Raebareli Electricity Department News: आवारा मवेशियों से अपनी लहलहाती फसलों को बचाने के लिए जिले के किसान अब 'झटका मशीनों' का सहारा ले रहे हैं. खेतों की बाड़ में दौड़ाए जा रहे इस करंट से मवेशी भले ही खेतों से दूर भाग रहे हों, लेकिन यह तरकीब अब ग्रामीणों और बेजुबानों की जिंदगी पर भारी पड़ने लगी है. नियम-कायदों को दरकिनार कर बेधड़क इस्तेमाल की जा रही इन मशीनों पर न तो स्थानीय प्रशासन की नजर है और न ही बिजली विभाग कोई सुध ले रहा है.
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सोलर और बैटरी छोड़ सीधे बिजली से दे रहे 'करंट'
फसलों की सुरक्षा के नाम पर किसान खेतों के चारों ओर तार बांधकर झटका मशीनें जोड़ रहे हैं, कहने को तो ये मशीनें सोलर पैनल या बैटरी से चलाने के लिए बनाई गई हैं, लेकिन लागत बचाने और असर बढ़ाने के चक्कर में कई जगह इन्हें सीधे घरेलू बिजली सप्लाई से जोड़ दिया गया है. बैटरी या सोलर से मिलने वाला हल्का झटका मवेशियों को सिर्फ डराता है, लेकिन सीधे बिजली से करंट दौड़ाने पर यह मशीन सीधे 'मौत का फंदा' बन जाती है.
हादसों के बाद भी जिम्मेदार बेखबर
जिले के कई गांवों में बिजली से चलने वाली झटका मशीनों की वजह से पूर्व में भी कई अप्रिय घटनाएं हो चुकी हैं. इसके बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है. इन खतरनाक मशीनों को लगाने के लिए किसी भी विभाग से अनुमति नहीं ली जा रही है. ग्रामीण इलाकों में इसका ज्यादातर इस्तेमाल दबंग किस्म के लोग कर रहे हैं, जिससे आम ग्रामीण शिकायत करने से भी डरते हैं. औपचारिक शिकायत न मिलने का बहाना बनाकर जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर समस्या से पल्ला झाड़ रहे हैं.
हर गांव में फैल रहा खतरा
अब स्थिति यह हो चुकी है कि जिले के लगभग हर गांव में एक-दो किसान खुलेआम इन झटका मशीनों का उपयोग कर रहे हैं. बिना किसी जांच-परख और मानक के खेतों में दौड़ता यह करंट कभी भी किसी बड़े हादसे का सबब बन सकता है. इसके बावजूद बिजली विभाग ने पूरी तरह से चुप्पी साध रखी है, जिससे किसानों के हौसले बुलंद हैं.
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