यूपी Tak के खास शो 'आज का यूपी' में हम राज्य की तीन बड़ी खबरों का विश्लेषण करते हैं. आज के इस एपिसोड में पहली बड़ी खबर समाजवादी पार्टी के भीतर तीसरे राज्यसभा उम्मीदवार को लेकर गहराए संकट और सलीम शेरवानी द्वारा चुनाव लड़ने से किए गए साफ इनकार की है. दूसरी बड़ी खबर राज्यसभा चुनाव के लिए बीजेपी की कोर कमेटी बैठक और आठवीं सीट पर कब्जा जमाने के लिए पार्टी के सियासी गणित से जुड़ी है. वहीं तीसरी बड़ी खबर में पूर्व सांसद आजम खान की पत्नी तंजीम फातिमा और अखिलेश यादव के बीच हुई डेढ़ घंटे की मैराथन मुलाकात की इनसाइड स्टोरी शामिल है जो आगामी चुनावों में टिकट बंटवारे के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है.
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राज्यसभा का तीसरा उम्मीदवार कौन?
राज्यसभा चुनाव में तीसरे उम्मीदवार को उतारने को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के सामने बड़ा धर्मसंकट खड़ा हो गया है. पार्टी के वरिष्ठ नेता और पांच बार के सांसद रहे सलीम शेरवानी का नाम दावेदारों में सबसे आगे चल रहा था. लेकिन अचानक सरप्राइज उम्मीदवार धनंजय नाथवानी (या धनराज नाथवानी) की चर्चा के बाद समीकरण बदल गए.
सलीम शेरवानी ने अखिलेश यादव से मुलाकात कर साफ कर दिया है कि वह हारने के लिए चुनाव नहीं लड़ेंगे. उनकी स्पष्ट शर्त है कि यदि समाजवादी पार्टी के पास प्रथम वरीयता के पूरे 37 विधायकों का आंकड़ा होगा, तभी वह मैदान में उतरेंगे. मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक, सपा के पास इस संख्या बल को पूरा करने के लिए करीब आधा दर्जन (6) विधायकों की कमी पड़ रही है.
सपा के सामने मुख्य चुनौतियां और सियासी समीकरण
रिस्क लेने वाले चेहरे की तलाश: सलीम शेरवानी के लगभग पीछे हटने के बाद सपा अब ऐसे उम्मीदवार की तलाश में है जो हार-जीत की परवाह किए बिना चुनाव लड़ने का जोखिम उठा सके.
मुस्लिम उम्मीदवार पर धर्मसंकट: यदि किसी मुस्लिम नेता को तीसरे प्रत्याशी के तौर पर उतारा जाता है और वह चुनाव हार जाता है, तो चुनाव से ठीक पहले एक नकारात्मक नैरेटिव बनने का डर है.
क्रॉस वोटिंग का गणित: सपा की नजरें एनडीए के असंतुष्ट विधायकों या बीजेपी के उन विधायकों पर टिकी हैं जिनके टिकट कटने की आशंका है. इसके अलावा अखिलेश यादव ने सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर को भी पार्टी में वापस लाने के लिए खुला ऑफर दिया है.
अखिलेश यादव ने 3 और 4 तारीख को कई प्रमुख नेताओं को चर्चा के लिए बुलाया है, जिसके बाद ही तीसरे उम्मीदवार के नाम पर अंतिम फैसला होने की संभावना है.
8वीं सीट पर बीजेपी की नजर
उत्तर प्रदेश की आठवीं राज्यसभा सीट पर जीत दर्ज करने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपनी व्यूहरचना तेज कर दी है. लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दोनों उपमुख्यमंत्रियों (केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक), प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े और संगठन के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी में बीजेपी कोर कमेटी की अहम बैठक संपन्न हुई.
बीजेपी का गणित और संभावित चेहरे
आठवीं सीट जीतने की रणनीति: यदि एनडीए अपने सभी विधायकों को एकजुट रखने में कामयाब रहता है और विरोधी खेमे में कोई सेंधमारी नहीं होती तो बीजेपी अपनी आठवीं सीट आसानी से निकाल लेगी. दूसरी वरीयता के वोटों के मामले में बीजेपी विपक्षी खेमे से काफी आगे है.
संभावित नाम: केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा जैसे पुराने चेहरों को दोबारा मौका मिलना लगभग तय माना जा रहा है. इसके साथ ही सूची में कुछ नए और चौंकाने वाले नाम भी शामिल हो सकते हैं.
सूची की घोषणा: माना जा रहा है कि कोर कमेटी की बैठक में राज्य स्तर से नामों का पैनल तैयार कर केंद्रीय चुनाव समिति को भेज दिया गया है. पार्टी 4 या 5 तारीख तक अपने उम्मीदवारों की आधिकारिक सूची जारी कर सकती है.
आजम खान की पत्नी तंजीम फातिमा ने अखिलेश यादव से की मुलाकात
राज्यसभा चुनाव की गहमागहमी के बीच रामपुर के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री आजम खान की पत्नी तंजीम फातिमा ने लखनऊ में सपा प्रमुख अखिलेश यादव से मुलाकात की. बंद कमरे में करीब डेढ़ घंटे तक चली यह बातचीत प्रदेश की सियासत में खासी चर्चा का विषय बनी हुई है.
मुलाकात के प्रमुख सियासी मायने:
जेल से आया सीधा संदेश: चूंकि आजम खान, तंजीम फातिमा और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम सजायाफ्ता होने के कारण खुद चुनाव नहीं लड़ सकते, इसलिए यह माना जा रहा है कि तंजीम फातिमा जेल से आजम खान का महत्वपूर्ण संदेश लेकर पहुंची थीं.
मुरादाबाद मंडल और टिकटों का कोटा: आजम खान हमेशा से अपने समर्थकों के लिए पार्टी में सीटें तय कराते रहे हैं. मुरादाबाद मंडल सहित पश्चिमी यूपी की कई प्रमुख सीटों पर अपने पसंदीदा उम्मीदवारों को टिकट दिलाने के लिए यह सूची अखिलेश यादव को सौंपी गई है.
अखिलेश का 'जीताऊ' फॉर्मूला: सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस बार चुनाव में सिर्फ 'जीतने योग्य' (Winable) उम्मीदवारों को ही टिकट देने का मापदंड तय किया है. ऐसे में आजम खान के कोटे के दावेदारों और अखिलेश यादव के जीत वाले फॉर्मूले के बीच संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती होगी.
राज्यसभा चुनाव और आने वाले विधानसभा चुनाव के समीकरणों को देखते हुए अखिलेश यादव और तंजीम फातिमा के बीच हुई इस पहली सीधी बातचीत को समाजवादी पार्टी के अंदरूनी शक्ति-संतुलन के लिए बेहद निर्णायक माना जा रहा है.
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