पूर्वांचल के जौनपुर सदर सीट की सियासत में दिलचस्प मुकाबला चल रहा है. यह सीट मुस्लिम बहुल है और यहां बीजेपी के गिरीश चंद्र यादव विधायक हैं. 2012 से 2017 तक यह सीट विपक्ष के कब्जे में थी. लेकिन बाद में बीजेपी ने वापसी की.समाजवादी पार्टी इस सीट पर फिर से जोर लगा रही है. वहां दो मुख्य मुस्लिम नेता नदीम जावेद और अमीक़ जमई इस कोशिश में हैं कि वह कैंडिडेट बनें. नदीम जावेद कांग्रेस से जुड़े रहे हैं. जबकि अमीक़ जमई समाजवादी पार्टी के सक्रिय सदस्य हैं. जौनपुर सदर की मांग और लोगों की पसंद को लेकर सियासी जहर और राजनीतिक रणनीतियां चल रही हैं.
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नदीम जावेद को पिछली बार 12,000 वोट मिले थे और पिछले चुनाव में वे तीसरे नंबर पर रहे. समाजवादी पार्टी का अपना दावा है कि उसने करीब 9,000 वोटों से चुनाव हारा. अमीक़ जमई ने अभी चुनाव नहीं लड़ा लेकिन वे इलाके में सक्रिय हैं और आगामी समय में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण साबित हो सकती है.
जौनपुर सदर के लिए बीजेपी की रणनीति भी महत्वपूर्ण है. क्या गिरीश चंद्र यादव दोबारा चुनाव लड़ेंगे या कोई नया दावेदार सामने आएगा? इस सवाल का जवाब चुनाव के नजदीक आने पर ही पता चलेगा. पार्टी और गठबंधन भी अभी तक इस सीट के लिए अंतिम फैसला नहीं कर पाए हैं.
यह क्षेत्र पूर्वांचल का एक महत्वपूर्ण राजनीतिक केंद्र है और यहां के चुनाव परिणाम से स्थानीय और राज्य स्तर पर राजनीतिक समीकरण प्रभावित होंगे. जनता की प्रतिक्रिया और नेताओं की मेहनत पर आने वाले चुनावों का नतीजा निर्भर करेगा.इस सियासी परिदृश्य में सभी पार्टियां अपनी जगह और जनाधार बनाए रखने के लिए प्रयासरत हैं. आगामी चुनाव में कौन सी पार्टी और नेता जीतेंगे, यह देखने वाली बात होगी.
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