धुरंधर 2 में अतीक अहमद के पाकिस्‍तानी कनेक्शन को देखते ही भड़क गए प्रयागराज के लोग, छिड़ी तीखी बहस

प्रयागराज में फिल्म 'धुरंधर 2' को लेकर मचा बवाल. अतीक अहमद जैसे किरदार और पाकिस्तान कनेक्शन पर आम जनता के बीच तीखी नोकझोंक. जानें क्यों लोग इसे सच्चाई बता रहे हैं और क्यों कुछ इसे 'एजेंडा फिल्म' करार दे रहे हैं.

आनंद राज

• 11:55 AM • 28 Mar 2026

follow google news

संगम नगरी प्रयागराज इन दिनों बड़े पर्दे पर रिलीज हुई फिल्म धुरंधर 2 को लेकर चर्चाओं के केंद्र में है. फिल्म में दिखाए गए बाहुबली अतीफ (जिसकी तुलना अतीक अहमद से की जा रही है) और उसके कथित पाकिस्तान कनेक्शन ने शहर के सियासी और सामाजिक माहौल को गरमा दिया है. फिल्म देखकर निकले दर्शकों के बीच इसे लेकर दो अलग-अलग धड़े नजर आ रहे हैं.

यह भी पढ़ें...

सच्चाई या प्रोपोगेंडा? जनता की राय 

थिएटर के बाहर 'यूपी तक' से बात करते हुए स्थानीय लोगों ने फिल्म के कंटेंट पर खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी. कुछ दर्शकों का मानना है कि फिल्म में दिखाई गई घटनाएं पूरी तरह सच हैं। उनका कहना है कि प्रयागराज में जिस स्तर का अपराध होता था, यह फिल्म उसका आईना है. उन्होंने फिल्म में दिखाए गए 'पाकिस्तान कनेक्शन', हथियारों की तस्करी और जाली नोटों के जाल को हकीकत से प्रेरित बताया. वहीं, एक दूसरे वर्ग ने इसे 'सत्ता पोषित' फिल्म करार दिया है. विरोध करने वालों का तर्क है कि यह फिल्म बेरोजगारी, महंगाई और किसानों की समस्याओं जैसे असल मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए बनाई गई है. उनका कहना है कि एक दिवंगत नेता (अतीक अहमद) को अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद से जोड़ना केवल एक खास एजेंडा का हिस्सा है.

अतीक अहमद और अंतरराष्ट्रीय लिंक पर चर्चा

फिल्म में दिखाए गए अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन पर भी जानकारों और पत्रकारों ने अपनी राय रखी. कुछ लोगों ने 2000-2005 के दौर की खुफिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए नेपाल और पाकिस्तान के जरिए होने वाले अपराधों का जिक्र किया. दूसरी ओर, विरोध करने वालों ने सवाल उठाया कि अगर अतीक अहमद इतना बड़ा अंतरराष्ट्रीय अपराधी था, तो देश की खुफिया एजेंसियां और तत्कालीन सरकारें क्या कर रही थीं? उन्होंने इसे सुरक्षा एजेंसियों की विफलता के रूप में पेश करने की कोशिश की.

स्थानीय मुद्दों बनाम फिल्मी विमर्श

बहस के दौरान स्थानीय मुद्दे भी हावी रहे. प्रयागराज के युवाओं और किसानों का एक वर्ग इस बात से नाराज दिखा कि देश में गैस, पेट्रोल और डीजल के संकट पर बात करने के बजाय एक फिल्म पर चर्चा की जा रही है. लोगों का कहना था कि "कब्र से जिन्नात निकालकर वोट लेने की कोशिश" की जा रही है, जबकि जनता को रोटी और रोजगार की चिंता है.