‘कुर्मी कैबिनेट मंत्री’ राकेश सचान की क्यों हो रही चर्चा? कभी गिट्टी चोरी तो कभी कोर्ट से फाइल लेकर भागने का लगा था आरोप

सुषमा पांडेय

02 Oct 2026 (अपडेटेड: 02 Oct 2026, 09:55 AM)

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के बीच मंत्री राकेश सचान की अखिलेश यादव के साथ वायरल तस्वीर से सियासी चर्चाएं तेज हुईं. सचान ने मुलाकात को सामान्य बताया और राजनीतिक अटकलों को खारिज किया.

Rakesh Sachan

Rakesh Sachan

Google CTA

उत्तर प्रदेश में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है. इसी बीच योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री राकेश सचान की समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव और विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के साथ एक वायरल तस्वीर ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है. तस्वीर सामने आने के बाद सचान के फिर से पाला बदलने और राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग की अटकलों का बाजार गर्म हो गया है. हालांकि राकेश सचान ने इसे महज एक अनौपचारिक और संयोगवश हुई मुलाकात बताते हुए सफाई दी है. लेकिन कुर्मी वोट बैंक के बड़े चेहरे के रूप में उनके राजनीतिक सफर, विभागीय बदलाव और पुराने विवादों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं.

यह भी पढ़ें...

वायरल फोटो, सतीश महाना का कमरा और मंत्री की सफाई

हाल ही में विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के कक्ष से एक तस्वीर सामने आई जिसमें मंत्री राकेश सचान, अखिलेश यादव के साथ चाय-नाश्ता करते नजर आए. इसके बाद कयास लगाए जाने लगे कि क्या सचान अपनी पुरानी पार्टी (सपा) में घर वापसी की तैयारी कर रहे हैं. मामला गर्म होने पर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी से भी सचान की बातचीत हुई. सचान ने सफाई देते हुए कहा कि यह कोई पूर्व नियोजित बैठक नहीं थी बल्कि सतीश महाना के कमरे में अखिलेश यादव पहले से मौजूद थे और वे महज संयोगवश वहां पहुंचे थे.

राज्यसभा चुनाव और क्रॉस वोटिंग की आशंका

राज्यसभा चुनाव को लेकर बीजेपी जहां 9वें उम्मीदवार के लिए फॉर्म लेने के बाद अपनी रणनीति बना रही है. वहीं सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव भी तीसरे प्रत्याशी को लेकर सियासी गोटियां बिछा रहे हैं. 2023 के चुनाव में मनोज पांडे, अभय सिंह, राकेश सिंह और पूजा पाल जैसे सपा विधायकों द्वारा पाला बदलने के बाद इस बार अखिलेश असंतुष्ट नेताओं से संपर्क साधने और पुराने समीकरणों को साधने की कोशिश में हैं. ऐसे में सचान जैसी वरिष्ठ हस्तियों की गतिविधियों पर दोनों खेमों की नजरें टिकी हुई हैं.

सपा, कांग्रेस से बीजेपी तक: कैसा रहा सचान का सियासी सफर?

सपा का दौर: कानपुर देहात की भोगनीपुर सीट से विधायक सचान ने 1993 और 2002 में सपा के टिकट पर घाटमपुर से विधायकी जीती. 2009 में वह फतेहपुर से सपा के सांसद बने. वह मुलायम सिंह यादव और शिवपाल यादव के बेहद करीबी माने जाते थे. 2019 के लोकसभा चुनाव में टिकट कटने पर वह कांग्रेस में शामिल हो गए और राहुल गांधी व प्रियंका गांधी के करीबी बने.हालांकि चुनाव में जीत नहीं मिल सकी.

बीजेपी में कैबिनेट मंत्री: 2022 विधानसभा चुनाव से ठीक पहले वह बीजेपी में आए, भोगनीपुर से चुनाव जीते और योगी सरकार में एमएसएमई (MSME) व खादी ग्रामोद्योग जैसे विभागों के कैबिनेट मंत्री बने. हालांकि हालिया मंत्रिमंडल फेरबदल में उनसे एमएसएमई जैसा महत्वपूर्ण विभाग वापस ले लिया गया जिससे उनके असंतुष्ट होने की खबरें सामने आई थीं.

हथियार कांड से कोर्ट की फाइल लेकर भागने तक: विवादों से नाता

राकेश सचान का राजनीतिक करियर कई गंभीर विवादों से भरा रहा है. 13 अगस्त 1991 को उनके पास से एक बिना लाइसेंस की राइफल बरामद हुई थी जिसका संबंध निरपेन सचान की हत्या से जोड़ा गया था. इस मामले में लोअर कोर्ट ने उन्हें 1 साल की सजा और जुर्माना सुनाया था. आरोप लगा कि 2022 में कानपुर कोर्ट द्वारा दोषी ठहराए जाने के तुरंत बाद सचान अपने वकील की मदद से सजा के आदेश की मूल प्रति (फाइल) लेकर कोर्ट से फरार हो गए थे. उन पर सरकारी भवन पर कब्जा, इंजीनियर से मारपीट और गिट्टी चोरी तक के आरोप लगे. उनके चुनावी हलफनामे के मुताबिक उन पर आधा दर्जन से ज्यादा आपराधिक मुकदमे दर्ज रहे हैं.

कुर्मी वोट बैंक और 2027 का समीकरण

उत्तर प्रदेश में कुर्मी समुदाय की आबादी लगभग 8 प्रतिशत है जो गैर-यादव ओबीसी वर्ग में बेहद निर्णायक मानी जाती है. प्रदेश की 80 से 90 विधानसभा सीटों पर इस वोट बैंक का सीधा असर पड़ता है. 2024 के लोकसभा चुनाव में कुर्मी वोटों में हुई सेंधमारी के बाद बीजेपी और सपा दोनों ही इस वर्ग के नेताओं को अपने पाले में बनाए रखने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं. यही वजह है कि राकेश सचान की एक छोटी सी मुलाकात भी प्रदेश की राजनीति में बड़े भूचाल का कारण बन रही है.

ये भी पढ़ें: सलीम शेरवानी की ना के बाद कौन होगा अखिलेश यादव का तीसरा राज्यसभा उम्मीदवार?