UP Scholarship 2026: उत्तर प्रदेश में छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति को लेकर शनिवार को बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सुबह 10 बजे लोक भवन में होने वाले कार्यक्रम में 4.60 लाख से ज्यादा छात्र-छात्राओं के बैंक खातों में ₹148 करोड़ से अधिक की राशि भेजेंगे. इसमें पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति, सामान्य वर्ग और अल्पसंख्यक वर्ग के विद्यार्थी शामिल हैं. सरकार के अनुसार, छात्रवृत्ति वितरण की प्रक्रिया को ऑटोमेशन से जोड़ने के बाद व्यवस्था में पारदर्शिता आई है और विद्यार्थियों तक रकम समय पर पहुंच रही है.
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किस वर्ग के कितने छात्रों को मिलेगा पैसा?
इस कार्यक्रम में अलग-अलग वर्गों के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति की राशि मिलेगी. पिछड़ा वर्ग के 2,23,615 विद्यार्थियों को ₹60.01 करोड़ दिए जाएंगे. वहीं अनुसूचित जाति के 1,59,959 विद्यार्थियों के खातों में ₹64.54 करोड़ भेजे जाएंगे. सामान्य वर्ग के 38,084 विद्यार्थियों को ₹11.43 करोड़, जबकि अल्पसंख्यक वर्ग के 38,901 विद्यार्थियों को ₹12.06 करोड़ की राशि मिलेगी. इन सभी वर्गों को मिलाकर लाभ पाने वाले विद्यार्थियों की संख्या 4.60 लाख से अधिक है और कुल राशि ₹148 करोड़ से ज्यादा है.
छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति का क्या मतलब?
सरकार की ओर से पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों को आर्थिक मदद के तौर पर छात्रवृत्ति दी जाती है, ताकि फीस और पढ़ाई का खर्च उनके परिवार पर अधिक बोझ न बने. वहीं शुल्क प्रतिपूर्ति के तहत विद्यार्थी द्वारा जमा की गई फीस की राशि सरकार की ओर से बाद में वापस की जाती है. इस योजना की राशि सीधे विद्यार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाती है, जिससे लाभार्थियों तक पैसा पहुंचाने की प्रक्रिया सीधे बैंक खाते के माध्यम से होती है.
65.95 लाख से ज्यादा छात्रों को मिल चुका लाभ
वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 65.95 लाख से ज्यादा छात्र-छात्राओं को ₹4,793 करोड़ से अधिक की छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ दिया जा रहा है. इस आंकड़े से योजना के बड़े दायरे का पता चलता है. लाखों विद्यार्थी इस व्यवस्था के जरिए आर्थिक सहायता प्राप्त कर रहे हैं. शनिवार को होने वाला कार्यक्रम भी इसी प्रक्रिया के तहत विद्यार्थियों को राशि उपलब्ध कराने की कड़ी का हिस्सा है.
ऑटोमेशन से व्यवस्था में पारदर्शिता का दावा
सरकार का कहना है कि छात्रवृत्ति वितरण की पूरी व्यवस्था को ऑटोमेशन से जोड़ा गया है. इसका मतलब है कि प्रक्रिया के ज्यादातर काम कंप्यूटर प्रणाली के जरिए किए जाते हैं. सरकार का दावा है कि इससे गड़बड़ी और देरी की संभावना कम हुई है तथा वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ी है. साथ ही विद्यार्थियों को समय पर छात्रवृत्ति उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि उनकी रकम बिना रुकावट सीधे बैंक खातों तक पहुंच सके.
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