उत्तर प्रदेश की राजनीति में हिंदू हृदय सम्राट के नाम से चर्चित रहे पूर्व सांसद और बजरंग दल के संस्थापक विनय कटियार ने एक बड़े सियासी धमाके के संकेत दिए हैं. लंबे समय से हाशिए पर चल रहे कटियार ने अब खुलकर अपनी इच्छा जाहिर कर दी है कि वे आगामी चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने अपनी दावेदारी के लिए रामनगरी अयोध्या को चुना है. इस ऐलान के बाद ना सिर्फ बीजेपी के भीतर हलचल तेज हो गई है बल्कि सोशल मीडिया पर भी बहस का दौर शुरू हो गया है.
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पंकज चौधरी की मुलाकात और बदलते समीकरण
कुछ दिनों पहले बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने विनय कटियार से उनके आवास पर मुलाकात की थी. उस समय इस मुलाकात को महज एक शिष्टाचार भेंट बताकर टाल दिया गया था. विनय कटियार ने भी तब सधे हुए अंदाज में कहा था कि 'आने वाला वक्त बताएगा.' लेकिन अब उनके ताजा बयान ने साफ कर दिया है कि उस बंद कमरे की मुलाकात के मायने कुछ और ही थे. विनय कटियार ने अब सार्वजनिक रूप से अपनी मंशा स्पष्ट कर दी है. उन्होंने जिस बेबाक अंदाज में अयोध्या से चुनाव लड़ने की बात कही है उसने राजनीतिक विश्लेषकों को हैरान कर दिया है. सोशल मीडिया पर उनके समर्थक इसे बीजेपी की मजबूती बता रहे हैं. वहीं विरोधी खेमे में हलचल मची है.
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2024 के सेटबैक को सुधारने की रणनीति?
2024 के लोकसभा चुनाव में फैजाबाद (अयोध्या) सीट पर बीजेपी को मिली हार पार्टी के लिए एक बड़ा झटका थी. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस हार के पीछे कुर्मी मतदाताओं का बीजेपी से छिटकना एक बड़ी वजह रही. अगर बीजेपी उन्हें फिर से चुनावी मैदान में उतारती है तो यह पार्टी की ओर से ओबीसी और हिंदूवादी वोटों को एकजुट करने की एक बड़ी मास्टरस्ट्रोक रणनीति हो सकती है. बता दें कि विनय कटियार राम मंदिर आंदोलन के सबसे प्रमुख चेहरों में से एक रहे हैं. अब जब अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण हो चुका है. ऐसे में कटियार की वापसी को कोर हिंदुत्व की ओर लौटने के रूप में देखा जा रहा है. हालांकि बीजेपी आलाकमान इस पर क्या फैसला लेते हैं यह देखना दिलचस्प होगा.
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