उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) की प्रतिष्ठित पीसीएस परीक्षा में अनन्या त्रिवेदी ने प्रदेश भर में द्वितीय स्थान प्राप्त कर सबको चौंका दिया है. गाँव की पगडंडियों से लेकर प्रशासनिक सेवा के शिखर तक पहुँचने वाली अनन्या की यह कहानी केवल एक परीक्षा पास करने की नहीं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों को अवसर में बदलने की है.
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कोचिंग को कहा 'ना', स्वाध्याय से पाई सफलता
आज के दौर में जहाँ प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए लाखों की फीस वाले कोचिंग संस्थानों की बाढ़ है, वहीं अनन्या ने पूरी तैयारी घर पर रहकर की. उन्होंने साबित कर दिया कि इंटरनेट के युग में कंटेंट की कमी नहीं है, बस सही योजना और एकाग्रता की जरूरत है. उनके मामा, जो स्वयं प्रशासनिक सेवा में हैं, उनके मार्गदर्शक (गाइड) रहे, लेकिन मेहनत पूरी तरह अनन्या की अपनी थी.
मां- सफलता के पीछे की असली 'आर्ककिटेक्ट'
अनन्या की इस ऐतिहासिक जीत की सबसे बड़ी नायिका उनकी माँ हैं. एक माँ जिसने न केवल घर संभाला, बल्कि खुद पढ़ाई कर अपने बच्चों को भी पढ़ाया. अनन्या भावुक होकर कहती हैं, "मेरी माँ ने हमें आत्मनिर्भर बनाया और सिखाया कि जीवन में चुनौतियों से भागना नहीं, बल्कि उनका सामना करना है." माँ-बेटी की इस जोड़ी ने संघर्ष के हर कांटे को फूल बनाकर अपनी राह आसान की.
समय प्रबंधन और निरंतरता का मंत्र
अपनी तैयारी के बारे में बात करते हुए अनन्या ने बताया कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता. उन्होंने कभी हार नहीं मानी और हर नाकामी से कुछ नया सीखा. उनका मानना है कि समय प्रबंधन (Time Management) और खुद पर अटूट भरोसा ही वह चाबी है, जिससे सफलता के द्वार खुलते हैं. गाँव से शहर तक के अपने सफर में उन्होंने कभी अपने उद्देश्य को ओझल नहीं होने दिया.
युवाओं के लिए संदेश- लक्ष्य बड़ा रखें
अनन्या के अनुसार, परीक्षा केवल नंबरों का खेल नहीं है, बल्कि यह आपके व्यक्तित्व और सही दिशा का परीक्षण है. वे कहती हैं कि आज के युवाओं को किसी पर निर्भर रहने के बजाय अपनी क्षमताओं को पहचानना चाहिए. उनकी यह सफलता उन हजारों मेधावियों के लिए एक मशाल है जो संसाधनों की कमी के कारण बड़े सपने देखने से डरते हैं.
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