गाजीपुर की मोहम्मदाबाद सीट पर सपा-भाजपा में कड़ी टक्कर, क्या कहते हैं समीकरण

विनय कुमार सिंह

• 04:02 PM • 21 Oct 2026

गाजीपुर की मोहम्मदाबाद विधानसभा सीट पर 2027 चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज है. शोएब अंसारी, बीजेपी और बदलते जातीय समीकरण मुकाबले को दिलचस्प बना सकते हैं. जानिए अंसारी परिवार का राजनीतिक इतिहास और संभावित त्रिकोणीय मुकाबले के मायने.

Akhilesh Yadav and CM Yogi

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गाजीपुर जिले की मोहम्मदाबाद विधानसभा सीट उत्तर प्रदेश की उन हाई-प्रोफाइल सीटों में शुमार है जहां विकास के मुद्दों से ज्यादा सामंतवाद, जातीय समीकरण और बाहुबल की चर्चाएं हावी रहती हैं. यह सीट कुख्यात माफिया डॉन मुख्तार अंसारी का पैतृक गढ़ रही है जहां उनके बड़े भाई अफजाल अंसारी ने 1985 से 1996 तक पांच बार जीत दर्ज की. वर्तमान में इस सीट पर समाजवादी पार्टी (सपा) से मुख्तार अंसारी के पोते शोएब अंसारी (मन्नू अंसारी) विधायक हैं. आगामी चुनावों को लेकर इस सीट पर एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है.

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सीट का राजनीतिक इतिहास और अंसारी परिवार का दबदबा

चुनावी इतिहास: साल 2002 में बीजेपी के कृष्णानंद राय ने अफजाल अंसारी को हराया था. लेकिन 2005 में उनकी हत्या के बाद हुए उपचुनाव में उनकी पत्नी अलका राय विधायक बनीं. साल 2017 में अलका राय ने फिर जीत हासिल की, जबकि 2022 के चुनाव में सपा के टिकट पर मैदान में उतरे शोएब अंसारी ने अलका राय को करीब 19000 वोटों से हराकर इस सीट पर कब्जा जमाया.

सपा विधायक का पक्ष: मौजूदा विधायक शोएब अंसारी का कहना है कि विपक्ष के विधायक होने के कारण सरकार उनकी नहीं सुनती और विकास फंड रोकने का प्रयास करती है. फिर भी वे जनता के सुख-दुख में हमेशा खड़े रहे हैं.

भाजपा का रुख: दूसरी ओर, बीजेपी जिलाध्यक्ष ओम प्रकाश राय का दावा है कि पार्टी ने पारदर्शी नीतियों और कानून व्यवस्था के दम पर काम किया है. उनका मानना है कि योगी सरकार में बाहुबल का कोई अस्तित्व नहीं है और आगामी चुनाव में भाजपा सभी सातों सीटों पर परचम लहराएगी.

मुख्य जातीय आंकड़े 

लगभग 3,83,000 कुल मतदाताओं वाली इस सीट पर विभिन्न जातियों की स्थिति इस प्रकार है.

भूमिहार: लगभग 95,750 से 1,14,900

ब्राह्मण, राजपूत, बनिया: लगभग 76,000 से 95,750

दलित: लगभग 57,450 से 65,110

मुस्लिम: लगभग 38,300 से 45,960

यादव: लगभग 30,640

अन्य: राजभर, बिंद, मल्लाह और निषाद जैसी अति पिछड़ी जातियां इस सीट पर निर्णायक भूमिका निभाती हैं।

विश्लेषकों की राय और त्रिकोणीय मुकाबले के आसार

माफिया बनाम सामंतवाद की बहस: स्थानीय पत्रकारों और जानकारों का मानना है कि इस सीट पर चुनाव विकास के मुद्दों पर नहीं बल्कि मुख्य रूप से 'सामंतवाद बनाम माफिया' की वैचारिक और राजनीतिक लड़ाई के इर्द-गिर्द घूमता है.

बदलते समीकरण: पिछले चुनाव में सुभासपा (ओम प्रकाश राजभर) का साथ मिलने से सपा को फायदा हुआ था. लेकिन इस बार राजभर के एनडीए के साथ होने से समीकरण बदल सकते हैं. इसके अलावा अतुल राय के परिवार की संभावित एंट्री से मुकाबला त्रिकोणीय होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे मोहम्मदाबाद का यह दंगल बेहद रोमांचक हो गया है.

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