Varanasi News: वाराणसी के दालमंडी इलाके में मार्ग चौड़ीकरण परियोजना के तहत प्रस्तावित बुलडोजर एक्शन पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फिलहाल पूरी तरह से रोक लगा दी है. कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विवादित संपत्तियों पर 20 जुलाई 2026 तक यथास्थिति बनाए रखने का बड़ा आदेश दिया है. नगर निगम वाराणसी द्वारा मकान को जर्जर बताकर दिए गए ध्वस्तीकरण के नोटिस के खिलाफ प्रभावित पक्ष ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने इस मामले में सुनवाई करते हुए प्रभावित भवन स्वामियों को बड़ी राहत दी है और साफ किया है कि अगली सुनवाई तक वहां कोई बुलडोजर नहीं चलेगा.
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नगर निगम के 26 मई के नोटिस को हाईकोर्ट में चुनौती
यह पूरा मामला वाराणसी नगर निगम के जोनल अधिकारी/सहायक नगर आयुक्त द्वारा 26 मई 2026 को जारी किए गए एक नोटिस से जुड़ा है. नगर निगम ने उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1959 की धारा 331 के तहत अलिमुन्निशा को नोटिस जारी कर उनके मकान को बेहद जर्जर बताया था और उसे ध्वस्त करने का आदेश दिया था. इसी नोटिस के खिलाफ अलिमुन्निशा ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी.
बिना अंतिम आदेश के मकान गिराना गैरकानूनी
याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता काजी मुहम्मद अकरम और उनकी टीम ने अदालत के सामने दलील दी कि नगर निगम की यह कार्रवाई पूरी तरह से असंवैधानिक और नियमों के खिलाफ है. उन्होंने कोर्ट को बताया कि 'पूर्व में भी जब नगर निगम ने नोटिस जारी किया था तब हाईकोर्ट ने एक संयुक्त समिति गठित कर प्रभावित पक्ष को अपनी बात रखने का मौका देने और उसके बाद ही कोई निर्णय लेने का निर्देश दिया था. नगर निगम का दावा है कि संयुक्त समिति ने मकान को जर्जर पाया है. लेकिन याचिकाकर्ता द्वारा दर्ज कराई गई आपत्तियों पर अब तक कोई अंतिम आदेश न तो पारित किया गया और न ही उन्हें विधिवत रूप से इसकी कोई कॉपी दी गई. बिना आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी किए और बिना किसी अंतिम आदेश के सीधे मकान गिराने की तैयारी करना कानून सम्मत नहीं है.
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा जवाब
खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले को विचारणीय माना. अदालत ने इस कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए उत्तर प्रदेश सरकार और नगर निगम वाराणसी समेत अन्य प्रतिवादियों से जवाब तलब किया है. कोर्ट ने राज्य सरकार और प्रतिवादियों को अपना काउंटर एफिडेविट दाखिल करने के लिए 3 सप्ताह का समय दिया है. इसके बाद याचिकाकर्ता को उसका जवाब देने के लिए 2 सप्ताह का वक्त मिला है.
अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख 20 जुलाई 2026 तय की है. खंडपीठ ने अपने अंतरिम आदेश में स्पष्ट तौर पर कहा है कि 20 जुलाई तक विवादित परिसर के संबंध में पूरी तरह यथास्थिति बनाए रखी जाए और 26 मई 2026 के नोटिस के आधार पर किसी भी प्रकार की ध्वस्तीकरण या तोड़फोड़ की कार्रवाई न की जाए.
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