उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक नई और बेहद दिलचस्प बहस छिड़ गई है. क्या भारतीय जनता पार्टी अब 'कमंडल' (धर्म की राजनीति) के साथ-साथ 'मंडल' (पिछड़ों की सियासत) को पूरी तरह अपने पाले में करने के लिए समाजवाद के सबसे बड़े प्रतीक पर दांव खेल रही है?
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यह सवाल तब हवा में तैरने लगा जब यूपी भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी राम मनोहर लोहिया के परिवार से मिलने उसके घर पहुंच गए. अब दूसरा सवाल यह भी कि जब राम मनोहर लोहिया ने कोई शादी ही नहीं की, उनका कोई अपना परिवार ही नहीं तो फिर किस परिवार से मिल लिए बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष?
आखिर कौन है वह परिवार जो बिल्कुल घर में समाजवादी की तरह समाजवाद रखता है यानी कि सारे भाई-बहन एक कपड़े में एक रंग में एक जूते में, क्या है इनका इतिहास? क्यों यह परिवार अपने आप को राम मनोहर लोहिया का वंशज कहता है और क्या सचमुच यह उनका वंशज है क्या उनके प्रपौत्र हैं
यूपी तक के कार्यक्रम 'आज का यूपी' में वरिष्ठ पत्रकार कुमार अभिषेक ने इस मुलाकात के पीछे की पूरी इनसाइड स्टोरी और उस तथाकथित 'लोहिया परिवार' की सच्चाई से पर्दा उठाया है.
डॉ. लोहिया का नहीं था कोई अपना परिवार
अगर हम इतिहास के पन्नों को पलटें और आधिकारिक दस्तावेजों को देखें तो सच ये है कि डॉ. राम मनोहर लोहिया ने कभी शादी नहीं की थी. उनके पारिवारिक इतिहास के मुताबिक, उनके दादा शिव नारायण जी के चार बेटे थे- गणेश नारायण, शंकर लाल, बाबूलाल और हीरालाल (जो लोहिया जी के पिता थे).
लोहिया जी के बाकी तीनों चाचाओं का देहांत जवानी में ही हो गया था और विष्णु दयाल जी (दादा के भाई) की आगे की संतति में भी कोई जीवित नहीं बचा.
रमा मित्रा जी से प्रेम संबंध
वैचारिक और व्यक्तिगत जीवन में लोहिया जी का श्रद्धेय रमा मित्रा जी के साथ एक प्रामाणिक प्रेम संबंध जरूर था, जो उनके सांसद रहने के दौरान उनके सरकारी आवास में भी रहती थीं. दोनों के प्रेम पत्रों पर एक किताब (लोहिया के पत्र रमा मित्रा के नाम) भी छपी है, लेकिन उनसे भी उनकी कोई संतान नहीं थी.
आज अंबेडकरनगर के अकबरपुर में डॉ. लोहिया का पैतृक घर पूरी तरह खंडहर हो चुका है और वहां कोई नहीं रहता. ऐसे में वंशानुगत रूप से उनका कोई भी पुत्र, पौत्र या प्रपौत्र इस दुनिया में मौजूद नहीं है.
राजाजीपुरम के 'लोहिया परिवार' का अनोखा समाजवाद
अब बात करते हैं लखनऊ के राजाजीपुरम में रहने वाले रमेश चंद्र लोहिया के उस परिवार की, जहां बीजेपी अध्यक्ष पहुंचे थे. यह परिवार खुद को डॉ. लोहिया का वंशज बताता है और घर के भीतर इनका अपना ही एक 'अनोखा समाजवाद' चलता है.
इस परिवार में पांच सगे भाई (पृथ्वीराज, हर्षवर्धन, राज्यवर्धन, नारायण, उदय प्रताप) और दो बहनें (ममता, नीलू) हैं. ये सभी भाई-बहन हमेशा बिल्कुल एक ही रंग, एक ही डिजाइन के कपड़े, सूट और एक ही रंग के जूते पहनते हैं. अगर कपड़ों का रंग बदलता है, तो पूरे परिवार का एक साथ बदलता है.
मेश चंद्र लोहिया का दावा रहा है कि वे डॉ. लोहिया के दत्तक पुत्र थे और उनके बच्चे लोहिया जी के प्रपौत्र हैं. हालांकि, सरकारी या ऐतिहासिक दस्तावेजों में इसका कोई आधिकारिक साक्ष्य या रिकॉर्ड दर्ज नहीं है.
"पीएम मोदी खुद फोन करते हैं..." परिवार का बड़ा दावा
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की इस मुलाकात के बाद परिवार के सदस्यों ने मीडिया के सामने एक ऐसा दावा कर दिया, जिसने सबको चौंका दिया. परिवार के सदस्यों का कहना है:
"हम लोग पूरे परिवार के साथ माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को मानते हैं. उनसे बरसों पुरानी हमारी जान-पहचान है. वे हमेशा हमारे टच में रहते हैं; कभी छह महीने में तो कभी साल भर में उनका फोन हमारे पास आ जाता है और वे हमारा हाल-चाल लेते हैं. पंकज चौधरी जी भी प्रधानमंत्री जी के कहने पर ही हमारे पिता जी का स्वास्थ्य जानने और मुलाकात करने आए थे."
सपा ने क्यों बना ली इस परिवार से 'ठीक-ठाक दूरी'?
जो समाजवादी पार्टी डॉ. राम मनोहर लोहिया को अपना सबसे बड़ा राजनैतिक आदर्श और गुरु मानती है, उसने इस परिवार से एक लंबी दूरी क्यों बना रखी है? इसके पीछे दो मुख्य वजहें बताई जाती हैं.
- आधिकारिक प्रमाण का न होना: मुलायम सिंह यादव या अखिलेश यादव ने कभी इस परिवार को तवज्जो नहीं दी, क्योंकि इनके वंशज होने का कोई पुख्ता सबूत नहीं है.
- दो दशक पुराना पुलिस विवाद: तकरीबन 20 साल पहले जब यह परिवार कानपुर के रावतपुर और कल्याणपुर इलाके में रहता था, तब इन पांचों भाइयों का पुलिस के एक सीओ (CO) के साथ मारपीट और बदतमीजी का गंभीर विवाद सामने आया था, जिस पर मुकदमे भी दर्ज हुए थे. इस विवाद के बाद से ही सपा ने इनसे पूरी तरह पल्ला झाड़ लिया था.
हालांकि, यह भी सच है कि लोहिया जी की मृत्यु के बाद महान नेता राजनारायण और जनेश्वर मिश्र ने इस परिवार को काफी सहारा दिया था. जनेश्वर मिश्र ने तो इनकी बेटी नीलू लोहिया को अपनी पुत्री की तरह स्नेह और सम्मान दिया था, शायद इसी जुड़ाव के कारण यह परिवार खुद को लोहिया जी के करीब बताता है.
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