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काशी विश्वनाथ धाम में 62 मंदिरों से पहुंची पावन भेंट, महाशिवरात्रि पर दिखी ऐसी आध्यात्मिक एकता

Mahashivratri Kashi: महाशिवरात्रि के अवसर पर कशी विश्वनाथ मंदिर में 62 से अधिक देश-विदेश के प्रमुख मंदिरों, शक्तिपीठों और ज्योतिर्लिंगों का पावन प्रसाद अर्पित किया गया. श्री कशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट की इस पहल ने ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को साकार करते हुए सनातन समाज को वैश्विक स्तर पर एक सूत्र में पिरोने का संदेश दिया.

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Mahashivratri Kashi: इस बार महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर काशी की धरती से संपूर्ण विश्व को 'आध्यात्मिक एकता' का एक बड़ा संदेश दिया गया है. श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास की एक अभिनव पहल के चलते भगवान विश्वेश्वर महादेव के चरणों में देश-विदेश के 62 से अधिक प्रमुख मंदिरों, शक्तिपीठों और ज्योतिर्लिंगों का पावन प्रसाद और भेंट अर्पित की गई है. यह आयोजन 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की भावना को साकार करते हुए सनातन समाज को एक सूत्र में पिरोने का वैश्विक मंच बन गया है.

62 मंदिरों का संगम: ज्योतिर्लिंग से लेकर शक्तिपीठ तक शामिल

आपको बता दें कि शनिवार तक श्री काशी विश्वनाथ धाम में कुल 62 पवित्र स्थलों से भेंट प्राप्त हो चुकी है. इस आध्यात्मिक अभियान में भारत के कोने-कोने के साथ-साथ विदेशों से भी सहभागिता देखी गई. चेन्नई के श्री रत्नगिरिस्वरर मंदिर, श्री अनंता पद्मनाभा स्वामी मंदिर और अरुल्मिगु भूमिनाथ ईश्वरर समेत दक्षिण भारत के दर्जनों मंदिरों की भक्त मंडलियां अपनी श्रद्धा लेकर काशी पहुंचीं. जम्मू-कश्मीर से श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड, मथुरा से श्री कृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान और उत्तराखंड से श्री केदारनाथ धाम का पावन प्रसाद महादेव को अर्पित किया गया. आध्यात्मिक एकता की यह गूंज सीमाओं के पार भी सुनाई दी. मलेशिया के श्री महा मरिअम्मन मंदिर और श्रीलंका (कोलंबो) के श्री ऐश्वर्या लक्ष्मी मंदिर से भी पावन भेंट प्राप्त हुई है.

भेंट में क्या है खास?

देश-विदेश से आ रही इन पवित्र सामग्रियों में केवल प्रसाद ही नहीं, बल्कि आस्था के विभिन्न प्रतीक शामिल हैं:

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विभिन्न तीर्थों का पवित्र जल.
सिद्धपीठों की रज (मिट्टी) और पूजित चंदन.
मंदिरों में भगवान को अर्पित की गई पुष्पमालाएं और पूजित वस्त्र.
विशिष्ट श्रद्धा उपहार.

मुंबई के 'राजा' और गुजरात के 'कान्हा' भी पहुंचे काशी

मुंबई के प्रसिद्ध लाल बाग के राजा और श्री सिद्धिविनायक मंदिर की ओर से विशेष प्रसाद भेजा गया है. वहीं गुजरात के द्वारकाधीश मंदिर और राजस्थान के नाथद्वारा (उदयपुर) स्थित श्रीनाथजी मंदिर ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है. कूरियर और विशेष प्रतिनिधियों के माध्यम से उपहारों के आने का सिलसिला अभी भी जारी है. काशी की आध्यात्मिक अखंडता को दर्शाते हुए स्थानीय मंदिरों जैसे- बड़ी शीतलाधाम, त्रिलोचन महादेव, बड़ा गणेश, कालभैरव, संकट मोचन क्षेत्र के प्रमुख मंदिरों और अन्नपूर्णा मंदिर से भी पावन भेंट अर्पित की गई है.

आध्यात्मिक सेतु' बन रही यह पहल 

मंदिर न्यास की इस पहल का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि विश्वभर के तीर्थों के मध्य एक भावनात्मक और सांस्कृतिक सेतु का निर्माण करना है. महाशिवरात्रि पर शुरू हुई यह परंपरा न केवल काशी की गरिमा बढ़ा रही है, बल्कि समस्त सनातनी आस्थाओं को एकात्म भाव से जोड़ते हुए एक नए अध्याय की शुरुआत कर रही है.

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