मणिकर्णिका घाट को लेकर बनारस में बवाल, अबतक 8 FIR, क्या है पूरा विवाद यहां समझिए

Manikarnika Ghat Controversy: वाराणसी के मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल फर्जी तस्वीरों और वीडियो से विवाद गहरा गया है. पुलिस ने अफवाह फैलाने के आरोप में 8 एफआईआर दर्ज की हैं, जबकि प्रशासन और संत समाज ने मूर्तियों के सुरक्षित होने का दावा किया है.

रोशन जायसवाल

18 Jan 2026 (अपडेटेड: 18 Jan 2026, 04:15 PM)

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Manikarnika Ghat Controversy: वाराणसी के विश्व प्रसिद्ध मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास कार्य को लेकर पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर घमासान मचा हुआ है. मूर्तियों को तोड़े जाने के दावों वाले वीडियो और तस्वीरें वायरल हो रही हैं. प्रशासन इन्हें फर्जी बता रहा है जबकि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी समेत पूरा विपक्ष योगी आदित्यनाथ सरकार पर पुराने मंदिरों को तोड़ने का आरोप लगा रहा है. मामला वायरल होने के बाद अब पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया है. वाराणसी पुलिस ने इस मामले में 8 अलग-अलग एफआईआर (FIR) दर्ज की हैं.

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क्या है पूरा विवाद?

मणिकर्णिका घाट पर इन दिनों सौंदर्यीकरण और सुविधाओं के विस्तार का काम चल रहा है. विवाद तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया (विशेषकर 'X' प्लेटफॉर्म) पर कुछ तस्वीरें और वीडियो वायरल हुए, जिनमें दावा किया गया कि पुनर्विकास के नाम पर प्राचीन मंदिरों और मूर्तियों को क्षतिग्रस्त किया जा रहा है. विपक्ष के नेताओं ने इन तस्वीरों के आधार पर सरकार को घेरना शुरू किया. इसके बाद स्थानीय लोगों में भी नाराजगी देखी गई. हालांकि, प्रशासन और बीजेपी नेताओं का दावा है कि ये तस्वीरें AI (Artificial Intelligence) द्वारा जनरेटेड और पूरी तरह फर्जी हैं.

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पुलिस ने की कार्रवाई और 8 FIR दर्ज

पीटीआई की रिपोर्ट में डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (DCP) गौरव बंसल के हवाले से बताया गया है कि सोशल मीडिया पर फर्जी तस्वीरें और भ्रामक जानकारी फैलाने वाले 8 व्यक्तियों और कुछ X हैंडल्स के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज किए गए हैं. आरोप है कि धार्मिक भावनाओं को आहत करने और सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने के उद्देश्य से ये सामग्री पोस्ट की गई. तमिलनाडु के एक निवासी ने भी चौक थाने में शिकायत दर्ज कराई है. इनकी कंपनी घाट पर सौंदर्यीकरण का काम कर रही है. 

सीएम योगी के दौरे से जगी थी उम्मीद, पर बढ़ी मायूसी

इसी क्रम में शनिवार को वाराणसी पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लोगों को उम्मीद थी कि वह मणिकर्णिका घाट का दौरा करेंगे. भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर तैनात थे, लेकिन बाबा कालभैरव और श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन के बाद सीएम सीधे सर्किट हाउस के लिए रवाना हो गए. सीएम के मलबे वाली जगह (घटनास्थल) पर न पहुंचने से स्थानीय लोगों में मायूसी देखी गई. क्षेत्र के लोगों का कहना है कि वे जनप्रतिनिधियों की दलीलों से संतुष्ट नहीं हैं और मूर्तियों को जल्द से जल्द पुनर्स्थापित किया जाना चाहिए. 

बीजेपी मेयर और संतों ने दी सफाई - कोई मंदिर नहीं टूटा

लगातार हो रही किरकिरी के बाद बीजेपी मेयर अशोक तिवारी, क्षेत्रीय विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी और नगर आयुक्त ने घाट का निरीक्षण किया. मेयर अशोक तिवारी ने कहा कि अहिल्याबाई की मूर्ति और अन्य विग्रहों को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है. निर्माण कार्य पूरा होने के बाद इन्हें शास्त्रोक्त मर्यादा के अनुसार पुनर्स्थापित किया जाएगा. जो वीडियो चलाए जा रहे हैं, वे AI से बनाए गए फेक कंटेंट हैं. काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने भी एक ऑनलाइन मीटिंग के बाद स्पष्ट किया कि अनावश्यक भ्रम फैलाया जा रहा है और जिला प्रशासन ने मूर्तियों को संरक्षित किया है. अखिल भारतीय संत समिति के स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती ने विकास कार्यों का समर्थन करते हुए कहा कि जलासेन घाट पर 18वीं शताब्दी से शवदाह हो रहा है और विकास पर प्रश्न नहीं खड़ा करना चाहिए. 

फिलहाल मणिकर्णिका घाट पर निर्माण कार्य जारी है. एक तरफ जहां पुलिस अफवाह फैलाने वालों पर शिकंजा कस रही है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय जनता और विपक्षी दल मूर्तियों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन के लिखित आश्वासन और ठोस कदम का इंतजार कर रहे हैं. सोशल मीडिया पर चल रही किसी भी तस्वीर या सूचना को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच जरूर करें. वाराणसी पुलिस की सोशल मीडिया सेल लगातार इन हैंडल्स पर नजर रख रही है.

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