Opinion: माफिया राज से देश की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने तक! यूपी के कायाकल्प की इनसाइड स्टोरी

Opinion: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्षों के नेतृत्व और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के क्रियान्वयन ने उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदल दी. एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, निवेश, कानून-व्यवस्था और जनकल्याणकारी योजनाओं ने प्रदेश को नई विकास यात्रा पर अग्रसर किया है.

PM Modi and CM Yogi

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यूपी तक

13 Jun 2026 (अपडेटेड: 13 Jun 2026, 03:29 PM)

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Opinion: समाज के स्वप्न तब साकार होते हैं जब देश का नेतृत्व सशक्त, संकल्पित और उसकी दृष्टि लोक कल्याणकारी हो. आज जबकि प्रधानमंत्री के रूप में नरेन्द्र मोदी 12 साल पूरे कर चुके हैं और उन्होंने चुने हुए प्रधानमंत्रियों में पं. जवाहर लाल नेहरू के कार्यकाल को भी पीछे छोड़ दिया है तो उनकी दृष्टि को उत्तर प्रदेश के विकास के संदर्भ में देखना प्रासंगिक होगा. इसलिए कि यह प्रदेश नेहरू का भी रहा है और उनके बाद उनकी बेटी, प्रधानमंत्री रहीं इंदिरा गांधी का भी. यही वह प्रदेश है जिसे भारत के पुनर्निमाण की सबसे बड़ी प्रयोगशाला के रूप में सबसे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने देखा और इसीलिए यह राज्य हमेशा उनकी प्राथमिकता में रहा. आज जब यह प्रदेश देश की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है तो यह भी विचार करना होगा कि आखिर ऐसा पहले क्यों नहीं हुआ? क्या उत्तर प्रदेश में ऐसा नेतृत्व पहले नहीं था कि केंद्रीय नीतियों के साथ स्वयं को अंगीकार कर सके? यही वह बिंदु है जहां दूरदर्शी पीएम मोदी के साथ कर्मयोगी के रूप में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का चेहरा दिखाई देने लगता है.

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उत्तर प्रदेश सिर्फ एक राज्य भर नहीं है. यह भारत का सांस्कृतिक हृदय है, जनशक्ति का अक्षय स्रोत है. प्रधानमंत्री मोदी के मन में कोई संशय नहीं था कि इस राज्य में देश की आर्थिक धुरी बनने की पूरी क्षमता है और यदि यहां नितांत ईमानदारी से योजनाओं को मूर्त रूप दिया जाए तो ऐसा बड़ी सहजता से हो भी सकता है. 2014 में उन्होंने देश का नेतृत्व संभाला और तब से उत्तर प्रदेश में उनका विजन नीतियों, परियोजनाओं और प्राथमिकताओं में प्रतिबिंबित हो रहा है. 2017 में इस राज्य में योगी सरकार बनी और उसने पीएम मोदी की दृष्टि को विकासात्मक प्रतिबद्धता दी. कहने की बात नहीं कि केंद्र और राज्य की सरकारें जब एक दिशा में प्रयास करती हैं तो परिणाम न सिर्फ सकारात्मक होते हैं बल्कि लोक कल्याण को भी सही अर्थ मिलता है.  2017 के पहले के तीन साल राष्ट्रीय स्तर पर पीएम मोदी के ही नेतृत्व के थे. लेकिन तब राज्य में समाजवादी पार्टी की सरकार थी. यह कहने में कोई हिचक नहीं कि तब तत्कालीन मुख्यमंत्री ने केंद्र की योजनाओं को कोई महत्व नहीं दिया. उन योजनाओं को भी, जो सीधे तौर पर जनता के लिए लाभकारी थीं.

2017 में सत्ता में आने के बाद योगी आदित्यनाथ ने पीएम मोदी के विजन को नीतिगत दस्तावेज़ में नहीं बल्कि जन-जन के जीवन में उतारा. सीएम योगी ने उनके विजन को मिशन बनाया और अनवरत, अथक और अविचल रहे. दोनों के बीच का यह वैचारिक तालमेल विकास की गाथाओं में कभी लिखा जाएगा. केंद्र की योजना और राज्य का क्रियान्वयन, यह समन्वय सहजता और निष्ठा का है जिसके परिणाम अपेक्षित ही नहीं, असाधारण हैं. कैसे हैं, इसके लिए पुराने पन्ने पलटने होंगे. 2017 से पहले उत्तर प्रदेश की स्थिति पर गौर करना होगा. माफिया राज, जातीय हिंसा, उद्योगों का पलायन, किसानों की दुर्दशा और सड़कों का अभाव, यह उस समय राज्य की तस्वीर थी. निवेशक यहां आने से कतराते थे, प्रतिभाएं यहां से भागती थीं और आम नागरिक असुरक्षा की छाया में जीता था. प्रधानमंत्री मोदी का विजन था कि उत्तर प्रदेश को इस स्थिति से उबारा जाए. मुख्यमंत्री योगी ने इसे मिशन बनाया. कानून का राज स्थापित हुआ, अपराधियों पर शिकंजा कसा और प्रदेश ने एक नई सांस ली. विकास के लिए सुरक्षा पहली शर्त है, यह सिद्धांत यहां व्यवहार में सिद्ध हुआ.

प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले वर्षों में उत्तर प्रदेश की दर्जनों यात्राएं कीं और हर बार एक नई परियोजना, एक नई संभावना, एक नया संकल्प इस धरती को समर्पित किया. काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर का लोकार्पण उनमें एक बड़ा भावनात्मक क्षण था. दिसंबर 2021 में जब प्रधानमंत्री ने इस दिव्य परिसर को राष्ट्र को समर्पित किया, तो यह भारत की सनातन आत्मा की पुनः प्रतिष्ठा थी, सभ्यतागत पुनर्जागरण था. जनवरी 2024 में अयोध्या में श्रीराम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा, जिसकी प्रतीक्षा शताब्दियों ने की थीय अयोध्या आज एक आधुनिक तीर्थ नगरी के रूप में विकसित हो रही हैय महर्षि वाल्मीकि अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, चौड़ी सड़कें, नवनिर्मित घाट, आधुनिक होटल और पर्यटन अवसंरचना, यह सब उस समग्र दृष्टि का हिस्सा है जिसमें आस्था और अर्थव्यवस्था साथ-साथ चलते हैंय वृंदावन, मथुरा और विंध्यधाम को भी इसी श्रेणी में रखा जाएगा.

इन्फास्ट्रक्चर के मोर्चे पर उत्तर प्रदेश में जो क्रांति आई है, यह अभूतपूर्व है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की संकल्पना के बिना यह संभव नहीं था. पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे, इन राजमार्गों ने न केवल दूरियां घटाईं, बल्कि उपेक्षित अंचलों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा. पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने वायुसेना के विमान की लैंडिंग कराकर स्पष्ट संदेश दिया कि यह सड़क केवल यातायात के लिए नहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से भी एक रणनीतिक संपत्ति है. लखनऊ मेट्रो का विस्तार, कानपुर मेट्रो और आगरा मेट्रो का शुभारंभ, इन परियोजनाओं ने प्रदेश में आधुनिक शहरी परिवहन की स्थापना की. गोरखपुर में एम्स और अन्य बड़े चिकित्सा संस्थानों की स्थापना ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में उस रिक्तता को भरा जो वर्षों से बनी हुई थी.


पीएम मोदी की प्रेरणा से उत्तर प्रदेश को कुशीनगर, अयोध्या व नोएडा (जेवर) के रूप में तीन नए अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट मिले. नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा तो एशिया का सबसे बड़ा हवाई अड्डा बनने की दिशा में अग्रसर है. यह अकेला प्रकल्प लाखों रोजगार सृजित करेगा और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के आर्थिक भूगोल को नए सिरे से परिभाषित करेगा. रक्षा उत्पादन क्षेत्र में बुंदेलखंड और आगरा-लखनऊ के बीच विकसित होता डिफेंस कॉरिडोर पीएम मोदी की 'आत्मनिर्भर भारत' संकल्पना को उत्तर प्रदेश की धरती पर साकार करता है. डेटा सेंटर, टेक्सटाइल पार्क, फार्मा क्लस्टर और फूड प्रोसेसिंग इकाइयां उत्तर प्रदेश की औद्योगिक रूपरेखा को तेज़ी से बदल रही हैं और इस परिवर्तन के केंद्र में है वह विश्वास जो मोदी-योगी की जोड़ी ने अर्जित किया है.


अंत्योदय को अर्थ देने वाली कई योजनाओं को इस अवसर पर विस्मृत नहीं किया जा सकता. प्रधानमंत्री आवास योजना के सर्वाधिक 65 लाख से अधिक लाभार्थी उत्तर प्रदेश में हैं. उज्ज्वला योजना ने करीब 2 करोड़ माताओं-बहनों को धुएं से मुक्ति दी। हर घर जल योजना ने गांव की देहरी तक नल का जल पहुंचाया. किसान सम्मान निधि अन्नदाता का संबल है. मुफ्त राशन योजना करीब 15 करोड़ परिवारों को खाद्य सुरक्षा देती है. यह सब इसलिए संभव हुआ क्योंकि केंद्र की मंशा और राज्य का तंत्र एक ही दिशा में काम कर रहे हैं. यही पीएम मोदी के विजन की असली आत्मा है.

प्रधानमंत्री मोदी के बारह वर्षों की इस यात्रा एक गहरा सत्य प्रत्यक्ष है. उन्होंने वह नक्शा बनाया जिसमें उत्तर प्रदेश प्राथमिकता में था तो सीएम योगी ने उस नक्शे को ज़मीन पर उकेर दिया. मोदी-योगी के कालखंड में भारत के हृदय प्रदेश ने अपनी खोई हुई महिमा को पुनः प्राप्त किया है. उत्तर प्रदेश के पुनर्निर्माण की यह यात्रा अभी जारी है और कोई संशय नहीं कि अभी इसमें कई अध्याय और लिखे जाएंगे.

लेखक- प्रो. संजय सिंह बघेल, दिल्ली विश्वविद्यालय
(Disclaimer: यहां व्यक्त विचार लेखक की व्यक्तिगत राय हैं.)