₹400 किलो बिका गाय का गोबर! सहारनपुर के आदित्य त्यागी ने खोज निकाला ऐसा फॉर्मूला, हर महीने हो रही लाखों की कमाई

राहुल कुमार

• 02:50 PM • 10 Aug 2026

सहारनपुर के 71 वर्षीय किसान आदित्य त्यागी ने देसी गाय के गोबर को कमाई के नए जरिये में बदल दिया है. रिटायरमेंट के बाद उन्होंने गोबर से सम्भरानी कप बनाना शुरू किया. उनके उत्पाद देशभर में बिक रहे हैं और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से भी ऑर्डर मिल रहे हैं.

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सहारनपुर के 71 साल के किसान आदित्य त्यागी ने साबित कर दिया है कि कमाई के लिए हमेशा किसी बड़े कारोबार या महंगी मशीन की जरूरत नहीं होती. कभी बेकार समझे जाने वाले देसी गाय के गोबर को उन्होंने कमाई का जरिया बना दिया है. आज उनके बनाए गोबर के उत्पाद देशभर में बिक रहे हैं और हर महीने लाखों रुपये की आमदनी हो रही है.

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आदित्य त्यागी सहारनपुर के गांव महरवानी के रहने वाले हैं. वह पहले फॉरेस्ट रेंजर के पद पर नौकरी करते थे. रिटायरमेंट के बाद उन्होंने देसी गायों का पालन शुरू किया. शुरुआत में उनका इरादा दूध के जरिए कमाई करने का था, लेकिन जब उससे उम्मीद के मुताबिक मुनाफा नहीं मिला तो उन्होंने कुछ अलग करने की ठानी.

यहीं से शुरू हुई गोबर को कारोबार में बदलने की कहानी. उन्होंने देसी गाय के गोबर से सम्भरानी कप यानी धूनी कप बनाने का काम शुरू किया. आज यही प्रयोग उनके लिए अच्छी कमाई का जरिया बन चुका है.

गोबर से कैसे तैयार करते हैं सम्भरानी कप?

आदित्य त्यागी देसी गाय के गोबर में गूगल और लोबान जैसी प्राकृतिक सामग्री मिलाकर सम्भरानी कप तैयार करते हैं. इन कपों का इस्तेमाल घरों में धूनी देने और वातावरण को सुगंधित करने के लिए किया जाता है.

उनका कहना है कि बाजार में मिलने वाले ज्यादातर सम्भरानी कप कोयले से बनाए जाते हैं. उनके मुताबिक, कोयले के जलने पर कार्बन डाइऑक्साइड निकलती है. इसके मुकाबले वह देसी गाय के गोबर से बने कप को प्राकृतिक और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प के तौर पर तैयार कर रहे हैं.

आदित्य त्यागी के लिए यह काम सिर्फ कमाई का जरिया नहीं है. उनका कहना है कि वह लोगों तक शुद्ध और प्राकृतिक उत्पाद पहुंचाना चाहते हैं.

10 ग्राम गोबर से तैयार होता है एक कप

अब इस काम की कमाई का गणित भी समझ लीजिए. आदित्य त्यागी के मुताबिक, एक सम्भरानी कप बनाने में करीब 10 ग्राम देसी गाय का गोबर इस्तेमाल होता है. एक कप की कीमत करीब 10 रुपये पड़ती है.

इस हिसाब से देखें तो गोबर की कीमत करीब 400 रुपये प्रति किलो से भी ज्यादा बैठती है. यानी जिस चीज को लोग अक्सर बेकार समझकर फेंक देते हैं, उसका सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो उसकी अच्छी कीमत मिल सकती है.

उनके बनाए उत्पाद होलसेल में करीब 90 रुपये और ऑनलाइन लगभग 220 रुपये में बिकते हैं. अमेजन समेत अलग-अलग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से उन्हें देशभर से ऑर्डर मिल रहे हैं.

दक्षिण भारत से मिल रहे सबसे ज्यादा ऑर्डर

आदित्य त्यागी के उत्पादों की मांग सिर्फ सहारनपुर या आसपास के इलाकों तक सीमित नहीं है. उन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों से ऑर्डर मिल रहे हैं और इनमें दक्षिण भारत से सबसे ज्यादा मांग आ रही है.

उन्होंने इस साल करीब 20 हजार सम्भरानी कप तैयार किए. इनमें से करीब 7 से 8 हजार कप की बिक्री महज एक महीने के भीतर हो चुकी है. आंकड़ा बताता है कि देसी और प्राकृतिक उत्पादों के लिए बाजार में कितनी मांग मौजूद है. खासकर जब लोग रोजमर्रा के इस्तेमाल में प्राकृतिक विकल्प तलाश रहे हैं.

नौकरी से ज्यादा हो रही है कमाई

आदित्य त्यागी बताते हैं कि आज इस काम से उन्हें नौकरी के समय मिलने वाली सैलरी से भी ज्यादा आमदनी हो रही है. इतना ही नहीं, उन्होंने अपने इस काम के जरिए 5 से 7 लोगों को रोजगार भी दिया है. यानी गोबर से शुरू हुआ छोटा-सा प्रयोग अब उनके साथ दूसरे लोगों के लिए भी कमाई का जरिया बन रहा है.

उनका मानना है कि अगर देसी गाय के गोबर का वैज्ञानिक और व्यावसायिक तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो इससे दूध बेचने की तुलना में कई गुना ज्यादा कमाई की जा सकती है.