Opinion: यूपी में नितिन नबीन: तस्वीरें दे रही बड़ा संदेश, 2027 में तीसरी बार योगी सरकार

यूपी तक

• 11:29 AM • 05 Jul 2026

Opinion: भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन के लखनऊ दौरे ने 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों को नई धार दी. एनडीए की एकजुटता, जातीय समीकरण और संगठनात्मक रणनीति के बीच विपक्ष सीट बंटवारे और अंदरूनी कलह से जूझता नजर आ रहा है.

Nitin Nabin

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Opinion: भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन शनिवार को पहली बार लखनऊ पहुंचे. यह दौरा महज औपचारिक नहीं बल्कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की रणनीतिक तैयारी का स्पष्ट संकेत था. एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और अन्य नेताओं के साथ उनका भव्य स्वागत हुआ. इसके बाद रोड शो ने संगठनात्मक मजबूती का प्रदर्शन किया. इस यात्रा की सबसे महत्वपूर्ण तस्वीरें एनडीए सहयोगी दलों के साथ आईं, जिनमें सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के ओपी राजभर, अपना दल सोनेलाल की अनुप्रिया पटेल, निषाद पार्टी के संजय निषाद और राष्ट्रीय लोक दल के अनिल कुमार शामिल थे.

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ये तस्वीरें स्पष्ट संदेश दे रही हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की मजबूत चौकड़ी 2027 में तीसरी बार प्रचंड बहुमत हासिल करने के लिए पूरी तरह तैयार है. भाजपा की रणनीति संगठनात्मक विस्तार, जातीय समीकरणों का स्मार्ट प्रबंधन, विकास कार्यों को बूथ स्तर तक पहुंचाने और सहयोगी दलों को सम्मानजनक भागीदारी देकर गठबंधन को अटूट बनाए रखने पर आधारित है. उत्तर प्रदेश में भाजपा की सफलता 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में दिख चुकी है जहां पार्टी ने अकेले बहुमत हासिल किया.

योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में कानून-व्यवस्था की स्थिति सुधार, बड़े निवेश, एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, औद्योगिक पार्क और गरीब कल्याण योजनाओं ने राज्य का चेहरा बदल दिया है. नितिन नबीन की यात्रा के दौरान 41 बिंदुओं पर 25 विभिन्न जातियों द्वारा स्वागत कार्यक्रम ने भाजपा के जातीय समीकरणों पर फोकस को रेखांकित किया. एनडीए सहयोगी दलों को शामिल करके भाजपा ने ओबीसी, ईबीसी, गैर-यादव पिछड़ों और विशेष समुदायों जैसे निषाद, राजभर और कुर्मी तक अपनी पहुंच मजबूत की है. ओपी राजभर पूर्वांचल में राजभर वोटों को संभालते हैं, अनुप्रिया पटेल कुर्मी-कोइरी बेल्ट में, संजय निषाद नदी किनारे वाले इलाकों में और आरएलडी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाट-किसान वोटों में योगदान देते हैं. ये सभी दल एनडीए में मजबूती से खड़े हैं.

भाजपा की रणनीति बहुआयामी है जिसमें बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण और नई टीम का गठन शामिल है. डबल इंजन सरकार यानी केंद्र और राज्य की समन्वित कार्यशैली विकास को गति दे रही है. हिंदुत्व के साथ विकास और सामाजिक न्याय का समन्वय भाजपा को व्यापक अपील देता है. सहयोगी दलों को सीटें और सम्मान देकर गठबंधन को मजबूत रखना इस रणनीति का अहम हिस्सा है. नितिन नबीन की युवा ऊर्जा और अनुभवी नेतृत्व भाजपा को नई गति प्रदान करेगा.

आपस में ही लड़ता दिख रहा है विपक्ष

दूसरी ओर विपक्षी INDIA गठबंधन की तस्वीर पूरी तरह विपरीत है. कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीट बंटवारे पर खींचतान साफ दिख रही है. कांग्रेस जिसकी उत्तर प्रदेश में अपनी जमीन लगभग समाप्त हो चुकी है, 200 सीटें मांग रही है. नए प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने समानता और सम्मान की बात करते हुए बराबरी का दावा किया है. समाजवादी पार्टी मुख्य विपक्षी दल के रूप में अपनी हैसियत बनाए रखने के बावजूद चुप है. कारण स्पष्ट है कि अपनी पार्टी में बड़े पैमाने पर असंतोष और भगदड़ मची हुई है. कांग्रेस सपा नेताओं को तोड़कर अपनी पार्टी में शामिल कर रही है और ऐसे कार्यक्रमों की तस्वीरें जल्द ही सामने आने वाली हैं.

समाजवादी पार्टी के अंदरूनी कलह, टिकट बंटवारे का विवाद और कांग्रेस की मांग पर चुप्पी विपक्ष की कमजोरी को उजागर करती है. पिछले चुनावों में भी विपक्षी गठबंधन में सीट बंटवारे की लड़ाई और आपसी विश्वास की कमी दिखी थी. कांग्रेस की सीमित संगठनात्मक ताकत और समाजवादी पार्टी की परिवारवादी छवि विकास और शासन के मुद्दों पर भाजपा के मुकाबले में कमजोर पड़ती है. विपक्ष अभी भी सीटों के बंटवारे पर जूझ रहा है जबकि भाजपा पहले से ही 2027 की तैयारी में जुट चुकी है.

नितिन नबीन की यात्रा और एनडीए की दिखाई गई एकजुटता 2027 के नतीजों का स्पष्ट संकेत दे रही है. भाजपा विकास, सुरक्षा, और मोदी-योगी ब्रांड के सहारे मजबूत स्थिति में है. सहयोगी दल सामाजिक समीकरण संभाल रहे हैं. वहीं विपक्षी गठबंधन में सीट बंटवारे की लड़ाई, नेताओं की तोड़-फोड़ और आंतरिक अस्थिरता उन्हें कमजोर कर रही है. उत्तर प्रदेश की 403 सीटों पर यदि भाजपा-एनडीए एकजुट रहा और विपक्ष बंटा रहा तो तीसरी बार प्रचंड बहुमत की सरकार बनना स्वाभाविक लगता है. नितिन नबीन का यह दौरा सिर्फ स्वागत का नहीं बल्कि विजय रथ की घोषणा का भी था. यह यात्रा भविष्य की राजनीति की दिशा को साफ कर रही है जहां भाजपा की रणनीतिक एकजुटता और विकास कार्य विपक्ष की आंतरिक कलह पर भारी पड़ते नजर आ रहे हैं.

लेखक- डॉ. विनम्र सेन सिंह (इलाहाबाद विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं. राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर लेखन करते हैं.)