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शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज की ये कौन सी फोटो लेकर आ गए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, मचा खूब बवाल

Shankaracharya Avimukteshwarananda: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने ऊपर लगे पॉक्सो आरोपों को पुलिस की साजिश बताया है. उन्होंने पुलिस अधिकारी अजय पाल शर्मा और शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज की एक साथ केक काटते हुए फोटो जारी कर जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं.

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Shankaracharya Avimukteshwarananda: ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर लगे यौन शोषण के आरोपों ने अब एक नया और बेहद गंभीर मोड़ ले लिया है. अपने ऊपर दर्ज पॉक्सो (POCSO) मामले को पूरी तरह प्रायोजित साजिश करार देते हुए शंकराचार्य ने मीडिया के सामने एक ऐसी तस्वीर पेश की है जिसने प्रयागराज पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है. इस तस्वीर में केस का मुख्य शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज एक रसूखदार पुलिस अधिकारी एक साथ केक काटते नजर आ रहे हैं. शंकराचार्य का सीधा आरोप है कि जिस पुलिस अधिकारी के हाथ में जांच की कमान है वह खुद अपराधियों के साथ जश्न मना रहा है.

शंकराचार्य के 5 बड़े सवाल

1. शंकराचार्य ने एक फोटो जारी की जिसमें प्रयागराज के प्रभारी अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अजय पाल शर्मा और शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज (जिन्हें शंकराचार्य ने हिस्ट्रीशीटर बताया) एक साथ बर्थडे सेलिब्रेट कर रहे हैं. शंकराचार्य ने तंज कसते हुए कहा 'एक तरफ स्टूल पर केक रखा है, दूसरी तरफ पुलिस के बड़े अधिकारी और हिस्ट्रीशीटर साथ हैं. जब जांच करने वाला ही अपराधी के साथ मिलकर उत्सव मनाए, तो जनता क्या निष्कर्ष निकालेगी?'

2. 18 तारीख का वह रहस्यमयी घटनाक्रम

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शंकराचार्य ने सिलसिलेवार तरीके से साजिश का खुलासा करते हुए बताया कि इसकी नींव 18 फरवरी को ही रख दी गई थी.उन्होंने कहा, '18 तारीख की सुबह मुझे संगम पर रोका गया और उसी शाम आशुतोष महाराज ने एक फर्जी मुकदमा दर्ज कराया कि मेरे शिष्य मुकुंदानंद ने उनका गला दबाया. माघ मेले की उस भीड़ में ऐसा होना नामुमकिन था. इसलिए पुलिस ने तब मामला दर्ज नहीं किया क्योंकि सीसीटीवी फुटेज में हम सबके सामने बैठे थे.'

3. पुलिस ने 'डायरेक्ट FIR' क्यों नहीं की?

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गहरा संदेह जताते हुए पूछा कि पॉक्सो जैसे संवेदनशील मामले में पुलिस ने तुरंत एफआईआर क्यों नहीं की? उन्होंने आरोप लगाया चोर की दाढ़ी में तिनका है. पुलिस खुद कहानी बुन रही थी. उन्हें डर था कि अगर वे सीधे एफआईआर करेंगे तो उनकी मिलीभगत खुल जाएगी. इसलिए कोर्ट के आदेश का सहारा लेकर खुद को साफ दिखाने की कोशिश की गई.

4. कौन हैं वे बच्चे? कहां से आए?

शंकराचार्य ने कोर्ट के 14 पन्नों के आदेश पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि जिन बच्चों के साथ कुकर्म का आरोप लगाया गया है वे न तो उनके विद्यालय के छात्र थे और न ही आश्रम से उनका कोई संबंध था. उन्होंने दावा किया कि पुलिस की शह पर इन बच्चों को मोहरा बनाया गया है ताकि उनकी 'गौ-रक्षा' की आवाज को दबाया जा सके.

5. राजनीतिक और धार्मिक साजिश का आरोप

शंकराचार्य का मानना है कि यह सब पूर्व नियोजित है. उन्होंने कहा कि अजय पाल शर्मा की आशुतोष महाराज से पुरानी दोस्ती है.यह पूरा खेल इसलिए खेला जा रहा है क्योंकि वे सनातन धर्म और गौ-माता के लिए मजबूती से खड़े हैं. उन्होंने इसे यूपी पुलिस के कुछ अधिकारियों और अपराधियों का एक खतरनाक गठजोड़ बताया है.