लखनऊ में अखिलेश यादव और अब्बास अंसारी की मुलाकात से सियासी भूचाल, राज्यसभा में होगा खेल?

सुषमा पांडेय

• 11:32 AM • 02 Oct 2026

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव और सुभासपा विधायक अब्बास अंसारी की मुलाकात से सियासी हलचल बढ़ी है. सपा तीसरे उम्मीदवार की तैयारी में है जबकि 37 वोटों के आंकड़े को लेकर चुनावी गणित पर चर्चा तेज है.

Akhilesh and Abbas Ansari

Akhilesh and Abbas Ansari

Google CTA

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए होने वाले चुनाव से पहले सियासी सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं. समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा तीसरे प्रत्याशी को मैदान में उतारने के ऐलान के बीच लखनऊ में हुई एक मुलाकात ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है. सपा के प्रदेश कार्यालय में अखिलेश यादव और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के विधायक अब्बास अंसारी के बीच करीब एक घंटे तक बंद कमरे में बैठक हुई.

यह भी पढ़ें...

एनडीए का हिस्सा और सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर के विधायक अब्बास अंसारी की इस मुलाकात के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि अखिलेश यादव 2023 की क्रॉस वोटिंग का बदला लेने और अपने तीसरे उम्मीदवार को जिताने के लिए मजबूत आंकड़े जुटा रहे हैं.

एक घंटे की बंद कमरा बैठक और अंसारी परिवार का सपा कनेक्शन

लखनऊ स्थित सपा दफ्तर से बाहर निकलने के बाद अब्बास अंसारी ने मीडिया से कोई बातचीत नहीं की और सीधे निकल गए. लेकिन इस मुलाकात ने प्रदेश के सियासी गणित को गरमा दिया है. अब्बास अंसारी भले ही एनडीए में शामिल सुभासपा के टिकट पर विधायक बने थे. लेकिन उनका परिवार लंबे समय से सपा से जुड़ा रहा है.

अब्बास के चाचा अफजाल अंसारी सपा के सांसद हैं. जबकि चचेरे भाई शोएब अंसारी उर्फ मन्नू अंसारी सपा के विधायक हैं. ऐसे में राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले अखिलेश यादव और अब्बास अंसारी की इस मुलाकात को सीधे तौर पर ओम प्रकाश राजभर और एनडीए के खेमे में सेंधमारी के रूप में देखा जा रहा है.

राज्यसभा चुनाव का अंकगणित: 37 वोटों की दरकार

उत्तर प्रदेश विधानसभा में 7 सीटें खाली होने के चलते कुल 395 वोट पड़ेंगे. इस हिसाब से एक राज्यसभा प्रत्याशी को जीत दर्ज करने के लिए करीब 37 प्रथम वरीयता के वोटों की जरूरत होगी.

समाजवादी पार्टी का आंकड़ा: सपा के पास अपने 101 विधायक हैं जिससे उसकी दो सीटें आसानी से निकल जाती हैं और करीब 7 अतिरिक्त वोट बचते हैं.

एनडीए का गणित: बीजेपी और सहयोगी दलों को मिलाकर एनडीए का आंकड़ा 289 तक पहुंचता है. तीन निर्दलीय और राजा भैया की पार्टी (जनसत्ता दल) के दो विधायकों के समर्थन से यह संख्या 294 हो जाती है. हालांकि सुभासपा के दो विधायकों के सपा की ओर झुकाव के कारण एनडीए का वास्तविक आंकड़ा 292 के आसपास माना जा रहा है.

तीसरे प्रत्याशी पर सस्पेंस और 'वेट एंड वॉच' की रणनीति

अखिलेश यादव ने साफ कहा है कि जो लोग बीजेपी को हराने के लिए साथ आना चाहते हैं उन सभी का स्वागत है. वे असंतुष्टों और बागियों को भी साथ लाने के संकेत दे रहे हैं. हालांकि तीसरे उम्मीदवार के चयन को लेकर पेंच फंसा हुआ है.

सलीम शेरवानी का इनकार: पहले चर्चा थी कि सपा पूर्व सांसद सलीम शेरवानी को तीसरे प्रत्याशी के रूप में उतार सकती है. लेकिन नंबर पूरे न होने के कारण शेरवानी हारने वाले चुनाव में उतरने को तैयार नहीं दिख रहे हैं.

ये भी पढ़ें: नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद बढ़ी मुश्किलें, MP-MLA कोर्ट ने जारी किया गैर-जमानती वारंट, संपत्ति कुर्क करने के आदेश