OP Rajbhar on Panchayat Chunav: पंचायत चुनाव की तारीखों का इंतजार कर रहे लोगों के लिए बड़ी खबर सामने आई है. बीते कई हफ्तों से चल रही चुनाव टलने की अटकलों पर विराम लगाते हुए योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने चुनावी बिगुल फूंक दिया है. मीडिया से बात करते हुए ओपी राजभर ने ये साफ कर दिया है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और यूजीसी नियमों जैसे विवादों का चुनाव पर कोई असर नहीं पड़ेगा और पंचायत चुनाव अपने निर्धारित समय पर ही संपन्न होंगे.राज्य निर्वाचन आयोग इस प्रक्रिया में सक्रिय रूप से लगा हुआ है.
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कब होंगे पंचायत चुनाव
हाथरस में एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए पंचायती राज मंत्री ओपी राजभर ने बताया कि चुनाव आयोग और प्रशासन पूरी तरह से तैयार है.उन्होंने तैयारियों का ब्यौरा देते हुए कहा कि चुनाव के लिए जरूरी बैलेट पेपर्स जिलों में पहुंचा दिए गए हैं. वहीं वोटर लिस्ट के प्रकाशन की प्रक्रिया जारी है. मार्च 2026 में मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन कर दिया जाएगा.ओपी राजभर के अनुसार अप्रैल और मई के महीनों में चुनाव प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी.
इन वजहों से टलेगा पंचायत चुनाव
चुनाव टलने की एक वजह जनगणना को भी माना जा रहा था जिस पर मंत्री ने स्थिति साफ करते हुए कहा कि जनगणना का कार्य 2027 में होना तय हुआ है. ऐसे में इसका वर्तमान पंचायत चुनावों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. वहीं देश यूजीसी के नए नियमों पर प्रतिक्रिया देते हुए राजभर ने कहा कि 'यह कोई बहुत बड़ा मामला नहीं है और इससे किसी का कोई नुकसान नहीं होने वाला है.यह कानून संविधान के दायरे में रहकर समानता लाने के उद्देश्य से लाया गया है.' साथ ही उन्होंने ये भी काहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला आएगा वह हर किसी तो मानना होगा.
आरक्षण की सूची पर टिकी सबकी निगाहें
पंचायत चुनाव में सबसे बड़ा पेंच आरक्षण सूची को लेकर फंसता है. अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि कौन सी सीट एससी-एसटी (SC-ST) के लिए आरक्षित होगी,कहां ओबीसी उम्मीदवार होंगे और कौन सी सीट सामान्य रहेगी. इसी सूची के आधार पर तय होगा कि पुराने धुरंधर मैदान में उतर पाएंगे या नहीं. लोग अपनी-अपनी सीटों को मैनेज करने की जुगत में भी लगे हैं. भले ही सरकार अभी शांत दिख रही हो. लेकिन भाजपा,सपा, कांग्रेस और बसपा जैसे दल जमीनी स्तर पर सक्रिय हैं. प्रत्याशी टिकट के लिए पार्टियों के चक्कर काट रहे हैं और गांवों में बैठकों का दौर शुरू हो चुका है. मौजूदा प्रधानों और नए दावेदारों के बीच खर्चे और हिसाब-किताब की होड़ मची है.
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