UPPCS Result 2024: जैसे ही देखा रिजल्ट फौरन मंदिर पहुंच टेका माथा, नायब तहसीलदार बने आनंद राज की कहानी रुला देगी

UPPCS 2024 में सफल हुए आनंद राज की भावुक कहानी. भाई को खोने का दर्द और आर्थिक तंगी के बावजूद दूसरे प्रयास में बने नायब तहसीलदार. देखें संघर्ष से सफलता का सफर.

यूपी तक

• 10:38 AM • 31 Mar 2026

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जब संघर्ष की तपिश कुंदन बनकर निखरती है, तो सफलता की तस्वीर कुछ ऐसी ही भावुक होती है. 29 मार्च की देर रात जब यूपीपीएससी ने पीसीएस 2024 का परिणाम घोषित किया, तो नायब तहसीलदार की सूची में अपना नाम देख आनंद राज सबसे पहले हनुमान मंदिर पहुंचे. वहां भगवान के चरणों में माथा टेककर वे फूट-फूट कर रो पड़े. उनके ये आंसू सिर्फ खुशी के नहीं थे, बल्कि उन अंधेरी रातों और कड़वी यादों के विदाई गीत थे जिन्होंने सालों तक उनका पीछा किया था. मंदिर में सिसकते आनंद की यह तस्वीर आज सोशल मीडिया पर हर उस युवा की प्रेरणा बन गई है जो अभावों के बीच बड़े सपने देखता है.

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आनंद राज की यह सफलता किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि एक पूरी पीढ़ी के अटूट संघर्ष की कहानी है. एक साधारण किसान परिवार से आने वाले आनंद के पिता ने दिन-रात एक छोटी सी कंपनी में काम करके बेटे की पढ़ाई का खर्च उठाया. आनंद के जीवन में सबसे बड़ा पहाड़ तब टूटा जब तीन साल पहले एक सड़क हादसे में उन्होंने अपने बड़े भाई को खो दिया, जो घर की रीढ़ थे. भाई के जाने के बाद परिवार आर्थिक और मानसिक रूप से टूट गया था. आनंद के सामने घर संभालने की चुनौती थी, लेकिन पिता की जिद और खुद के विश्वास ने उन्हें प्रयागराज की तंग गलियों में डटे रहने का साहस दिया.

लॉकडाउन के उस अकेलेपन और भाई के जाने के असहनीय दर्द के बीच आनंद ने साहित्य का सहारा लिया. निराला की 'राम की शक्ति पूजा' और प्रेमचंद के उपन्यासों की 50-60 किताबों ने उनके खालीपन को भरा और उन्हें टूटने से बचाए रखा. साल 2023 के पहले प्रयास में मेंस न निकलने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और 2024 में अपने दूसरे ही प्रयास में नायब तहसीलदार बनकर घर की किस्मत बदल दी। आज उनका पूरा परिवार इस उपलब्धि से गौरवान्वित है, क्योंकि आनंद ने साबित कर दिया कि अगर मेहनत सच्ची और विश्वास अटल हो, तो नियति को भी झुकना पड़ता है.