कोडीन कफ सिरप के आरोपियों ने की जज तक पहुंच बनाने की कोशिश, तो जस्टिस कृष्ण पहल ने कह दी ऐसी बात

पंकज श्रीवास्तव

• 09:23 AM • 31 Jul 2026

कोडीन कफ सिरप मामले की सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज ने आरोपियों द्वारा निजी संपर्क की कोशिश पर कड़ी टिप्पणी की. इसे न्यायपालिका के लिए काला दिन बताते हुए उन्होंने खुद को मामले की सुनवाई से अलग कर लिया.

Allahabad Highcourt

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देशभर में चर्चित कोडीन युक्त कफ सिरप मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज की एक टिप्पणी चर्चा में बनी हुई है. मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस कृष्ण पहल ने आरोपियों द्वारा जज तक निजी पहुंच बनाने की कोशिश पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है. कोर्ट ने इसे न्यायपालिका के इतिहास का काला दिन बताया. साथ ही उन्होंने खुद को इस मामले की सुनवाई से अलग कर लिया है.

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क्या है पूरा मामला?

कोडीन कफ सिरप मामले के मुख्य आरोपी भोला जायसवाल समेत कुल 75 आरोपियों की नियमित जमानत याचिकाओं पर न्यायमूर्ति कृष्ण पहल की पीठ में सुनवाई होनी थी. गुरुवार को जैसे ही मामले की सुनवाई शुरू हुई जस्टिस कृष्ण पहल ने कड़े शब्दों में कहा कि आरोपियों की तरफ से जज तक निजी तौर पर संपर्क साधने का अनुचित प्रयास किया गया. कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि जमानत के लिए जज तक पहुंच बनाने की ऐसी हरकतें न्यायिक व्यवस्था की गरिमा पर गंभीर हमला हैं.

'न्याय निष्पक्ष दिखना भी चाहिए'

न्यायमूर्ति कृष्ण पहल ने साफ शब्दों में कहा कि अगर इस स्थिति में कोई फैसला सुनाया जाता तो न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो सकते थे. उन्होंने जोर देकर कहा कि न्याय सिर्फ होना ही नहीं चाहिए बल्कि यह साफ तौर पर निष्पक्ष होते हुए दिखना भी चाहिए. जज तक निजी पहुंच बनाने की कोशिश वकीलों की नैतिकता, अदालती आचरण और संविधान द्वारा दी गई स्वतंत्र न्यायपालिका की भावना के बिल्कुल खिलाफ है.

चीफ जस्टिस को भेजा गया मामला

इन तीखी टिप्पणियों के साथ न्यायमूर्ति कृष्ण पहल ने सभी 75 जमानत याचिकाओं की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया. उन्होंने निर्देश दिया कि इन सभी फाइलों को इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के सामने प्रस्तुत किया जाए ताकि इन्हें किसी अन्य उपयुक्त पीठ (Bench) को सौंपा जा सके. कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि ये मामले अब भविष्य में उनकी पीठ के सामने सूचीबद्ध नहीं होंगे.

पहले भी खारिज हो चुकी हैं याचिकाएं

गौरतलब है कि इससे पहले भी इस मामले के आरोपियों ने FIR रद्द कराने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट और उसकी लखनऊ पीठ का दरवाजा खटखटाया था. लेकिन अदालत ने याचिकाएं खारिज कर दी थीं. इसके बाद उनकी अग्रिम जमानत याचिकाएं भी ठुकरा दी गई थीं. अब गिरफ्तार आरोपियों की नियमित जमानत याचिकाओं पर सुनवाई चल रही थी जिसके दौरान यह पूरा वाकया सामने आया.