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क्या शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के आश्रम में है स्विमिंगपूल? शीशमहल वाले दावों की हकीकत क्या है

वाराणसी के विद्या मठ में 'स्विमिंग पूल' और 'शीश महल' के दावों की खुली पोल. विशेष प्रतिनिधि ने बताया- आश्रम केवल तीन मंजिला है, जिसे षड्यंत्र के तहत बदनाम किया जा रहा है.

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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाले आशुतोष महाराज ने विद्या मठ आश्रम को लेकर कई दावे किए थे. इन दावों की पड़ताल के दौरान आश्रम के विशेष प्रतिनिधि देवेंद्र पांडे ने बताया कि ये तमाम आरोप निराधार और कल्पना से परे हैं. 

पांच मंजिला नहीं, तीन मंजिला है आश्रम

आरोप लगाया गया था कि यह आश्रम पांच मंजिला है, लेकिन मौके पर स्थिति अलग नजर आती है. विशेष प्रतिनिधि के अनुसार, आश्रम मुख्य रूप से तीन मंजिला ही है. 

  • भूतल: प्रवेश करने पर गैलरी और शंकराचार्य का पूजन स्थल है, जहां वे लोगों से मुलाकात करते हैं. 
  • पहली मंजिल: यहां वेद पाठी बच्चों के रहने (हॉस्टल) की व्यवस्था है. 
  • दूसरी मंजिल: यहां बच्चे वेद पाठन करते हैं और इसी हिस्से में उनके भोजन (किचन) की व्यवस्था है. 
  • ऊपरी हिस्सा: यहां पूर्व पीठाधीश्वर का सत्संग हॉल था और वर्तमान में शंकराचार्य के रहने का स्थान है.  

शीश महल और स्विमिंग पूल का दावा

आश्रम में शीश महल होने के आरोप पर देवेंद्र पांडे ने बताया कि अंदर केवल शीशे के कुछ पार्टीशन लगे हुए हैं, जिसे शिकायतकर्ता ने शीश महल का नाम दे दिया. वहीं, स्विमिंग पूल के दावे पर उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्रह्मलीन शंकराचार्य जी को घुटनों में तकलीफ थी और डॉक्टर ने उन्हें चलने की सलाह दी थी. शरीर भारी होने के कारण वे चल नहीं सकते थे, इसलिए एक हौदा जैसा बनाया गया था ताकि वे उसमें बैठकर हाथ-पांव चला सकें. उनके ब्रह्मलीन होने के बाद से उसमें रद्दी कागज और अनुपयोगी सामान भरा हुआ है. 

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'आरोप निराधार और षड्यंत्र का हिस्सा'

विशेष प्रतिनिधि ने कहा कि आश्रम में ऐसी कोई लग्जरी व्यवस्था नहीं है जैसा कि आरोप लगाया गया है. उन्होंने इन सभी बातों को निराधार बताते हुए कहा कि यह सब एक सोची-समझी साजिश और षड्यंत्र का हिस्सा है. फिलहाल, शंकराचार्य इसी मठ में मौजूद हैं और आम लोगों से मुलाकात कर रहे हैं.