लोहा लोहे को काटता है... 'लाल टोपी वाले रावण' के पोस्टर पर अखिलेश यादव ने दिया भाजपा यूपी चीफ पंकज चौधरी को जवाब!
उत्तर प्रदेश की सियासत में AI वीडियो को लेकर बीजेपी और सपा आमने-सामने हैं. पंकज चौधरी के वीडियो पर अखिलेश यादव ने पलटवार किया. जानिए कैसे यूपी चुनाव से पहले AI और सोशल मीडिया वॉर राजनीतिक लड़ाई का नया हथियार बन रही है.
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उत्तर प्रदेश की राजनीति में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल अब अनौपचारिक सोशल मीडिया हैंडल्स से निकलकर सीधे मुख्यधारा के नेताओं तक पहुंच गया है. इसे यूपी की सियासत का 'थर्ड वर्ल्ड वॉर' कहा जा रहा है. हाल ही में विजय दशमी के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी द्वारा शेयर किए गए एक AI-जनरेटेड वीडियो ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है. इस वीडियो में समाजवादी पार्टी पर तीखे सियासी तीर चलाए गए जिसके बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि 'लोहा लोहे को काटता है.'
पंकज चौधरी का विवादित AI वीडियो और निशाने पर सपा
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने विजय दशमी की बधाई देते हुए एक AI-जनरेटेड वीडियो पोस्ट किया. इसमें एक रावण दिखाया गया है जिसने सफेद कुर्ता-पायजामा और सिर पर लाल टोपी पहन रखी है जो कि सीधे तौर पर समाजवादी पार्टी के प्रतीकों की ओर इशारा करता है. वीडियो में भगवान श्रीराम के तीर बेरोजगारी, महिला सुरक्षा, तुष्टीकरण और आतंकवाद जैसे गंभीर मुद्दों पर निशाना साधते हुए दिखाए गए हैं.
अखिलेश यादव का तीखा पलटवार
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस वीडियो पर कड़ा ऐतराज जताते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस में तीखा हमला बोला. अखिलेश ने कहा कि वे सुबह उठे और उन्होंने बीजेपी नेता का यह वीडियो देखा. उनके मुताबिक, AI का इस्तेमाल अच्छाई के लिए होना चाहिए. लेकिन बीजेपी इसका उपयोग 'बुराई' फैलाने के लिए कर रही है. अखिलेश ने कहा कि उनके कार्यकर्ताओं ने भी जवाब में एक AI वीडियो बनाकर भेज दिया है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा 'जो जिस भाषा में मानेगा, उसे वैसा ही जवाब देंगे... लोहा लोहे को काटता है.'
इस दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि जो समाजवाद है, वही राम राज्य है और जो राम राज्य है, वही समाजवाद है. दूसरों का सम्मान करने वाले और न्याय दिलाने वाले ही असली सनातनी हैं.
यूपी चुनाव में बढ़ता AI और सोशल मीडिया वॉर
अब तक AI वीडियोज़ केवल अनऑफिशियल आईटी सेल या फेक पेजेस के जरिए सामने आते थे. लेकिन अब पार्टी के शीर्ष नेताओं और ऑफिशियल हैंडल्स ने भी इस ट्रेंड को अपना लिया है. इन वीडियोज की क्वालिटी अब बेहद प्रीमियम हो गई है जिसमें नेताओं के हूबहू चेहरे और आवाजें देखने-सुनने को मिल रही हैं. एक तरफ जहां राम मंदिर चंदा चोरी और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर सरकार को घेरा जा रहा है. वहीं दूसरी तरफ गुंडाराज और परिवारवाद को लेकर सपा पर हमले किए जा रहे हैं.
यह डिजिटल वॉर अब केवल राज्य स्तर तक सीमित नहीं रहा बल्कि विधानसभा स्तर पर भी अलग-अलग पार्टियों की आईटी सेल्स द्वारा ऐसे कंटेंट धड़ल्ले से तैयार किए जा रहे हैं. आने वाले चुनावों में इसका असर और अधिक गहरा होने की आशंका है.
