Shankracharya Avimukteshwaranand News: इलाहाबाद हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगने के बाद ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का बड़ा बयान सामने आया है. शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने खुलकर अपनी बात रखी है. कोर्ट के आदेश के बाद उन्होंने मीडिया ट्रायल और आरोपों की सच्चाई पर तीखा प्रहार किया है.
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कोर्ट के आदेश के बाद शंकराचार्य ने कहा, "आज जो सरकार के अडिशनल एडवोकेट जनरल ने माना कि दोनों बच्चे यहां नहीं पढ़ते थे यही बात तो हम कह रहे थे. आज कोर्ट ने दोनों बच्चों को सही संरक्षण में देने की बात कही है. हम कह रहे थे सारा अमला भ्रष्ट नहीं होता है. पूरे देश का हिंदू समुदाय आशंकित था कि क्या हमारे गुरु ने गड़बड़ी की है..आज कम से कम लोगों को भरोसा जगा कि कही तो सुनवाई होती है. न्यायाधीश ने लगभग 1 घंटे तक पूरी बात सुनवाई की है. जो सीडी कही जा रही थी अगर वो होती तो कोर्ट में दी जाती दिखाई जाती लेकिन आज कोर्ट में कुछ पेश नहीं किया गया. यह मीडिया ट्रायल किया जा रहा था, कोर्ट के बाहर ही फैसला किया जा रहा था. हमें जानकारी मिली हमारे वकील ने बताया कि कोर्ट ने आर्डर रिजर्व कर लिया है. अरेस्टिंग पर रोक लगा दी है."
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए अगली तारीख तक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है. अदालत ने दोनों पक्षों को 12 मार्च तक अपना लिखित पक्ष दाखिल करने का समय दिया है. मामले में अगला आदेश मार्च के तीसरे सप्ताह में आने की संभावना है.
हाईकोर्ट ने की ये अहम टिप्पणी
शुक्रवार दोपहर शुरू हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी भी की. अदालत ने पूछा कि जब सेशन कोर्ट का विकल्प उपलब्ध था, तो सीधे हाईकोर्ट क्यों आए? अदालत ने कहा, "हालांकि हाईकोर्ट के पास इस याचिका को सुनने का अधिकार है लेकिन यह उचित प्रक्रिया नहीं मानी जाएगी. पहले सेशन कोर्ट जाना चाहिए था." इस पर बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि हाईकोर्ट और सेशन कोर्ट दोनों के पास समानांतर अधिकार क्षेत्र है.
आरोपों और मेडिकल रिपोर्ट पर उठाए सवाल
शंकराचार्य ने पहले ही मेडिकल जांच रिपोर्ट और आरोपों की प्रामाणिकता पर सवाल खड़े किए थे. उनका कहना है कि कई दिनों बाद कराई गई मेडिकल जांच से किसी की संलिप्तता साबित नहीं की जा सकती. उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि जिस बच्चे का नाम लिया जा रहा है, वह कभी उनके पास आया ही नहीं, ऐसे में उन्हें इस मामले से जोड़ना पूरी तरह गलत है.
नोट: खबर में शुरआत में गलती से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को अग्रिम जमानत की बात लिख दी गई थी, जिसे सुधार लिया गया है.
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