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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद के बीच 'कालनेमी' को लेकर छिड़ी रार, CM योगी के बयान के बाद मचा सियासी बवाल

सुषमा पांडेय

Kalnemi Remark Controversy: प्रयागराज माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच जारी विवाद ने अब बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा बिना नाम लिए भेष बदलने वाले राक्षस कालनेमी का जिक्र करने के बाद सियासी गलियारों में भूचाल आ गया है.इस बयान को सीधे तौर पर शंकराचार्य से जोड़कर देखा जा रहा है जिस पर अविमुक्तेश्वरानंद ने भी कड़ा पलटवार किया है.

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CM Yogi and Avimukteshwarananda
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Kalnemi Remark Controversy: प्रयागराज माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ जुड़ा विवाद अब राजनीतिक रंग ले चुका है. मामले में हो रही तमाम बयानबाजियों के बीच सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी गुरुवार को बड़ी बात कह दी. उन्होंने बिना नाम लिए भेष बदलने वाले राक्षस कालनेमी का नाम लेकर बड़ा बयान दे दिया जिसके बाद बवाल मच गया. सीएम योगी के इस बयान को ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के साथ जोड़ा जाने लगा.ऐसे में अब अविमुक्तेश्वरानंद के जवाब ने इस मामले को और तूल दे दी है. 

योगी का कालनेमी वाला वार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मेरठ के एक कार्यक्रम में कहा कि 'एक संत और संन्यासी के लिए धर्म व राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं होता. हमें उन कालनेमी से सतर्क रहना होगा जो धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश रच रहे हैं. सीएम के इस बयान के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने जवाब देते हुए कहा कि 'धर्म की रक्षा के लिए वे किसी भी तंज का सामना करने को तैयार हैं.' उन्होंने 18 जनवरी की उस घटना का भी जिक्र किया जिसमें पुलिस और उनके समर्थकों के बीच झड़प हुई थी. शंकराचार्य अभी भी इस बात पर अड़े हैं कि संतों के साथ बदसलूकी करने वाले अधिकारी सार्वजनिक माफी मांगें.

एक तरफ जहां सीएम योगी का रुख सख्त नजर आ रहा है.वहीं उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का बयान चर्चा में है. केशव मौर्य ने हाथ जोड़कर विनती करते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को पूज्य शंकराचार्य जी कहकर संबोधित किया. अब राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह सरकार की ओर से डैमेज कंट्रोल की कोशिश है या फिर यह केशव मौर्य का संतों के प्रति अपना व्यक्तिगत भाव है?

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इस विवाद ने विपक्ष को सरकार घेरने का बड़ा मौका दे दिया है. सपा नेता शिवपाल यादव और कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने सरकार पर संतों का अपमान करने का आरोप लगाया है. विपक्ष का कहना है कि जो सरकार संतों के सम्मान की बात करती थी आज वही उन्हें राक्षस की संज्ञा दे रही है.

कौन था कालनेमी?

सीएम योगी ने जिस कालनेमी का नाम लिया वो एक मायावी दैत्य था. इसका जिक्र रामायण और रामचरित मानस में बहुत विस्तार से मिलता है. रामकथा के अनुसार कालनेमी रावण का मित्र था और रावण के कहने पर वह हनुमानजी को छलने की कोशिश करता है और फिर मारा जाता है.


 

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