सहारनपुर में सपा-कांग्रेस की आपस की लड़ाई किसे पड़ेगी भारी? पत्रकारों से समझिए

राहुल कुमार

• 04:19 PM • 21 Oct 2026

सहारनपुर की सात विधानसभा सीटों पर 2027 चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज है. बीजेपी का दबदबा, इमरान मसूद का प्रभाव, सपा-कांग्रेस गठबंधन और बसपा की रणनीति चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है. जानिए जिले का पूरा राजनीतिक गणित.

Imran Masood and Akhilesh Yadav

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उत्तर प्रदेश की राजनीति में पश्चिम उत्तर प्रदेश के द्वार कहे जाने वाले सहारनपुर जिले का सियासी महत्व बेहद खास रहा है. इसी धरती ने प्रदेश को मुख्यमंत्री से लेकर बड़े राजनीतिक घराने और सांसद दिए हैं. वर्तमान में सहारनपुर की 7 विधानसभा सीटों में से 5 पर भारतीय जनता पार्टी का कब्जा है जबकि 2 सीटों पर समाजवादी पार्टी (SP) के विधायक हैं. आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर 'यूपी तक' के खास शो में स्थानीय पत्रकारों और विश्लेषकों ने जिले की सभी सातों सीटों के समीकरण, दलों की तैयारियों और जनता के मूड का जमीनी जायजा लिया है.

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सहारनपुर की सात विधानसभा सीटों का वर्तमान गणित

भाजपा का दबदबा: जिले की 5 सीटों पर भाजपा और उसके गठबंधन का प्रभाव है जिसमें देवबंद सीट से पीडब्ल्यूडी राज्य मंत्री कुंवर बृजेश, गंगो से कीरत चौधरी, नकुड़ से मुकेश चौधरी और रामपुर मनिहारन से देवेंद्र नीम जैसे नेता शामिल हैं.

सपा और अन्य दल: वर्तमान में दो सीटों पर सपा के विधायक हैं. वहीं बहुजन समाज पार्टी (BSP) भी बेहट से रोहित राणा और सहारनपुर देहात से फिरोज आफताब जैसे प्रत्याशियों/प्रभारियों को मैदान में उतारकर मुकाबले को त्रिकोणीय और कड़ा बनाने की कोशिश कर रही है.

कांग्रेस-सपा गठबंधन और इमरान मसूद का फैक्टर

इमरान मसूद की भूमिका: कांग्रेस नेता और मौजूदा सांसद इमरान मसूद को पार्टी का वर्किंग प्रेसिडेंट (कार्यकारी अध्यक्ष) बनाए जाने के बाद पश्चिम उत्तर प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है. मुस्लिम मतदाताओं और गुर्जर बहुल क्षेत्रों में उनका अच्छा खासा प्रभाव माना जाता है.

सीट शेयरिंग की चुनौती: पत्रकारों के अनुसार अगर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीटों का बंटवारा सुचारू रूप से नहीं हुआ और दोनों दल अलग-अलग मैदान में उतरे तो वोटों के विभाजन का सीधा फायदा भारतीय जनता पार्टी को मिल सकता है. गठबंधन की एकजुटता ही तय करेगी कि विपक्षी दल भाजपा के किले में सेंध लगा पाएंगे या नहीं.

विकास कार्य बनाम स्थानीय मुद्दे

भाजपा का विकास एजेंडा: सरकार द्वारा मां शाकुंबरी देवी विश्वविद्यालय के निर्माण, फोरलेन व एलिवेटेड सड़क परियोजनाओं और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों को जनता के बीच प्रमुखता से रखा जा रहा है.

भीतरी कलह और चुनौतियां: दूसरी ओर विभिन्न दलों के भीतर टिकट की दावेदारी को लेकर मचे घमासान और नेताओं के आपसी मतभेदों को पाटना भी सभी दलों के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होगा.

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