना चाहिए.
