Opinion: उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए सभी दल तैयारियों में जुट गए हैं. इसी बीच समाजवादी पार्टी की रथयात्रा का भी आगाज होने जा रहा है. अखिलेश यादव की यह रथयात्रा 24 सितंबर को रायबरेली से शुरू होगी. लेकिन यहां एक सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर अखिलेश यादव ने अपनी रथयात्रा के आगाज के लिए रायबरेली को ही क्यों चुना? किसी भी पार्टी के लिए चुनावी कार्यक्रमों की शुरुआत के लिए स्थान का चयन रणनीति का हिस्सा होता है. ऐसे में अखिलेश के रायबरेली के चयन को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है.
ADVERTISEMENT
रायबरेली कांग्रेस का गढ़ माना जाता है और राहुल गांधी मौजूदा समय में रायबरेली से सांसद हैं. कुछ दिन पहले राहुल गांधी का रायबरेली में कार्यक्रम भी हुआ था, जिसे कांग्रेस ने चुनावी तैयारियों के लिहाज से अहम बताया था. ऐसे में अखिलेश का रथयात्रा की शुरुआत के लिए रायबरेली को चुनना इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सपा और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर तनातनी चरम पर है.
क्या रिश्तों में तल्खी के चलते अखिलेश ने रायबरेली को चुना?
ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर अखिलेश यादव ने रायबरेली को ही क्यों चुना? कांग्रेस के नेता लगातार सपा पर दबाव बनाते हुए कह रहे हैं कि उन्हें गठबंधन में सम्मानजनक संख्या में सीटें चाहिए. साथ ही कांग्रेस की ओर से यह भी दावा किया जा रहा है कि अगर सपा ने कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं किया तो उत्तर प्रदेश में सपा के लिए भाजपा को हराना मुश्किल होगा.
वहीं, दूसरी ओर सपा की तरफ से कांग्रेस पर यह आरोप लगाया जाता रहा है कि उत्तर प्रदेश में उसका कोई खास जनाधार नहीं है. ऐसे में अखिलेश का रायबरेली से रथयात्रा का आगाज एक तरह से सांकेतिक ताकत दिखाने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा सकता है. वह इस यात्रा के जरिए यह संदेश देना चाहते हैं कि राहुल गांधी के गढ़ में भी समाजवादी पार्टी पूरी मजबूती के साथ चुनावी तैयारी कर रही है और उसे कांग्रेस की बैसाखी की जरूरत नहीं है.
सपा की ओर से यह संदेश भी देने की कोशिश हो सकती है कि वह अपनी चुनावी तैयारियां अपने स्तर पर पूरी ताकत के साथ कर रही है. दरअसल, अक्सर सपा और कांग्रेस के बीच रायबरेली और अमेठी जैसी सीटों को लेकर समझौते की स्थिति रही है. ऐसे में रायबरेली से रथयात्रा की शुरुआत के जरिए अखिलेश यह संकेत देना चाहते हैं कि गठबंधन को लेकर बातचीत अपनी जगह है, लेकिन समाजवादी पार्टी अपनी तैयारियों में कोई कमी नहीं छोड़ने वाली.
सपा-कांग्रेस की तल्खी के बीच बढ़ी सियासी खींचतान
दरअसल, कांग्रेस और सपा के बीच तल्खी इन दिनों खुलकर सामने आ रही है. कांग्रेस सांसद इमरान मसूद का तर्क है कि कांग्रेस के बिना भाजपा को चुनौती देना मुश्किल है. यानी कांग्रेस की तरफ से संदेश साफ है कि सपा उत्तर प्रदेश में बड़ी पार्टी हो सकती है, लेकिन गठबंधन में कांग्रेस को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
दूसरी तरफ इमरान मसूद और सपा सांसद इकरा हसन के बीच बयानबाजी ने इस तनाव को एक नया चेहरा दे दिया है. इकरा हसन ने अखिलेश यादव को भाजपा का मुकाबला करने में सक्षम बताते हुए कांग्रेस की भूमिका पर सवाल उठाया. इससे साफ है कि बात अब सिर्फ सीट बंटवारे तक सीमित नहीं है. विपक्षी खेमे के भीतर मुस्लिम राजनीति और नेतृत्व को लेकर भी खींचतान दिखाई दे रही है.
रायबरेली से रथ: कांग्रेस के गढ़ में सपा का अपना संदेश
यही वह पृष्ठभूमि है, जिसमें रायबरेली का चुनावी महत्व और बढ़ जाता है. अखिलेश यादव अपने पारंपरिक राजनीतिक केंद्र से भी रथयात्रा की शुरुआत कर सकते थे, लेकिन उन्होंने कांग्रेस के सबसे बड़े राजनीतिक प्रतीकों में से एक रहे रायबरेली को चुना है. इसका एक संदेश यह हो सकता है कि गठबंधन हो या न हो, समाजवादी पार्टी अपनी चुनावी मशीनरी को अपने स्तर पर तैयार कर रही है. साथ ही, यह कांग्रेस पर दबाव बनाने की कोशिश भी हो सकती है.
‘एकला चलो’ का संदेश कितना स्पष्ट?
अखिलेश की रायबरेली यात्रा निश्चित रूप से कांग्रेस पर दबाव बनाने के लिए है. साथ ही यह समाजवादी पार्टी की अपनी जमीन मजबूत करने की कोशिश भी है. यही उत्तर प्रदेश की राजनीति का मौजूदा दिलचस्प मोड़ है. बाहर से दोनों दल एक-दूसरे का साथ छोड़ने से इनकार कर रहे हैं, लेकिन भीतर सीट, नेतृत्व, मुस्लिम प्रतिनिधित्व और राजनीतिक स्पेस को लेकर प्रतिस्पर्धा लगातार दिखाई दे रही है. रायबरेली से निकलने वाला PDA रथ इस प्रतिस्पर्धा को और स्पष्ट करता है. सवाल अब सिर्फ साथ लड़ने का नहीं है, बल्कि यह भी है कि साथ आने की स्थिति में राजनीतिक शर्तें किसकी चलेंगी.
(लेखक डॉ. अश्वनी अवस्थी, पीएचडी (भूगोल) हैं तथा चित्रकूट में जिला महामंत्री (2019 से 2024 तक दो सत्र) रह चुके हैं. वे समसामयिक विषयों एवं सामाजिक मुद्दों पर लेखन करते हैं.)
(Disclaimer: यहां व्यक्त विचार लेखक की व्यक्तिगत राय हैं.)
ADVERTISEMENT











