याचिकाकर्ताओं की अनुपस्थिति पर HC की तल्ख टिप्पणी- 'क्या कोर्ट कोई डंपिंग स्टेशन है?'

इलाहाबाद हाई कोर्ट
इलाहाबाद हाई कोर्टफोटो: पंकज श्रीवास्तव

याचिकाकर्ताओं के तय तारीखों पर कोर्ट ने पहुंचने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है. हाईकोर्ट ने कहा है कि 'जब अपना पक्ष रखने नहीं आना है, तो याचिका दाखिल क्यों की जाती है, क्या कोर्ट कोई डंपिंग स्टेशन है? बता दें कि हाईकोर्ट ने ये तल्ख टिप्पणी ह्यूमन लॉ नेटवर्क की तरफ से दाखिल की गई याचिकाओं पर एकसाथ सुनवाई करते हुए संगठन और दाखिल करने वाले विधि छात्रों पर की है.

जनहित याचिका दाखिल करने में शामिल संगठन ह्यूमन लॉ नेटवर्क और उन सभी छात्रों के विश्विद्यालयों को नोटिस भी जारी करने के लिए कहा है. ज्योति वर्मा और 10 अन्य की तरफ से दखिल जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए ये आदेश जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस जेजे मुनीर की खंडपीठ ने दिया है.

क्या है मामला?

दरअसल विधि छात्रों की तरफ से कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई थी, जो प्रयागराज और उसके आसपास राष्ट्रीय राज्यमार्ग के विस्तार के लिए काटे गए पेड़ों को लेकर थी. इसमें पेड़ काटे जाने और उसका रिप्लान्ट न कराए जाने की बात कही गई थी. मामले में कोर्ट ने पूर्व आदेश पारित करते हुए राष्ट्रीय राज्यमार्ग प्राधिकरण से कहा था कि पेड़ काटने की बजाय उसे दूसरी जगह पर प्लांट कर दिया जाए. इस मामले में कोर्ट ने केंद्र सरकार को भी पक्ष बनाया था.

वहीं, इससे पहले हुई सुनवाई में याचिकाकर्ताओं की तरफ से कोई भी कोर्ट में मौजूद नहीं हुआ और कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए याचिका दाखिल करने वालों को नोटिस जारी किया. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचियों के बारे में जानकारी मांगी, तो वहां कोई याची मौजूद नहीं था और न ही ह्यूमन लॉ नेटवर्क का कोई सदस्य उपस्थित था.

कोर्ट ने याचिकर्ताओं के वकील से लॉ नेटवर्क की संचालक के बारे में पूछा तो जवाब मिला कि वह किसी वजह से वो कोर्ट में नही आ सकी हैं. इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा है कि 'विधि छात्रों की याचिकाओं को कोर्ट में दाखिल कर दिया जाता है और उसे यहां डंप कर दिया जाता है. इसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जा सकता.' कोर्ट ने याचिका दाखिल करने वालों में शामिल विभिन्न कॉलेजों, विश्विविद्यालयों को नोटिस जारी करने के लिए कहा है.

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