UP बोर्ड के स्कूलों में अब दी जाएगी व्यावसायिक शिक्षा, जानिए क्या है मकसद और प्लानिंग?

सांकेतिक तस्वीर.
सांकेतिक तस्वीर.फोटो: यूपी तक

यूपी बोर्ड के स्कूलों में अब छात्रों को व्यावसायिक ट्रेनिंग भी दी जाएगी. क्लास 9-10 और क्लास 11-12 के छात्रों को ये ट्रेनिंग दी जाएगी. माध्यमिक शिक्षा विभाग राज्य के व्यावसायिक शिक्षा विभाग के साथ मिलकर इस योजना पर काम करेगा. इसका प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है. इस योजना के पीछे लक्ष्य ये है कि छात्रों को स्कूली शिक्षा के साथ उनकी रुचि के किसी एक विषय पर प्रोफेशनल ट्रेनिंग दी जाए. साथ ही प्रदेश में भविष्य में आने वाली कम्पनियों में इन्हें रोजगार मिल सके.

उत्तर प्रदेश के स्कूलों में जल्द ही एक बदलाव देखने को मिलेगा. इसमें छात्रों को किसी एक व्यावसायिक पाठ्यक्रम को पढ़ाई करनी होगी. माध्यमिक शिक्षा विभाग ने जो प्रस्ताव तैयार किया है उसके अनुसार पहले चरण में प्रदेश के 150 स्कूलों को लिया जाएगा. हर जिले के दो स्कूलों का चयन इसके लिए किया गया है. इनमें छात्रों के लिए ये व्यावसायिक ट्रेनिंग (ट्रेड) के लिए कई ऑप्शन दिए गए हैं. ये योजना कक्षा 9-10 और कक्षा 11-12 के छात्रों के लिए होगी. इसमें छात्रों को उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार किसी एक ट्रेड को चुनना होगा.
अहम बिंदु

दरअसल, नेशनल एजूकेशन पॉलिसी के तहत ये कहा गया है कि छात्रों को स्कूल के समय से ही उनकी अभिरुचि के किसी एक विषय पर पढ़ाई करायी जाए. इसके लिए उस विषय की जानकारी के साथ व्यावहारिक पक्षी की ट्रेनिंग भी देने की बात है. उसके बाद ये योजना तैयार की गई है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने माध्यमिक शिक्षा विभाग की बैठक में ये कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भारत को 5 ट्रिलियन इकॉनमी बनाने में उत्तर प्रदेश 1 ट्रिलियन इकॉनमी की भागीदारी करेगा.

उस दृष्टि से यूपी में न सिर्फ निवेश बढ़ाने की कोशिश की जा रही है बल्कि ये कम्पनियों को कहा जा रहा है कि वो यूपी में यहां के युवाओं को रोजगार दें. इसी के लिए ये खाका तैयार किया गया है कि अगर उन क्षेत्रों में यहां के युवाओं को जानकारी और टेक्निकल दक्षता होगी तो युवा आसानी से इन क्षेत्रों में प्रवेश कर पाएंगे.

कृषि से लेकर आईटी और रीटेल में रोजगार के अवसर देखते हुए शामिल किए गए पाठ्यक्रम

इसके लिए इंडस्ट्री की जरूरत को देखते हुए अभी अलग-अलग कई पदों के लिए पाठ्यक्रम चलाए जाएंगे. 8 सेक्टर प्रारम्भिक तौर पर चुने गए हैं. हर सेक्टर में 2 पाठ्यक्रम यानि 16 पाठ्यक्रम इसमें शामिल होंगे. ये वो क्षेत्र (सेक्टर) हैं, जिनमें भविष्य में सबसे ज़्यादा यूपी में निवेश होने की सम्भावना है और इन क्षेत्रों में नियोक्ताओं को लोगों की जरूरत होगी.

कई कम्पनियों ने इसपर कार्य शुरू कर दिया है. माध्यमिक शिक्षा विभाग के एक अधिकारी के अनुसार छात्र आम तौर पर बारहवीं के बाद इस तरह की टेक्निकल ट्रेनिंग के लिए ITI या दूसरे व्यावसायिक संस्थानों में दाखिला लेते हैं. पर यूपी में भविष्य में बड़े पैमाने पर निवेश और कई सेक्टरों में बड़ी कम्पनियों के आने की सम्भावना को देखते हुए इन क्षेत्रों का चुनाव किया गया है.

अहम बिंदु

कृषि के अंतर्गत ऐग्रिकल्चर ,गार्ड्निंग, ऊर्जा में इलेक्ट्रिकल टेक्नीशियन, आईटी डिपार्टमेंट में डमेस्टिक जूनियर डेटा ऑपरेटर, सॉफ्टवेयर डेवलपर, फैशन और टेक्स्टायल में सिलाई मशीन ऑपरेटर, टेलरिंग, ब्यूटी में जूनियर ब्यूटी थेरपिस्ट, ब्यूटि थेरपिस्ट, ऑटमोटिव इंडस्ट्री में फोर वहीलर का सर्विस असिस्टेंट, सर्विस टेक्नीशियन, शारीरिक शिक्षा विभाग में फिटनेस ट्रेनर, फिजिकल एनुकेशन असिस्टेंट, रीटेल में रीटेल स्टोर असिस्टेंट, सेल्स एसोसियेट जैसे पदों के लिए ट्रेनिंग दी जाएगी.

अभी यूपी बोर्ड के विषयों से लिंक नहीं, अलग से मिलेगा प्रमाणपत्र


फिलहाल, इन विषयों को टेक्निकल ट्रेनिंग के तौर पर शामिल किया का रहा है. ज्यादातर कोर्स की अवधि 12 महीने रखी गई है. इन विषयों को पूरा करने पर इसका प्रमाणपत्र मिलेगा. माध्यमिक शिक्षा विभाग के एक अधिकारी के अनुसार इस प्रमाण पत्र को उससे सम्बंधित इंडस्ट्री में सेवायोजन के वक्त लगाया जा सकता है. इसको अभी यूपी बोर्ड के विषयों में शामिल नहीं किया गया है. इसकी वजह ये है कि एकदम से ये सभी स्कूलों में शुरू करना सम्भव नहीं.

इसके लिए प्रथम चरण में चुने गए स्कूलों में जहां उस ट्रेड से सम्बंधित संसाधनों की व्यवस्था करनी होगी वहीं इसके लिए दक्ष शिक्षक भी नियुक्त करने होंगे. यही वजह है कि हर स्कूल को सिर्फ दो ट्रेड दिया गया है जो बाद में बढ़ाया जाएगा. राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत शिक्षा को व्यावसायिक शिक्षा से जोड़ने की बात कही गयी है उसके तहत ये पहल की गई है.

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