उत्तर प्रदेश की राजनीति और समसामयिक विषयों पर आधारित यूपी Tak का खास शो 'आज का यूपी' हाजिर है. इसमें हम राज्य की तीन बड़ी खबरों का विश्लेषण करते हैं. आज की पहली बड़ी खबर गोरखपुर के सांसद रवि किशन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच मंच पर होने वाली हंसी-ठिठोली पर छिड़ी सियासी जंग के बारे में है, जिसे अखिलेश यादव ने विदूषक का खेल करार दिया है. दूसरी खबर, रवि किशन को लेकर मुख्यमंत्री के उन बयानों के पीछे छिपे गंभीर राजनीतिक संकेतों पर आधारित है, जिसमें उन्होंने मजाकिया अंदाज में ही सही लेकिन सांसद से छुट्टी मिलने और 2029 में महिला उम्मीदवार की बात कही है. वहीं, तीसरी खबर अखिलेश यादव की गोरखपुर रणनीति पर केंद्रित है, जहां वे रवि किशन के बहाने मुख्यमंत्री की घेराबंदी कर रहे हैं.
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सांसद या खिलौना? रवि किशन पर अखिलेश यादव का तीखा हमला
यूपी के सियासी गलियारों में इन दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सांसद रवि किशन के बीच के रिश्तों पर चर्चा गर्म है. अक्सर देखा गया है कि गोरखपुर के सार्वजनिक मंचों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, रवि किशन के साथ खूब चुटकी लेते हैं और ठिठोली करते हैं. रवि किशन इसे एक संत का आनंद और मुख्यमंत्री का स्ट्रेस बस्टर बताते हैं.
हालांकि, समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे जनप्रतिनिधि का अपमान बताया है. अखिलेश ने एक्स (ट्विटर) पर पोस्ट कर लिखा कि “सांसद जनता का प्रतिनिधि होता है, मुख्यमंत्री का खिलौना नहीं.” उन्होंने भाजपा सरकार पर तंज कसते हुए पूछा कि यह सरकार है या सर्कस, जहां लोग 'विदूषक-विदूषक' का खेल खेल रहे हैं. अखिलेश का तर्क है कि जब प्रदेश की जनता दुखों से जूझ रही है, तब मुख्यमंत्री और सांसद मनोरंजन में व्यस्त हैं.
'जनता चाहती है छुट्टी'- मुख्यमंत्री के मजाक के पीछे गंभीर संकेत?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और रवि किशन का रिश्ता पुराना है. मुख्यमंत्री ने ही अपनी पारंपरिक सीट रवि किशन को देकर उन्हें सांसद बनाया था, लेकिन मंच से वे अक्सर उन्हें आईना भी दिखाते रहे हैं. हाल ही में एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने हंसते हुए कहा, "लोग चाहते हैं कि अब रवि किशन से छुट्टी मिल जाए." उन्होंने आगे संकेत दिया कि 2029 के चुनाव में इस सीट पर कोई महिला दावेदार हो सकती है.
यही नहीं, मुख्यमंत्री ने रवि किशन के घर के नाले पर बने होने की बात हो या उनके नाचने-गाने की कला, हर मुद्दे पर मंच से चुटकी ली है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री की इन बातों को सिर्फ हंसी-ठिठोली तक सीमित नहीं रखा जा सकता. यह रवि किशन के लिए एक परोक्ष चेतावनी भी हो सकती है कि उन्हें एक कलाकार से अधिक एक सक्रिय सियासतदान के तौर पर जनता और कार्यकर्ताओं के बीच समय बिताना होगा.
गोरखपुर पर अखिलेश की नजर: रवि किशन के बहाने योगी की घेराबंदी
अखिलेश यादव का हालिया ट्वीट सिर्फ एक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. गोरखपुर मुख्यमंत्री का गढ़ है और रवि किशन वहां के ब्राह्मण चेहरे के तौर पर जाने जाते हैं. अखिलेश अब रवि किशन के पुराने बयानों (जैसे खुद को स्ट्रेस बस्टर बताना) को मुद्दा बनाकर यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि भाजपा में जनप्रतिनिधियों की हैसियत मात्र मनोरंजन करने वाले 'विदूषक' की रह गई है.
अखिलेश यादव यह जताने की कोशिश कर रहे हैं कि गोरखपुर की राजनैतिक छवि इस तरह के व्यवहार से प्रभावित हो रही है. एक तरफ जहां रवि किशन को संसद में सबसे ज्यादा सवाल पूछने के लिए सांसद रत्न से नवाजा गया है, वहीं दूसरी तरफ गृह जनपद में मुख्यमंत्री की टिप्पणियां उनकी छवि पर सवालिया निशान लगा रही हैं. देखना दिलचस्प होगा कि क्या अखिलेश यादव का यह विदूषक वाला वार गोरखपुर के सियासी समीकरणों को प्रभावित कर पाता है.
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