उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है. इस बीच कांग्रेस यूपी में संगठन के स्तर पर बड़ा फेरबदल करने के लिए पूरी तरह तैयार है. पार्टी के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को पद से हटाया जाना लगभग तय माना जा रहा है. उनकी जगह रामपुर खास से विधायक आराधना मिश्रा 'मोना' को यूपी कांग्रेस की कमान सौंपी जा सकती है. पार्टी इस बार उत्तर प्रदेश में एक मजबूत सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूले के तहत ब्राह्मण-दलित-OBC-मुस्लिम गठजोड़ को साधने की रणनीति पर काम कर रही है.
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अजय राय की छुट्टी तय?
सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी उत्तर प्रदेश में संगठन पुनर्गठन की पूरी प्रक्रिया पर व्यक्तिगत रूप से नजर रख रहे हैं. राहुल गांधी ने हाल ही में अजय राय से व्यक्तिगत मुलाकात भी की है. ऐसे में जल्द ही प्रदेश अध्यक्ष के नाम की आधिकारिक घोषणा होने की संभावना है.
सोशल इंजीनियरिंग' का नया फॉर्मूला
कांग्रेस ने यूपी में सभी प्रमुख वर्गों को साधने के लिए संतुलन बनाने का फॉर्मूला तैयार किया है. ऐसी चर्चा है कि ब्राह्मण चेहरा आराधना मिश्रा को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिल सकती है. पार्टी तीन कार्यकारी अध्यक्षों की तैनाती करेगी जो मुस्लिम, दलित और ओबीसी (OBC) समाज का प्रतिनिधित्व करेंगे.
कार्यकारी अध्यक्ष पद की दौड़ में सांसद तनुज पुनिया, सांसद राकेश राठौर, देवेंद्र निषाद, दानिश अली और सुशील पासी का नाम सबसे आगे चल रहा है. दलित समुदाय से आने वाले वरिष्ठ नेता राजेंद्र पाल गौतम को पहले ही यूपी का प्रदेश प्रभारी बनाया जा चुका है.
कौन हैं आराधना मिश्रा 'मोना'?
आराधना मिश्रा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी की बेटी हैं. वे प्रतापगढ़ की रामपुर खास सीट से लगातार तीन बार की विधायक हैं. इससे पहले उनके पिता प्रमोद तिवारी इस सीट से लगातार 9 बार विधायक रहे हैं. पिछले 47 सालों से इस सीट पर तिवारी परिवार का दबदबा है.
पिछले दो दशकों से राजनीति में सक्रिय आराधना मिश्रा को प्रियंका गांधी वाड्रा का बेहद करीबी माना जाता है. उन्होंने 'लड़की हूं, लड़ सकती हूं' अभियान में प्रियंका गांधी के साथ प्रमुख भूमिका निभाई थी.
'ब्राह्मण-दलित' गठजोड़ पर कांग्रेस की नजर
कांग्रेस आलाकमान का मानना है कि उत्तर प्रदेश में पार्टी को फिर से मजबूत करने के लिए शीर्ष नेतृत्व में एक सशक्त ब्राह्मण चेहरे की सख्त जरूरत थी.
ब्राह्मण + दलित दांव: प्रभारी पद पर दलित नेता (राजेंद्र पाल गौतम) और अध्यक्ष पद पर ब्राह्मण चेहरे (आराधना मिश्रा) को लाकर पार्टी दलित-ब्राह्मण वोटबैंक को फिर से अपने पाले में लाने की कोशिश कर रही है.
इस फैसले के जरिए कांग्रेस यूपी की राजनीति में ब्राह्मण और दलित समाज के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने और राज्य में मौजूदा राजनीतिक समीकरणों को साधने की तैयारी में है.
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