Raebareli Mandi Bhav Today: रायबरेली में सब्जियों के दाम बेकाबू: ₹300 किलो पहुंचा धनिया, महंगाई से 1 किलो की जगह पावभर खरीदने को मजबूर लोग

Newzo

• 11:06 AM • 24 Jul 2026

Raebareli Mandi Bhav 24 July 2026: रायबरेली में सब्जियों की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों का रसोई बजट बिगाड़ दिया है. स्थानीय आवक घटने से धनिया, अदरक और रोजमर्रा की सब्जियां महंगी हो गई हैं. लोग अब एक किलो की बजाय पावभर और आधा किलो सब्जियां खरीदने को मजबूर हैं.

रायबरेली में सब्जियों के दाम बेकाबू: ₹300 किलो पहुंचा धनिया, महंगाई से 1 किलो की जगह पावभर खरीदने को मजबूर लोग

रायबरेली में सब्जियों के दाम बेकाबू: ₹300 किलो पहुंचा धनिया, महंगाई से 1 किलो की जगह पावभर खरीदने को मजबूर लोग

Google CTA

Raebareli  Mandi Bhav 24 July 2026: ज़ायके की खोज में निकले रायबरेली वासियों को इन दिनों सब्जी मंडी का रुख करते ही महंगाई का तगड़ा झटका लग रहा है. जिले की प्रमुख मंडियों में हरी सब्जियों की आवक क्या घटी, दामों ने मानो आसमान ही छू लिया है. जो धनिया अमूमन थैली में ऊपर से मुफ्त डाल दी जाती थी, आज वही ₹300 किलो का आंकड़ा पार कर आम आदमी की जेब खाली कर रही है.

यह भी पढ़ें...

​थाली से दूर हुई हरियाली, जायका भी फीका

​सब्जियों के बेकाबू दामों ने मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों के रोज़ के बजट का संतुलन बिगाड़ दिया है. सुबह की चाय में महक घोलने वाली अदरक अब ₹200 प्रति किलो के पार बिक रही है. वहीं, आम दिनों में ₹10 से ₹20 किलो में मिलने वाली लौकी, तरोई और टमाटर जैसी रोजाना की सब्जियां अब ₹30 से ₹50 प्रति किलो का आंकड़ा छू रही हैं.

रायबरेली सब्जी मंडी: प्रमुख सब्जियों के दाम

सब्जी/मसाला वर्तमान कीमत (₹/किलो) सामान्य कीमत (₹/किलो) कीमत में बदलाव
धनिया 300+ अक्सर मुफ्त या 40–80 भारी बढ़ोतरी
अदरक 200+ 80–120 तेज उछाल
लौकी 30–50 10–20 लगभग दोगुनी
तरोई 30–50 10–20 लगभग दोगुनी
टमाटर 30–50 10–20 लगभग दोगुनी

क्यों धधक रही है कीमतों की आग?

स्थानीय कारोबारियों के अनुसार, तेजी का सबसे बड़ा कारण स्थानीय पैदावार में आई भारी कमी है. मंडी व्यापारी भीम ने बताया कि जिले में स्थानीय आवक न के बराबर रह गई है, जिससे हमें पड़ोसी जिलों और दूसरे राज्यों की मंडियों पर निर्भर होना पड़ रहा है. दूसरे शहरों से माल लाने में परिवहन भाड़ा काफी बढ़ जाता है, जिसका सीधा असर थोक और खुदरा कीमतों पर पड़ रहा है, जब तक स्थानीय सप्लाई सामान्य नहीं होती, तब तक जनता को राहत मिलना मुश्किल है.

​महंगाई के इस अचानक आए उफान से गृहणियों की चिंताएं बढ़ गई हैं. मंडियों में खरीदारी करने पहुंचे लोगों का कहना है कि अब हफ्ते भर का सामान एक बार में खरीदना नामुमकिन सा हो गया है. लोग मजबूरी में खरीदारी की मात्रा आधी करने को विवश हैं.