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राजा भैया की कुंडा सीट पर क्या सोचते हैं ठाकुर, ब्राह्मण और पिछड़े? पत्रकारों ने बता दिया

यूपी के प्रतापगढ़ में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज है. कुंडा, बाबागंज और रामपुर खास में दिग्गजों का दबदबा, जबकि पट्टी, रानीगंज और विश्वनाथगंज में जातीय समीकरण और टिकट बदलाव मुकाबला दिलचस्प बना सकते हैं.

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File Photo: Raja Bhaiya
File Photo: Raja Bhaiya
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उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले की राजनीति हमेशा से राज्य के आम सियासी रुझानों से अलग और बेहद दिलचस्प रही है. आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर 'यूपी तक' के खास शो 'मूड क्या है' में प्रतापगढ़ के वरिष्ठ पत्रकारों और राजनीतिक विश्लेषकों ने जिले की सातों विधानसभा सीटों का जमीनी जायजा लिया है. चर्चा के मुताबिक, जहां कुंडा, बाबागंज और रामपुर खास जैसी सीटों पर दिग्गजों का दबदबा पूरी तरह बरकरार रहने की उम्मीद है. वहीं रानीगंज, विश्वनाथगंज और पट्टी जैसी सीटों पर टिकट बदलाव और जातिगत समीकरणों के चलते कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है.

पारंपरिक और सुरक्षित गढ़: कुंडा, बाबागंज और रामपुर खास

कुंडा और बाबागंज: जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के राष्ट्रीय अध्यक्ष रघुराज प्रताप सिंह (राजा भैया) का इन दोनों सीटों पर लंबे समय से एकछत्र राज है. पत्रकारों का मानना है कि यहां केवल क्षत्रिय मतदाताओं (जो कि संख्या में मात्र 14-15 हजार हैं) के भरोसे नहीं बल्कि सभी जातियों के समर्थन से राजा भैया का दबदबा कायम है और 2027 में भी इन सीटों पर परिणामों में बदलाव की कोई संभावना नहीं है.

रामपुर खास: कांग्रेस के दिग्गज नेता प्रमोद तिवारी की बेटी आराधना मिश्रा 'मोना' इस सीट से लगातार जीतती आ रही हैं. यहां समाजवादी पार्टी अपना उम्मीदवार नहीं उतारती और कांग्रेस का समर्थन करती है जिससे यह सीट भी उनके लिए सुरक्षित मानी जा रही है.

कांटे की टक्कर वाली सीटें: सदर, पट्टी, रानीगंज और विश्वनाथगंज

सदर विधानसभा: वर्तमान में यहां से बीजेपी के राजेंद्र मौर्य विधायक हैं. उनका विरोध बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन पार्टी संगठन स्तर पर टिकट बदलाव की चर्चाएं अक्सर चलती रहती हैं.

पट्टी विधानसभा: यह सीट समाजवादी पार्टी और बीजेपी के बीच पारंपरिक रूप से एक-एक बार अदला-बदली के इतिहास के लिए जानी जाती है. वर्तमान में सपा के राम सिंह पटेल यहां से विधायक हैं और 2027 में यहां फिर से बीजेपी और सपा के बीच कड़ी टक्कर होने की संभावना है.

रानीगंज और विश्वनाथगंज का फेरबदल

रानीगंज में मौजूदा सपा विधायक आर.के. वर्मा द्वारा सीट बदलकर विश्वनाथगंज से चुनाव लड़ने की चर्चाएं राजनीतिक गलियारों में तेज हैं.

विश्वनाथगंज सीट पर अपना दल (एस) के मौजूदा विधायक जीतलाल पटेल का टिकट कटने और नए चेरों (या आर.के. वर्मा के आने) की अटकलों से यहां पटेल बहुल समीकरणों पर आधारित दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल सकता है. बीजेपी की तरफ से भी रानीगंज में धीरज ओझा सहित कई दावेदार कतार में हैं.

प्रतापगढ़ की अनूठी राजनीतिक तासीर और जातिगत समीकरण

लहरों से बेअसर प्रतापगढ़: विश्लेषकों का मानना है कि प्रतापगढ़ का मतदाता बेहद जागरूक है और यहां प्रदेश या देश की सामान्य हवा के विपरीत स्थानीय समीकरणों और उम्मीदवारों के आधार पर वोटिंग होती है. कई बार बड़े-बड़े केंद्रीय और प्रांतीय मंत्री भी यहाँ चुनाव हार चुके हैं.

कुर्मी और अन्य जातियों का प्रभाव: जिले में कुर्मी मतदाता एकजुट होकर मतदान करते हैं, जिससे इस वर्ग के प्रत्याशियों को बढ़त मिलने की संभावना अधिक रहती है. इसके अलावा, सवर्ण और अन्य जातियों के बीच भी चुनावी रणनीतियों परवान चढ़ रही हैं.
 

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