गोरखपुर-फैजाबाद स्नातक/शिक्षक विधान परिषद (MLC) चुनाव से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर घमासान मच गया है. चार बार के एमएलसी और वरिष्ठ नेता देवेंद्र प्रताप सिंह की एक हस्तलिखित चिट्ठी ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में हड़कंप मचा दिया है. हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान मंच पर स्थान न मिलने और कथित अपमान से आहत होकर उन्होंने शिक्षकों और युवाओं से 23 अक्टूबर को होने वाले चुनाव में अपने 'अन्याय और अपमान' के खिलाफ सशक्त जनादेश देने की अपील की है. इस बगावती तेवर से बीजेपी के समीकरण बिगड़ सकते हैं और इसका सीधा लाभ समाजवादी पार्टी समर्थित प्रत्याशी को मिलने की अटकलें तेज हो गई हैं.
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गोरखपुर-फैजाबाद सीट पर बीजेपी के समीकरण और अंदरूनी कलह
इस सीट से बीजेपी ने मौजूदा एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी को अपना उम्मीदवार बनाया है. ध्रुव त्रिपाठी पहले शिक्षक संघ से जुड़े रहे हैं. टिकट की रेस में शामिल संजयन त्रिपाठी इसके चलते नाराज हो गए और बाद में उन्होंने समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया, जिससे सपा ने उन्हें अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया.
देवेंद्र प्रताप सिंह का बगावती पत्र
अब चार बार के एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह का एक इमोशनल हस्तलिखित पत्र वायरल हो रहा है. उनका आरोप है कि पार्टी के एक कार्यक्रम में उन्हें मंच पर जगह न देकर अपमानित किया गया. अपनी चिट्ठी में उन्होंने लिखा कि उनके न्याय के संघर्ष को अपमानित किया गया है. उन्होंने शिक्षकों और प्रतियोगी नौजवानों से अपील की है कि वे इस 'अन्याय और अपमान' के खिलाफ 23 अक्टूबर को होने वाले चुनाव में एकजुट होकर जवाब दें.
बीजेपी का पक्ष और बचाव
बीजेपी प्रवक्ता और विधायक शलभ मणि त्रिपाठी ने इन खबरों का खंडन किया है. उनका कहना है कि लोग 'बिटवीन द लाइंस' (लाइनों के बीच का अर्थ) निकालकर भ्रम फैला रहे हैं.
बीजेपी नेताओं का तर्क है कि देवेंद्र प्रताप सिंह के वायरल पत्र में किसी का नाम नहीं लिखा है और वे एक राष्ट्रवादी व वरिष्ठ नेता हैं. पार्टी का दावा है कि ध्रुव कुमार त्रिपाठी रिकॉर्ड मतों से यह चुनाव जीतने जा रहे हैं और शिक्षक समुदाय पूरी तरह से बीजेपी के साथ है.
MLC चुनावों का राजनीतिक गणित और पूर्वांचल की जंग
राज्य में 11 एमएलसी सीटों पर 23 अक्टूबर को मतदान होना है जिसके परिणाम 26 अक्टूबर को आएंगे. इनमें से 7 सीटों पर बीजेपी पहले से काबिज है जबकि 2 सीटों पर समाजवादी पार्टी (वाराणसी स्नातक और शिक्षक सीट) का कब्जा रहा है.
गोरखपुर-फैजाबाद और मेरठ जैसी सीटों पर शिक्षक संघ के समीकरण और नेताओं की नाराजगी चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकती है. बीजेपी के भीतर टिकट और मंच पर अपमान को लेकर उठी बगावत के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि पूर्वांचल की इस हॉट सीट पर बाजी किसके हाथ लगती है.
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