Raebareli Transport Department Controversy: उत्तर प्रदेश के रायबरेली से एक ऐसा वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है, जिसने परिवहन विभाग की साख पर 'इमरजेंसी ब्रेक' लगा दिया है. अमूमन नियमों का उल्लंघन करने वालों का चालान काटने वाली परिवहन विभाग की 'इंटरसेप्टर' गाड़ी खुद ही नियमों की धज्जियां उड़ाती कैमरे में कैद हो गई है। जी हां, जिस सरकारी गाड़ी का काम सड़कों पर रफ्तार और सुरक्षा की निगरानी करना है, उसे बाकायदा 'डग्गामार' प्राइवेट बस की तरह सवारी ढोने के काम में लगा दिया गया.
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सड़क किनारे लगी 'सरकारी सेल', धड़ाधड़ बैठीं सवारियां
मामला लखनऊ-प्रयागराज नेशनल हाईवे का बताया जा रहा है, वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि सड़क के किनारे परिवहन विभाग (उत्तर प्रदेश) की एक इंटरसेप्टर गाड़ी खड़ी है. हैरान करने वाली बात यह है कि इस हाई-टेक सरकारी गाड़ी के दरवाजे खुले हुए हैं और उसमें आम मुसाफिर इस तरह ठंस-ठंस कर बैठ रहे हैं, जैसे वह कोई प्राइवेट ऑटो या डग्गामार वैन हो.
वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग मजे भी ले रहे हैं और गुस्सा भी जता रहे हैं. आरोप लग रहे हैं कि साहब के ड्राइवर ने 'ऊपरी कमाई' के चक्कर में सरकारी तेल और सरकारी रुतबे का जमकर दुरुपयोग किया. लोग पूछ रहे हैं कि क्या अब परिवहन विभाग ने जनता की सेवा के लिए "सस्ता और टिकाऊ" नया टैक्सी रूट शुरू कर दिया है?
ARTO प्रवर्तन ने झाड़ा पल्ला, बोले- 'गाड़ी हमारी नहीं
वीडियो के वायरल होते ही जब रायबरेली परिवहन महकमे में हड़कंप मचा और फोन घनघनाने लगे, तो आनन-फानन में रायबरेली के ARTO प्रवर्तन उमेश कटियार को सामने आना पड़ा. उन्होंने मामले पर सफाई देते हुए अपना पल्ला झाड़ लिया है. ARTO उमेश कटियार ने बताया कि वायरल वीडियो में दिख रही इंटरसेप्टर गाड़ी रायबरेली जनपद की नहीं है. प्राथमिक जांच के अनुसार, यह वाहन किसी अन्य जिले से ताल्लुक रखता है. मामले की जांच की जा रही है कि यह गाड़ी किस जिले की है और लखनऊ-प्रयागराज हाईवे पर यह क्या गुल खिला रही थी.
अब भले ही रायबरेली के अधिकारी इसे दूसरे जिले का पाप बताकर राहत की सांस ले रहे हों, लेकिन सवाल तो पूरे उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग पर खड़ा हो गया है. जनता के टैक्स के पैसे से चलने वाली इंटरसेप्टर गाड़ियां अगर इस तरह सड़कों पर सवारियां ढोएंगी, तो डग्गामारों पर नकेल कौन कसेगा?
अब देखना यह है कि इस 'वायरल कांड' के बाद आरोपी ड्राइवर और उस गाड़ी के जिम्मेदार अधिकारी पर गाज गिरती है, या फिर सरकारी फाइलों में इस मामले को भी 'सवारी' की तरह कहीं दूर छोड़ दिया जाएगा.
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