यूपी के गाजियाबाद में हुए सूर्या चौहान हत्याकांड को लेकर सियासत गरमाई हुई है. एक तरफ पुलिस एक्शन और आरोपी असद के एनकाउंटर पर बहस चल रही है, तो दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर इस पूरे मामले में सपा प्रमुख अखिलेश यादव की चुप्पी चर्चा का विषय बनी हुई है.
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लोग सवाल पूछ रहे हैं कि हर छोटे-बड़े मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले अखिलेश यादव ने सूर्या चौहान की हत्या पर अब तक एक शब्द क्यों नहीं कहा? यह सवाल सिर्फ एक घटना तक सीमित नहीं है. पिछले एक हफ्ते में प्रदेश में कई ऐसी घटनाएं हुईं है जिसपर अखिलेश यादव की चुप्पी लोगों को अखर रही है. इसके बहाने अब अखिलेश के PDA यानी पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक मॉडल और उसकी राजनीतिक विश्वसनीयता पर भी बहस तेज हो गई है.
लोग आरोप लगा रहे हैं कि सपा का PDA हर मामले में एक जैसा नहीं दिखता. जब पीड़ित या आरोपी का सामाजिक समीकरण अलग होता है तो पार्टी का तेवर भी बदल जाता है. इसी आरोप के बीच अब 2013 का एक पुराना मामला फिर से चर्चा में है.
2013: जब कुंडा में हत्या हुई और मुख्यमंत्री रहते मौके पर पहुंच गए थे अखिलेश
साल 2013. प्रतापगढ़ के कुंडा इलाके का बलीपुर गांव. तत्कालीन ग्राम प्रधान नन्हे यादव की हत्या होती है. देखते ही देखते मामला हिंसा में बदल जाता है. नन्हे यादव के भाई सुरेश यादव और पुलिस उपाधीक्षक जिया उल हक की भी मौत हो जाती है. पूरा प्रदेश इस घटना से हिल जाता है. उस समय अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे. घटना के तुरंत बाद वह कुंडा पहुंचे. पीड़ित परिवारों से मुलाकात की, संवेदना जताई और प्रशासनिक कार्रवाई के साथ मदद का भरोसा दिया. अब विरोधी दल इसी घटना का हवाला देते हुए पूछ रहे हैं कि तब मुख्यमंत्री रहते तत्काल पहुंचने वाले अखिलेश यादव आज कई चर्चित मामलों पर चुप क्यों हैं?
अखलाक से गाजीपुर तक… क्यों चर्चा में हैं ये पुराने उदाहरण?
अखिलेश यादव की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए लोग दादरी के अखलाक मामले का जिक्र कर रहे हैं. साल 2015 में अखलाक की हत्या हुई थी. इसके बाद अखिलेश यादव ने पीड़ित परिवार के लिए 45 लाख की आर्थिक सहायता और कई फ्लैट का ऐलान किया था. हाल के महीनों में गाजीपुर में किशोरी की मौत का मामला सामने आया. आरोपी पक्ष को लेकर राजनीतिक बहस शुरू हुई तो समाजवादी पार्टी ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया. खुद अखिलेश यादव ने गाजीपुर जाने तक की घोषणा कर दी. इन तमाम घटनाओं का जिक्र कर लोग पूछ रहे हैं कि जिन घटनाओं में अखिलेश यादव को राजनीतिक या सामाजिक नैरेटिव बनाने का मौका दिखता है, वहां वो बेहद मुखर नजर आते हैं. लेकिन कई दूसरे मामलों में वही मुखरता दिखाई नहीं देती.
इन 5 घटनाओं पर चुप्पी ने खड़े किए सवाल
पिछले 5 दिनों में प्रदेश में 5 बड़ी घटनाएं हुई हैं. इसमें अमेठी से सपा विधायक महाराजी प्रजापति पर हमला, चंदौली में सपा की नेता गार्गी पटेल के साथ मारपीट, धनराज मौर्य की हत्या और राजभर की हत्या का मामला सुर्खियों में है. लेकिन इन तमाम मामलों पर अखिलेश यादव चुप हैं. क्योंकि इन सभी मामलों में आरोप एक जाति और एक धर्म के लोगों पर है. अखिलेश की इसी चुप्पी को लेकर लोग उनके पीडीए मॉडल पर सवाल खड़े कर रहे हैं. सबसे ज्यादा मुखरता से यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओपी राजभर इस मामले को उठा रहे हैं. उनका कहना है कि अखिलेश यादव के PDA का असली मतलब “पहला दावा अहिर” है. उनका आरोप है कि सपा का सामाजिक न्याय मॉडल सिर्फ नारे तक सीमित है, जबकि जमीन पर गैर-यादव ओबीसी और बहुजन समाज खुद को उपेक्षित महसूस करता है.
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