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यूपी की लंभुआ सीट पर बीजेपी-सपा में कड़ी टक्कर! 2027 में कौन मारेगा बाजी? जानें पूरे समीकरण

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सुल्तानपुर की लंभुआ विधानसभा सीट पर 2027 के चुनाव को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं. 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई इस सीट पर 2012 से 2022 के बीच कभी सपा तो कभी बीजेपी ने जीत दर्ज की है.

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उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले की लंभुआ विधानसभा सीट का अपना एक अलग और दिलचस्प सियासी इतिहास है. 2008 के परिसीमन के बाद वजूद में आई इस सीट को पहले 'चांदा विधानसभा' के नाम से जाना जाता था. यह क्षेत्र सिर्फ राजनीति के लिए ही नहीं, बल्कि अपने धार्मिक और पौराणिक महत्व के लिए भी काफी मशहूर है. इसी सीट पर गोमती नदी के तट पर 'धोपाप धाम' स्थित है. मान्यता है कि यहीं पर भगवान श्री राम ने रावण वध के बाद स्नान कर ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति पाई थी. साल 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से लंभुआ के बाजारों और चौराहों पर चुनावी चर्चाएं शुरू हो गई हैं. 2012 से लेकर 2022 तक यहां कभी समाजवादी पार्टी तो कभी भारतीय जनता पार्टी का कब्जा रहा है. आइए जानते हैं कि इस सीट का पूरा इतिहास, चुनावी समीकरण और यहां के विकास कार्यों को लेकर क्या माहौल है.

विधायक के विकास के दावे

वर्तमान बीजेपी विधायक सीताराम वर्मा का दावा है कि उनके कार्यकाल में लंभुआ में कई अहम विकास कार्य हुए हैं. उन्होंने कहा, "हमारे कार्यकाल में स्टेडियम बनवाया गया, इस क्षेत्र को नगर पंचायत का दर्जा दिलाया गया, फायर स्टेशन पास कराया गया और कमल सरोवर का निर्माण हुआ." विधायक का कहना है कि सरकार से फंड लाना और विकास कार्य कराना उनके लगातार किए गए प्रयासों का ही नतीजा है. उन्होंने यह भी बताया कि उनके कार्यकाल में इलाके में शांति रही है और किसी भी समुदाय या धर्म के व्यक्ति के साथ कोई भेदभाव नहीं हुआ.

पूर्व सपा विधायक के पलटवार

बीजेपी विधायक के दावों पर पलटवार करते हुए, 2012 में यहां से चुनाव जीत चुके समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक संतोष पांडे ने कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में कई ऐसे काम किए, जिन्हें लंभुआ की जनता आज भी याद करती है. पांडे ने बताया, "मैंने कामतागंज में मॉडल स्कूल, लंभुआ में तहसील और महिला अस्पताल बनवाया. इसके अलावा पॉलिटेक्निक, पावर हाउस और आईटीआई का भी निर्माण कराया." उनका कहना है कि उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा और यातायात के क्षेत्र में लंभुआ को वह सब दिया, जिसकी जनता हकदार थी और लोग आज भी उनके काम की तारीफ करते हैं.

लंभुआ का जातीय समीकरण

लंभुआ विधानसभा सीट के जातीय समीकरण की बात करें, तो यहां कोई एक जाति विशेष कभी चुनाव नहीं जिता पाई है. इस सीट पर ब्राह्मण, क्षत्रिय, बैकवर्ड और दलित हर वर्ग के नेता चुनाव जीत चुके हैं. इलाके के कुल 3,39,126 मतदाताओं में सबसे ज्यादा 80 हजार दलित वोटर हैं. इसके बाद ब्राह्मण 77 हजार, क्षत्रिय 42 हजार, यादव 42 हजार, मुस्लिम 38 हजार, कुर्मी 31 हजार और अन्य जातियां लगभग 29 हजार हैं. राजनीतिक जानकारों और स्थानीय पत्रकारों का मानना है कि बीजेपी के पिछले 10 सालों (देवमणि द्विवेदी और सीताराम वर्मा के कार्यकाल) में सड़कों और पुलों का अच्छा विकास हुआ है. आगामी चुनाव में मुख्य टक्कर बीजेपी और सपा-कांग्रेस गठबंधन के बीच मानी जा रही है, जबकि बहुजन समाज पार्टी (BSP) भी अपने मजबूत वोट बैंक के साथ मैदान में कड़ी चुनौती पेश करेगी.

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