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विल्सन सिंह 15 साल बाद SC-ST एक्ट और रेप केस से हुए बरी तो अब फंसी शिकायत करने वाली लड़की, ऐसे फंसाया गया था

Lucknow Fake SC-ST and Rape Case: विल्सन सिंह उर्फ आशु के खिलाफ 2011 में युवती ने एससी-एसटी एक्ट और रेप के आरोप में केस दर्ज करवाया था. मगर अब विल्सन को बरी कर दिया गया है. उनकी कहानी आपको हिला डालेगी.

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UP News (प्रतीकात्मक फोटो)
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Lucknow Fake SC-ST and Rape Case: फर्जी एससी-एसटी केस और फर्जी रेप केस में विल्सन सिंह उर्फ आशु को 14 साल बाद इंसाफ मिला और वह इस केस से बरी हो सके. मगर इस केस के चक्कर में पिछले 15 सालों से उनकी जिंदगी भारी मुश्किलों में गुजरी और उन्हें पुलिस-कानून का जमकर सामना करना पड़ा.

विल्सन सिंह उर्फ आशु को एससी-एसटी और रेप के फर्जी केस में कैसे फंसाया गया? पूरी कहानी जानिए

9 अप्रैल 2011 के दिन विकास नगर थाने में 376/एससी-एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज करवाया गया. ये केस एसपी बाराबंकी के दफ्तर में तैनात रहे हेड कांस्टेबल शरद श्रीवास्तव के घर में काम करने वाली दलित युवती की तरफ से दर्ज करवाया गया. आरोप लगा कि दलित युवती के साथ विल्सन सिंह उर्फ आशु ने गंदा काम किया और जाति के नाम पर उसका अपमान और उसे प्रताड़ित किया.

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फिर जांच में पूरी कहानी पता चली

बता दें कि जब पुलिस ने युवती का मेडिकल करवाया तो उसमें रेप की पुष्टि नहीं हुई. कोर्ट में सुनवाई के दौरान ये पता चला कि शरद श्रीवास्तव को 14 हजार रुपये आरोपी बने विल्सन सिंह उर्फ आशु को देने थे. विल्सन यूपी पुलिस में तैनात रहे शरद श्रीवास्तव की कार चलाता था.

अप्रैल 2011 में आशु की मां की तबीयत खराब हुई तो वह अपनी बकाया रकम लेने शरद के पास पहुंच गया. यहां उसका शरद से विवाद हुआ तो शरद ने उसे फर्जी केस में फंसाने की धमकी दे डाली और उसे रकम नहीं दी. इसके बाद 9 अप्रैल के दिन शरण श्रीवास्तव के यहां काम करने वाली दलित युवती की तरफ से विल्सन सिंह के खिलाफ एससी-एसटी केस और रेप का केस दर्ज करवा दिया गया.

आरोप सिद्ध नहीं हुए

मिली जानकारी के मुताबिक, 9 अप्रैल 2011 के दिन दर्ज हुई FIR में घटना 5 दिन पुरानी यानी 5 अप्रैल 2011 के दिन बताई गई. घटना का समय बताया गया दिन के 2:30 बजे. मामले की जांच के दौरान ना रेप का आरोप सिद्ध हो सका और ना ही SC/ST एक्ट के आरोप सिद्ध हो पाए. बता दें कि अब कोर्ट ने 14 साल बाद आरोपी रहे विल्सन सिंह उर्फ आशु को बरी कर दिया. इसी के साथ कोर्ट की तरफ से शिकायतकर्ता के खिलाफ धारा-344 CRPC के तहत कार्रवाई के निर्देश दे दिए.

बता दें कि कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को ठोस, विश्वसनीय और कानूनी साक्ष्यों के आधार पर सिद्ध करने में असफल रहा. कोर्ट ने कहा कि पीड़ित पक्ष द्वारा दिए गए बयानों में गंभीर असंगतियाँ पाई गईं. बता दें कि ये आदेश अपर सत्र न्यायाधीश हुसैन अहमद अंसारी, विशेष न्यायालय (एस सी/एसटी) ने दिया है.